चम्पत राय की जगह अंतरिम महासचिव बने कृष्ण मोहन

चम्पत राय की जगह श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव बने कृष्ण मोहन कौन हैं?

अयोध्या में श्रीराम मंदिर से जुड़े घटनाक्रम पर पूरे देश की नजर रहती है। ऐसे में जब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बड़ा प्रशासनिक बदलाव हुआ और लंबे समय तक महासचिव रहे चम्पत राय की जगह कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई, तो स्वाभाविक रूप से लोगों के मन में यह सवाल उठने लगा कि आखिर कृष्ण मोहन कौन हैं और उन्हें इतनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी क्यों दी गई है।

कृष्ण मोहन का नाम संघ और संगठन की दुनिया में नया नहीं है। वे लंबे समय तक प्रशासनिक सेवा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संगठनात्मक कार्यों से जुड़े रहे हैं। उनकी पहचान एक अनुशासित, शांत और संगठन के प्रति समर्पित कार्यकर्ता की रही है। यही वजह है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने उन पर भरोसा जताते हुए अंतरिम महासचिव जैसी अहम जिम्मेदारी सौंपी है।

कृष्ण मोहन मूल रूप से उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के शाहाबाद क्षेत्र के निवासी हैं। शुरुआती शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से एमएससी की पढ़ाई की। पढ़ाई के दौरान ही उनकी रुचि प्रशासनिक सेवा की ओर बढ़ी और उन्होंने कठिन प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी।

साल 1978 में उनका चयन भारतीय वन सेवा (IFS) में हुआ। उन्हें महाराष्ट्र कैडर मिला और उन्होंने वन विभाग में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। अपने प्रशासनिक जीवन में वे ईमानदार, अनुशासित और कुशल अधिकारी के रूप में पहचाने गए। वन संरक्षण, पर्यावरण प्रबंधन और प्रशासनिक दक्षता के क्षेत्र में उनके कार्यों की सराहना भी होती रही।

महाराष्ट्र में सेवा के दौरान नागपुर में उनकी तैनाती हुई। नागपुर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मुख्यालय होने के कारण उनका संपर्क संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों से बढ़ा। धीरे-धीरे वे संघ के वैचारिक और संगठनात्मक कार्यों से सक्रिय रूप से जुड़ गए। सेवा में रहते हुए भी उन्होंने संगठनात्मक गतिविधियों में रुचि बनाए रखी और सेवानिवृत्ति के बाद पूरी तरह समाजसेवा और संघ के कार्यों में सक्रिय हो गए।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में कृष्ण मोहन ने नगर संघ चालक, जिला संघ चालक, प्रांत स्तर और क्षेत्रीय संघ चालक जैसी अनेक महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। संघ में इन पदों पर वही व्यक्ति पहुंचता है, जिसके संगठनात्मक कौशल, अनुशासन और नेतृत्व क्षमता पर शीर्ष नेतृत्व को पूरा भरोसा हो। वर्षों तक विभिन्न जिम्मेदारियों का सफल निर्वहन करने के कारण उन्होंने संगठन में अपनी अलग पहचान बनाई।

साल 2012 में भारतीय वन सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद वे अपने गृह जनपद हरदोई लौट आए। इसके बाद उन्होंने समाजसेवा, सांस्कृतिक गतिविधियों और संगठनात्मक कार्यों में खुद को पूरी तरह समर्पित कर दिया। ग्रामीण विकास, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक जागरूकता से जुड़े कार्यक्रमों में उनकी सक्रिय भागीदारी रही।

श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन और मंदिर निर्माण से जुड़े विषयों में भी उनकी गहरी रुचि रही है। संघ परिवार और मंदिर आंदोलन से जुड़े अनेक वरिष्ठ लोगों के साथ उनका लंबे समय से संपर्क रहा, जिसके कारण उन्हें मंदिर से जुड़े प्रशासनिक और संगठनात्मक पक्ष की भी अच्छी समझ है।

