राम मंदिर में चंदा चोरी के मामले में एक और चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। चढ़ावा चोरी का मामला 27 मई को ही ट्रस्ट और पुलिस के संज्ञान में आ गया था। इसके बाद ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय एफआईआर कराने पहुंचे थे। लेकिन फोन आते ही थाने से लौट आए थे। अब कई बड़े सवाल उठ रहे हैं।
पुलिस ने कोर्ट की अनुमति के बाद मंगलवार को जेल में बंद राम मंदिर चढ़ावा चोरी के आरोपियों से करीब दो घंटे पूछताछ की। सबसे लंबी पूछताछ आरोपी अविनाश मिश्रा से की गई। आरोपियों ने करोड़ों की चोरी स्वीकारते हुए पूरे घटनाक्रम के बारे में भी बताया। इस दौरान ट्रस्टी अनिल मिश्रा का नाम फिर सामने आया। जिसमें बताया गया कि दान राशि की गणना संबंधी प्रक्रिया में अनिल मिश्रा की प्रमुख भूमिका रहती थी।
प्रकरण में पुलिस ने बीते बृहस्पतिवार को केस दर्ज किया था। शुक्रवार को चंपत राय के करीबी टिन्नू यादव, गणना इंचार्ज सुभाष श्रीवास्तव व गणनाकर्मी अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष यादव, रमाशंकर मिश्रा, करुणेश व अवनीश शुक्ला को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। कोर्ट से अनुमति लेने के बाद पुलिस ने मंगलवार को जेल जाकर आरोपियों से पूछताछ की। सूत्रों के मुताबिक चूंकि सबसे अधिक बरामदगी अविनाश के पास से हुई थी, इसलिए उससे लंबी पूछताछ की गई। सूत्रों के अनुसार पूछताछ में पता चला कि टिन्नू यादव के पास गणना कक्ष की चाबी रहती थी। दूसरी चाबी बैंक कर्मियों के पास होती थी। इन सभी की मिलीभगत से रकम पार की जाती थी। टिन्नू व बैंककर्मी चोरी की रकम में हिस्सा लेते थे।
एक आदमी करता था चोरी, बाकी उसे घेर कर खड़े होते थे
आरोपियों ने बताया कि टिन्नू की मिलीभगत होने से चोरी आसानी से होती थी। कोई भी सवाल करने वाला नहीं रहता था। उनको पता था कि कैमरे कहां-कहां लगे हैं। इसलिए कैमरे से बचकर चोरी को अंजाम देते थे। कैमरे की नजर से बचने के लिए एक आदमी रकम पार करता था और बाकी लोग उसे घेर लेते थे। फिर रकम बाथरूम में छिपाते थे और मौका पाकर बाहर ले जाते थे। ट्रस्ट के पदाधिकारियों के करीबी होने की वजह से उनकी कहीं पर कोई चेकिंग नहीं होती थी।
कंट्रोल रूम से निगरानी बन गई थी औपचारिकता
मंदिर परिसर में बने कंट्रोल रूम में सभी कैमरों का कंट्रोल रहता है। आरोपियों ने पुलिस को बताया कि निगरानी के लिए जो लोग लगाए गए थे, वह सिर्फ औपचारिकता करते थे। कोई भी निगरानी नहीं करते थे। ये बात भी आरोपियों को पता थी, इसलिए बेफिक्री से वह रकम पार करते रहे।
ट्रस्ट के पदाधिकारी चंपत राय, अनिल मिश्रा व अन्य तमाम लोग मामला दबाने में जुटे थे। उनकी मंशा थी कि रकम बरामद कर ली जाए और फिर मामला रफादफा कर दिया जाए। इसलिए पहले केस दर्ज नहीं कराया। लेकिन, पुलिस की मदद से अधिकारियों की तरह काम करते हुए ये पदाधिकारी छानबीन में खुद ही जुटे थे। सूत्रों के मुताबिक, पुलिस भी इन पदाधिकारियों के दबाव में थी, इसलिए चुप्पी साधे थी। जैसा निर्देश ये पदाधिकारी कर रहे थे, वह वैसा ही करते जा रहे थे।
अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में अब एक नया दावा सामने आया है। सोशल मीडिया पर प्रसारित एक रिपोर्ट के अनुसार, चोरी का मामला 27 मई को ही ट्रस्ट और पुलिस के संज्ञान में आ गया था। पुलिस ने तत्काल लवकुश, मनीष यादव, करुणेश, रामशंकर समेत छह लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी थी और उन्हें हिरासत में भी लिया गया था।
