- मुख्यमंत्री ने बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के 12 लाख शिक्षक/शिक्षणेत्तर कर्मचारियों एवं उनके आश्रितों को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करने वाली मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना का वाराणसी में शुभारम्भ किया।
- 1.10 करोड़ विद्यार्थियों को यूनिफॉर्म, जूता-मोजा, स्वेटर, स्कूल बैग एवं स्टेशनरी हेतु उनके अभिभावकों के खातों में 1,320 करोड़ रु0 डी0बी0टी0 के माध्यम से अन्तरित किये।
- मुख्यमंत्री के समक्ष बेसिक शिक्षा परिषद के शिक्षकों एवं संविदाकर्मियों को सामाजिक सुरक्षा कवच प्रदान करने हेतु स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया और बेसिक शिक्षा विभाग के साथ एम0ओ0यू0 का आदान-प्रदान।
- स्वच्छ एवं हरित विद्यालय योजना के अन्तर्गत भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर चयनित प्रदेश के 12 विद्यालयों के प्रधानाचार्यों/प्रधानाध्यापकों को सम्मानित किया।
- आज प्रत्येक शिक्षक, शिक्षामित्र और अनुदेशक को सामाजिक सुरक्षा की नई गारण्टी दी जा रही, भारतीय स्टेट बैंक के साथ मिलकर बेसिक शिक्षा विभाग इस कार्यक्रम को लागू कर रहा, देश में ऐसी व्यवस्था कहीं नहीं।
- बेसिक शिक्षा विभाग ने इस कार्य को सबसे पहले किया, अन्य विभागों तथा निजी क्षेत्र को भी इसके दिशा में कार्य करना चाहिए।
- कैशलेस चिकित्सा की सुविधा पर लगभग 450 करोड़ रु0 वार्षिक व्ययभार आएगा, जिसे प्रदेश सरकार वहन करेगी, लगभग 12 लाख शिक्षक, रसोईयां आदि लाभान्वित होंगे।
- प्रत्येक नागरिक, शिक्षक, शिक्षा मित्र, अनुदेशक का दायित्व कि हर बच्चे को स्कूल तक जरूर लेकर जाए।
- शिक्षा प्रधानमंत्री जी के विकसित भारत की आधारशिला,इस पर किया गया निवेश कभी व्यर्थ नहीं जाता।
- हमारी सरकार ने शिक्षा व्यवस्था के सुधार के लिए अनेक कदम उठाए, शिक्षा का उन्नयन हुआ।
- हमारे आदर्श आचार्य चाणक्य, पं0 मदन मोहन मालवीय, डॉ0 राधाकृष्णन, जब आचार्य चाणक्य जैसा गुरु होगा, तो देश कभी विपन्न नहीं हो सकता।
- उ0प्र0 की बहुत सी योजनाएं राष्ट्रीय स्तर पर सक्सेस स्टोरी के रूप में देखी जाती, ऑपरेशन कायाकल्प, निपुण भारत तथा प्रोजेक्ट अलंकार जैसे प्रयास इनका उदाहरण।
वाराणसी/लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि सभी लोग उत्तम आरोग्यता को प्राप्त करें, इसके दृष्टिगत आज बेसिक और माध्यमिक शिक्षा से जुड़े 12 लाख शिक्षकों, शिक्षामित्र, अनुदेशक, रसोईया और वॉर्डन को 05 लाख रुपये वार्षिक कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा से लाभान्वित किया जा रहा है। बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में अध्ययनरत 01 करोड़ 10 लाख बच्चों को दो यूनिफॉर्म, स्कूल बैग, जूता-मोजा, स्वेटर आदि के लिए पहले चरण में 1,320 करोड़ रुपये धनराशि उनके अभिभावकों के खातों में डी0बी0टी0 के माध्यम से अन्तरित की गयी है। आज प्रत्येक शिक्षक, शिक्षामित्र और अनुदेशक को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने हेतु बेसिक शिक्षा विभाग व स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया के मध्य एक एम0ओ0यू0 भी हस्ताक्षरित किया गया है।
