पूर्व विधायक रुश्दी के प्रयास से वतन लौटा ताहिर का शव

  • पूर्व विधायक रुश्दी के अथक प्रयास से 11 दिन बाद सऊदी से वतन लौटा ताहिर का शव।
  • भाई ने खुद शव लाने की ठानी,प्रयास विफल होने पर दोबारा रुश्दी से मांगी मदद।
  • शव लेने लखनऊ एयरपोर्ट पहुंचे पूर्व विधायक।

रुदौली। विदेश में रोजी-रोटी कमाने गए अयोध्या के ताहिर अली के परिवार पर उस समय दुखों का पहाड़ टूट पड़ा,जब 22 सितंबर को सऊदी अरब के रियाद में सड़क हादसे में उनकी मौत हो गई। ग्राम कुशहरी,पोस्ट मांजनपुर निवासी ताहिर अली पुत्र मोहम्मद इस्माइल (42) रियाद में चालक के रूप में कार्य करते थे। मौत की खबर मिलते ही परिवार में मातम छा गया। सबसे बड़ी चिंता पार्थिव शरीर को वतन लाने की थी।
ताहिर के भाई ने शुरुआत में किसी से मदद लेने से इन्कार कर दिया।

उन्होंने कहा कि भाई का शव वह खुद वतन मंगवाएंगे। इसके बाद उन्होंने अपने स्तर से सऊदी अरब में जरूरी प्रक्रिया और कागजी कार्रवाई पूरी कराने के लिए लगातार प्रयास किए,लेकिन सफलता नहीं मिली। तमाम कोशिशों के बाद जब रास्ता नहीं निकला तो उन्होंने दोबारा पूर्व विधायक एवं पूर्व मंत्री सैय्यद अब्बास अली जैदी उर्फ रुश्दी मियां से मदद मांगी।

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मामले की जानकारी मिलते ही पूर्व विधायक रुश्दी मियां ने पहल की और रियाद में संबंधित अधिकारियों से लगातार संपर्क साधा। आवश्यक कानूनी एवं प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी कराने के लिए प्रयास किए गए। भारत में जरूरी दस्तावेज तैयार कराने का कार्य अधिवक्ता कमलेश यादव की निगरानी में कराया गया। लगातार प्रयासों के बाद 11 दिन बाद ताहिर का पार्थिव शरीर वतन पहुंच सका। पूर्व विधायक रुश्दी मियां स्वयं शव लेने के लिए लखनऊ एयरपोर्ट पहुंचे।

विदेश में मौत पर मदद के लिए आगे आते रहे हैं रुश्दी।

रुदौली तहसील क्षेत्र ही नहीं, बल्कि जिले और आसपास के क्षेत्रों में विदेश में किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर पूर्व विधायक रुश्दी मियां द्वारा पार्थिव शरीर को वतन लाने में सहयोग किए जाने की बात सामने आती रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार विदेश में रोजगार के दौरान जान गंवाने वाले कई लोगों के शव भारत लाने में उन्होंने व्यक्तिगत स्तर पर पहल की है। कुछ मामलों में निजी संसाधनों से भी सहयोग करने की बात कही जाती है। उनके इस कार्य की क्षेत्र में सराहना होती रही है।

ताहिर का पार्थिव शरीर गांव पहुंचते ही स्वजन में चीख-पुकार मच गई। परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल रहा। जिस भाई के जीवित लौटने की उम्मीद थी, उसे ताबूत में देखकर हर आंख नम हो गई। पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। इस दौरान मो. जलील,शाहिद अली,फहीम अहमद,शादाब खान,सैफुद्दीन कुरैशी,मो. नदीम खान,साजिद राइन,नितिन यदुवंशी,अमरेश निषाद और सुरजीत चौहान सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

“विदेश जाना मजबूरी,आखिरी बार वतन लाना जिम्मेदारी” – रुश्दी मियां

पूर्व विधायक रुश्दी मियां ने कहा कि “विदेश में रोजी-रोटी के लिए गए किसी अपने की मौत की खबर परिवार को भीतर तक तोड़ देती है। एक तरफ अपनों को खोने का गम और दूसरी तरफ हजारों किलोमीटर दूर पड़े पार्थिव शरीर को वतन लाने की चिंता—यह दर्द वही परिवार समझ सकता है, जो इस पीड़ा से गुजरता है। विदेश जाना अक्सर मजबूरी होती है, लेकिन अपनों को आखिरी बार वतन वापस लाना हमारी जिम्मेदारी है। ताहिर अली के परिवार की पीड़ा को देखते हुए हमारा प्रयास था कि उनका पार्थिव शरीर जल्द से जल्द अपनों के बीच पहुंचे। किसी दुखी परिवार के आंसू पोंछकर उसे अंतिम समय में सहारा देना ही सच्ची इंसानियत है।”

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