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में उनकी औपचारिक एंट्री 9 सितंबर 2025 को हुई। ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्य कामेश्वर चौपाल के निधन के बाद रिक्त हुई सदस्यता पर उन्हें ट्रस्ट का सदस्य चुना गया। कामेश्वर चौपाल स्वयं राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख चेहरों में रहे थे। उनके स्थान पर कृष्ण मोहन का चयन इस बात का संकेत माना गया कि ट्रस्ट ऐसे व्यक्ति को साथ लाना चाहता है जिसके पास प्रशासनिक अनुभव के साथ-साथ संगठन की गहरी समझ भी हो।

ट्रस्ट का सदस्य बनने के बाद कृष्ण मोहन ने मंदिर निर्माण, ट्रस्ट की गतिविधियों और प्रशासनिक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई। उनकी कार्यशैली शांत, व्यवस्थित और विवादों से दूर रहने वाली मानी जाती है। यही कारण है कि जब अंतरिम महासचिव की जिम्मेदारी तय करने का समय आया तो ट्रस्ट ने उन पर विश्वास जताया।

महासचिव का पद केवल औपचारिक नहीं होता। ट्रस्ट के दैनिक प्रशासन, बैठकों के संचालन, विभिन्न समितियों के समन्वय, सरकारी एजेंसियों से संवाद, मंदिर परिसर के विकास कार्यों की निगरानी और भविष्य की योजनाओं के क्रियान्वयन में महासचिव की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में कृष्ण मोहन के सामने यह जिम्मेदारी होगी कि वे ट्रस्ट के कार्यों को सुचारु रूप से आगे बढ़ाएं और राम मंदिर परिसर के विकास से जुड़ी योजनाओं को गति दें।

उनके प्रशासनिक अनुभव का लाभ ट्रस्ट को मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। भारतीय वन सेवा में कई दशकों तक काम करने के कारण उन्हें बड़े स्तर पर प्रशासन चलाने, संसाधनों का प्रबंधन करने और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने का व्यापक अनुभव है। वहीं संघ में वर्षों तक संगठनात्मक जिम्मेदारियां निभाने से उन्हें लोगों को साथ लेकर चलने और अनुशासन के साथ काम करने की भी गहरी समझ है।

राम मंदिर अब केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बन चुका है। हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु अयोध्या पहुंच रहे हैं। ऐसे में ट्रस्ट की जिम्मेदारियां लगातार बढ़ रही हैं। दर्शन व्यवस्था, सुरक्षा, विकास परियोजनाएं, सांस्कृतिक आयोजन और भविष्य की योजनाओं को बेहतर ढंग से संचालित करने के लिए अनुभवी नेतृत्व की आवश्यकता है।

कृष्ण मोहन की नियुक्ति को इसी दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती मंदिर परिसर के विकास कार्यों को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाना, श्रद्धालुओं की सुविधाओं को बेहतर बनाना और ट्रस्ट के प्रशासनिक कामकाज को प्रभावी ढंग से संचालित करना होगी।

कुल मिलाकर, कृष्ण मोहन प्रशासनिक अनुभव, संगठनात्मक क्षमता और सामाजिक सरोकारों का संतुलित मिश्रण माने जाते हैं। हरदोई के शाहाबाद से निकलकर भारतीय वन सेवा के वरिष्ठ अधिकारी बनने, संघ में महत्वपूर्ण दायित्व निभाने और अब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव बनने तक का उनका सफर लंबे अनुभव, अनुशासन और संगठन के प्रति समर्पण की कहानी है। आने वाले समय में उनकी कार्यशैली और निर्णय यह तय करेंगे कि राम मंदिर ट्रस्ट अपनी आगामी योजनाओं को किस गति और दिशा में आगे बढ़ाता है।यदि चाहें, मैं इसे टीवी न्यूज़ पैकेज, यूट्यूब स्क्रिप्ट या एंकर लिंक की शैली में भी तैयार कर सकता हूँ।

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