आज जनपद वाराणसी में प्रदेश के बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के 12 लाख शिक्षक/शिक्षणेत्तर कर्मचारियों एवं उनके आश्रितों को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करने वाली मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना का शुभारम्भ करने के उपरान्त आयोजित कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने 1.10 करोड़ विद्यार्थियों को यूनिफॉर्म, जूता-मोजा, स्वेटर, स्कूल बैग एवं स्टेशनरी हेतु प्रति विद्यार्थी 1200 रुपये की दर से उनके अभिभावकों के खातों में 1,320 करोड़ रुपये डी0बी0टी0 के माध्यम से अन्तरित किये।
मुख्यमंत्री ने स्वच्छ एवं हरित विद्यालय योजना के अन्तर्गत भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर चयनित प्रदेश के 12 विद्यालयों के प्रधानाचार्यों/प्रधानाध्यापकों को सम्मानित तथा मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना के लाभार्थियों को प्रतीकात्मक कैशलेस कार्ड वितरित किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री जी के समक्ष बेसिक शिक्षा परिषद के शिक्षकों एवं संविदाकर्मियों को सामाजिक सुरक्षा कवच प्रदान करने हेतु स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया और बेसिक शिक्षा विभाग के साथ एम0ओ0यू0 का आदान-प्रदान किया गया। मुख्यमंत्री जी ने कार्यक्रम में आयोजित प्रदर्शनी में विद्यालयों के स्टॉलों का अवलोकन किया तथा बच्चों से संवाद कर उनका उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम के दौरान बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग की योजनाओं पर केन्द्रित एक लघु फिल्म प्रदर्शित की गयी।
आज प्रत्येक शिक्षक, शिक्षामित्र और अनुदेशक को सामाजिक सुरक्षा की नई गारण्टी दी जा रही है। यदि आपके साथ ऐसी कोई दुर्घटना होती है, तो उन स्थितियों में स्थायी शिक्षक और कार्मिकों को जिनका मासिक वेतन 10 हजार रुपये से अधिक है, उन्हें 10 लाख रुपये का ग्रुप टर्म लाइफ इंश्योरेंस कवर, 01 करोड़ रुपये का पर्सनल एक्सीडेन्ट इंश्योरेंस कवर, 01 करोड़ रुपये का स्थायी दिव्यांगता कवर, 1.6 करोड़ रुपये का एयर एक्सीडेन्ट इंश्योरेंस कवर प्रदान किया जाएगा। साथ ही, किसी अनहोनी की दिशा में शिक्षक या कार्मिक के बच्चों की शिक्षा और पुत्रियों के विवाह के लिए ऐड ऑन कवर भी प्रदान किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आपको सामाजिक सुरक्षा के रूप में एक नई सुविधा का लाभ दिया जा रहा है। उत्तर प्रदेश इसे लागू करने वाला पहला राज्य है। भारतीय स्टेट बैंक के साथ मिलकर उत्तर प्रदेश का बेसिक शिक्षा विभाग इस कार्यक्रम को लागू कर रहा है। देश में ऐसी व्यवस्था कहीं नहीं है। संविदा कार्मिकों का मासिक वेतन 10 हजार रुपये से अधिक होने की दशा में 30 लाख से 80 लाख रुपये तक का पर्सनल एक्सीडेण्ट इन्श्योरेन्स कवर, स्थायी/आंशिक दिव्यांगता की दशा में 30 लाख से 80 लाख रुपये/15 लाख से 40 लाख रुपये का इन्श्योरेन्स कवर, एयर एक्सीडेण्ट की दशा में 30 लाख से 80 लाख रुपये का इन्श्योरेन्स कवर तथा किसी अनहोनी की दशा में कार्मिक के बच्चों की शिक्षा तथा पुत्रियों के विवाह के लिए भी ‘एड ऑन कवर’ प्रदान किया जाएगा। 