दावा यह भी है कि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय एफआईआर दर्ज कराने थाने पहुंचे थे, लेकिन ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने फोन पर उनकी किसी से बातचीत कराई। जिसके बाद वह बिना तहरीर दिए वापस लौट गए।इसके बाद करीब 10 दिनों तक यह मामला सार्वजनिक नहीं हुआ। सात जून को समाजवादी पार्टी के नेता पवन पांडेय ने इस मुद्दे को उठाया। अगले दिन आठ जून को सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट कर मामला उठाया।
अब यह सवाल उठा रहा है कि जब मामला 27 मई को ही सामने आ गया था तो इस मामले को दबाने का प्रयास क्यों किया गया और वह फोन किसका था जिसके दबाव में आकर चंपत राय ने एफआईआर नहीं कराई थी।
आरोपियों ने करोड़ों की चोरी कबूली अनिल मिश्रा, टिन्नू के नाम लिए
पुलिस ने कोर्ट की अनुमति के बाद मंगलवार को जेल में बंद राम मंदिर चढ़ावा चोरी के आरोपियों से करीब दो घंटे पूछताछ की। सबसे लंबी पूछताछ आरोपी अवनीश शुक्ला से की गई। आरोपियों ने करोड़ों की चोरी स्वीकारते हुए पूरे घटनाक्रम के बारे में भी बताया। इस दौरान ट्रस्टी अनिल मिश्रा का नाम फिर सामने आया। बताया गया कि दान राशि की गणना प्रक्रिया में अनिल मिश्रा की प्रमुख भूमिका रहती थी। इसके अलावा मंगलवार को भी चंपत राय से पुलिस ने पूछताछ की। प्रकरण में पुलिस ने बीते बृहस्पतिवार को केस दर्ज किया था।
चंपत राय के करीबी टिन्नू यादव, गणना इंचार्ज सुभाष श्रीवास्तव व गणनाकर्मी अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष, रमाशंकर मिश्रा, करुणेश व अवनीश शुक्ला को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। कोर्ट से अनुमति लेने के बाद पुलिस ने मंगलवार को जेल जाकर आरोपियों से पूछताछ की।
सूत्रों के मुताबिक चूंकि सबसे अधिक बरामदगी अवनीश से हुई थी, इसलिए उससे लंबी पूछताछ की गई। सूत्रों के अनुसार, पूछताछ में पता चला कि टिन्नू के पास गणना कक्ष की चाबी रहती थी। दूसरी चाबी बैंक कर्मियों के पास होती थी। इन सभी की मिलीभगत से रकम पार की जाती थी। टिन्नू व बैंककर्मी चोरी की रकम में हिस्सा लेते थे।
ट्रस्ट की 6 जुलाई को बैठक
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट की बैठक 6 जुलाई को होने की उम्मीद है। विश्व हिंदू परिषद के प्रमुख आलोक कुमार ने पहले बताया था कि बैठक 7 जुलाई को होगी, लेकिन ट्रस्ट के सूत्रों ने बताया कि अब इसे एक दिन पहले ही निर्धारित कर दिया गया है। बैठक में चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर विचार के अलावा पूरे मुद्दे पर गहन चर्चा होने की उम्मीद है।
बैंक खातों में मिला हैसियत से अधिक रकम का लेनदेन
राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले की जांच में हैसियत से कई गुना ट्रांजेक्शन आरोपियों के बैंक खातों में मिला है। साल भर में सभी आरोपियों के खातों की डिटेल में करोड़ों के लेनदेन के सुबूत मिले हैं। एसआईटी और पुलिस ने इसको सुबूत के तौर पर जांच में शामिल किया है।
बैंकों से आरोपियों के बैंक खातों का विवरण मांगा
