जेल प्रशासन में अधिकारियों और कर्मचारियों की विशेष ड्यूटी को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि मोटी रकम लेकर अधिकारियों की कथित तौर पर ‘कमाऊ जेलों’ में ड्यूटी लगाई जा रही है। निलंबन के बाद अधिकारियों की तैनाती और बीते एक माह में दर्जनों कर्मियों को ऐसी जेलों में भेजे जाने के आरोपों ने जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

लखनऊ। प्रदेश के कारागार विभाग में अधिकारियों और कर्मियों की विशेष ड्यूटी एआईजी प्रशासन की वसूली का जरिया बन गई है। अपर महानिरीक्षक कारागार (एआईजी) प्रशासन मोटी रकम लेकर अधिकारियों की मनमाने तरीके से विशेष ड्यूटी लगाकर जेब भरने में जुटे हुए है। इसको लेकर अधिकारियों और कर्मियों में खासा आक्रोश व्याप्त है। मामला अनुशासन से जुड़ा होने की वजह से वसूली के इस गंभीर मामले पर चुप्पी साध रखी है। उधर विभाग के आला अफसर इस मसले पर कुछ भी बोलने से बचते नजर आए।
कारागार मुख्यालय के अपर महानिरीक्षक कारागार प्रशासन धर्मेंद्र सिंह ने स्थानांतरण सत्र के दौरान जमकर बेतरतीब तरीके से अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों के तबादले किए। इसमें अधिकारियों से मोटी रकम लेकर उन्हें कमाऊ जेलों पर तैनात कर दिया गया। यही नहीं वसूली के चक्कर में एक जेलर का तीन तीन बार तबादला आदेश बदलकर विशेष ड्यूटी लगा दी गई। कानपुर नगर जेल पर तैनात जेलर मनीष कुमार और जौनपुर जेल में तैनात अजय राय, आजमगढ़ जेल पर तैनात विकास कटियार, झांसी जेल पर तैनात कस्तूरी लाल गुप्ता इसका जीता जागता उदाहरण है। एआईजी प्रशासन का स्थानांतरण सत्र बाद विशेष ड्यूटी लगाकर वसूली करने का सिलसिला बदस्तूर जारी है।
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कारागार मंत्री को बदनाम कर रहे एआईजी जेल प्रशासन!
प्रदेश के नए जेल मैनुअल में विशेष ड्यूटी लगाए जाने का कोई प्रावधान नहीं है। इसके बाद भी एआईजी जेल प्रशासन वसूली कर लगातार अधिकारियों की ड्यूटी लगा रहे है। सूत्रों का कहना है कि विशेष ड्यूटी दो या तीन माह के लिए लगाई जाती है। प्रत्येक माह में पेशगी पहुंचाने वाले अधिकारियों को निर्धारित समयावधि पूरी होने के बाद भी वापस नहीं किया जाता है जबकि पेशगी नहीं देने वाले अधिकारियों को वापस कर दिया जाता है। कानपुर नगर और जौनपुर जेल इसका जीता जागता उदाहरण है। मोटी रकम देने वालों को कमाऊ जेल पर पहुंचाने के लिए कई कई बार ड्यूटी बदल भी दी जाती है। सूत्रों की माने तो एआईजी प्रशासन जेलमंत्री की आड़ में अधिकारियों से वसूली कर मंत्री को बदनाम कर रहे है। इस संबंध में कई प्रयासों के बाद भी एआईजी जेल प्रशासन धर्मेंद्र सिंह से बात नहीं हो पाई।
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सूत्रों का कहना है वर्ष 2023 में कानपुर नगर जेल से एक बंदी की फरारी हो गई थी। इस मामले में जेलर मनीष कुमार को निलंबित कर दिया गया। धनबल और जुगाड से उन्होंने बहाल होने के बाद पुनः कानपुर नगर जेल पर वापस करा ली। बीते दिनों अधीक्षक की शिकायत पर जेलर मनीष कुमार की पहले बुलंदशहर फिर मऊ जेल पर ड्यूटी लगा दी गई। करीब डेढ़ माह मऊ जेल पर रहने के बाद एक बार फिर उन्होंने धनबल पर अपनी ड्यूटी मऊ से मेरठ जेल पर लगवा ली। एक साल पहले मेरठ जेल पर तैनात किए गए जेलर हरबंस पाण्डेय को बगैर किसी शिकायत के मऊ जेल भेज दिया गया। इसी प्रकार जौनपुर जेल पर तैनात जेलर अजय राय, एटा जेल पर तैनात जेलर प्रदीप कश्यप को विभिन्न जेलों पर ड्यूटी लगाने के बाद उन्हीं जेलों पर वापसी कर दी गई है। मोटी रकम लेकर ड्यूटी लगाएं जाने के संबंध में जब प्रमुख सचिव कारागार अनिल गर्ग से बात करने का प्रयास किया गया तो उनसे बात नहीं हो पाई।