सभी के मकान, प्लॉट और हॉस्टल समेत कई संपत्तियों का ब्योरा जुटाकर उसकी कीमत का आकलन किया जा रहा है। वहीं पुलिस अनिल और गोपाल को भी नोटिस जारी कर चुकी है। लेकिन दोनों से अभी तक पूछताछ नहीं की गई है। प्रकरण में एसआईटी और पुलिस दोनों की जांच चल रही है। पुलिस ने भी बैंकों से आरोपियों के बैंक खातों का विवरण मांगा था। इसमें आरोपियों के कई परिवार वालों के खाते भी शामिल हैं। एक-एक आरोपी व उनके परिजनों के खातों में जितनी रकम का ट्रांजेक्शन हुआ है, उसका उनकी सैलरी से मिलान नहीं हो सका। क्योंकि कमाई न के बराबर है और रकम इधर-उधर लाखों करोड़ों की हुई।
राम मंदिर प्रकरण में आरोपियों पर गैंगस्टर एक्ट व रासुका लगाने की मांग
धर्म सेना भारत ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चोरी और गबन प्रकरण के आरोपियों के विरुद्ध गैंगस्टर एक्ट व राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत कार्रवाई की मांग उठाई है।
सीमित रही है ट्रस्ट के अन्य सदस्यों की भूमिका
ट्रस्ट के संचालन में सबसे अधिक भूमिका चंपत राय व डॉक्टर अनिल मिश्र की ही रही है। अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास व कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि की भूमिका भी सीमित ही रही, जबकि संस्थापक ट्रस्टी के. परासरन, जगद्गुरु वासुदेवाचार्य, जगद्गुरु विश्वप्रसन्न तीर्थ और युगपुरुष परमानंद अधिक आयु के कारण नियमित रूप से सक्रिय नहीं रह सके। महंत दिनेंद्र दास को भी हाशिये पर रखा गया। कामेश्वर चौपाल के निधन के बाद हाल ही में डॉ. कृष्ण मोहन को ट्रस्ट में शामिल किया गया। मंदिर प्रकरण में एफआईआर भी उनकी तहरीर पर दर्ज कराई गई है। बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र के निधन के बाद एक ट्रस्टी का पद पहले से रिक्त है।
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव की चर्चा तेज हो गई है। ट्रस्ट महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र के इस्तीफों ने इसे और बल दिया है। दोनों के इस्तीफे के बाद पहले से रिक्त एक ट्रस्टी पद को मिलाकर ट्रस्ट के तीन महत्वपूर्ण पद खाली हो जाएंगे। ऐसी स्थिति में वर्तमान ट्रस्ट भंग कर उसके पुनर्गठन की संभावना बन सकती है।
फरवरी 2020 में केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के अनुपालन में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन किया था। ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास रहे, जबकि दैनिक प्रशासनिक संचालन और अधिकतर महत्वपूर्ण निर्णयों की जिम्मेदारी महासचिव चंपत राय संभालते हैं। ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र भी ट्रस्ट के प्रमुख निर्णयों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हें। दोनों पद रिक्त होने पर ट्रस्ट के संचालन का मौजूदा संतुलन प्रभावित होना स्वाभाविक माना जा रहा है।
राम मंदिर में प्रतिदिन करोड़ों रुपये का चढ़ावा, हजारों श्रद्धालुओं का प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था, निर्माण कार्य, खरीद, लेखा और मानव संसाधन जैसे कार्य अब अत्यंत व्यापक हो चुके हैं। ऐसे में जवाबदेही, पारदर्शिता और वित्तीय निगरानी को और मजबूत करने के लिए प्रशासनिक ढांचे में बदलाव की आवश्यकता महसूस की जा रही है। हालिया घटनाक्रम ने इस बहस को और तेज कर दिया है। सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट के पुनर्गठन के साथ भविष्य में तिरुपति और वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की तर्ज पर अधिक पेशेवर प्रशासनिक व्यवस्था लागू हो सकती है। इसमें मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ)की तैनाती की जा सकती है।