10 हजार रुपये से कम नेट मासिक वेतन वाले कार्मिकों को जीरो बैलेंस अकाउण्ट तथा ए0टी0एम0/पर्सनल एक्सीडेण्टल इन्श्योरेन्स पॉलिसी के आधार पर 02 लाख रुपये का एक्सीडेण्टल इन्श्योरेन्स कवर प्रदान किया जाएगा। इसके अन्तर्गत रसोइया तथा शिक्षामित्र भी आच्छादित हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कैशलेस चिकित्सा की इस सुविधा पर लगभग 450 करोड़ रुपये वार्षिक व्ययभार आएगा, जिसको प्रदेश सरकार वहन करेगी। इसके अन्तर्गत लगभग 12 लाख शिक्षक, रसोईयां आदि लाभान्वित होंगे। उन्होंने कहा कि शिक्षकों से गुरु दक्षिणा के रूप में हम केवल एक बात मांगते हैं, कि वह सभी बच्चों पर ध्यान दें। स्कूलों का वातावरण स्कूल जैसा लगना चाहिए। स्कूल का वातावरण स्वच्छ व सुन्दर होना चाहिए। एक अनुशासित वातावरण में देश के भविष्य को गढ़ने वाला आध्यात्मिक तेज वहां दिखाई देना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा विश्वनाथ की यह पावन धरा भारत की सांस्कृतिक राजधानी के रूप में जानी जाती है। यह भारत की आध्यात्मिक परम्परा की पौराणिक स्थली है। साथ ही, यह प्राचीन ज्ञान की धरोहर का एक प्रमुख केन्द्र भी रहा है। काशी की धरा से इस योजना का शुभारम्भ इसे सफलता की नई ऊंचाई तक पहुंचाएगा। कैशलेस उपचार की सुविधा से 12 लाख शिक्षक लाभान्वित होने जा रहे हैं। 01 करोड़ 10 लाख बच्चों के लिए डी0बी0टी0 के माध्यम से धनराशि दी गयी है। जो नये नामांकन होंगे, उनके पास भी धनराशि पहुंच जाएगी।

इसके साथ ही, सभी शिक्षकों को सामाजिक सुरक्षा की एक बड़ी गारण्टी प्राप्त हो रही है। यह बड़ी उपलब्धि है। शिक्षा विभाग ने इस कार्य को सबसे पहले किया है। अन्य विभागों को भी यह कार्य करना चाहिए। निजी क्षेत्र को भी इसके दिशा में कार्य करना चाहिए। यदि बीमा कम्पनियां और बैंकर्स इस दिशा में कार्य करते हैं, तो इस पहल को आगे बढ़ाना चाहिए। घटना-दुर्घटना किसी के भी साथ हो सकती है। यह बता कर नहीं आती। इसलिए सामाजिक सुरक्षा की गारण्टी सबको प्राप्त होनी चाहिए, जिससे परिवार असहाय न बने।आपका दायित्व है कि आपका विद्यालय अच्छा लगे। स्वच्छता के साथ-साथ विद्यालय के आंतरिक अनुशासन को बनाए रखने के लिए छात्र अपनी यूनिफॉर्म, बैग, बुक्स के साथ आए। उनके पैरों में जूते-मोजे हो। सर्दी के समय वह स्वेटर पहन कर आए। इसके लिए बच्चों और अभिभावकों को समझाएं। एक शिक्षक व गुरुजन के रूप में उनका सही मार्ग प्रशस्त करना आपका दायित्व है। यह हमारा कर्तव्य और राष्ट्रीय दायित्व भी है।
हमारा दायित्व है बच्चों को साफ-सफाई व स्वच्छता के बारे में बताएं। यदि किसी विद्यार्थी ने तीन दिन एक यूनिफॉर्म पहनी है और वह गन्दी हो गयी है, तो उसे धोकर रख लें। अगले तीन दिन दूसरी यूनिफॉर्म पहनें। घर पर खेलते समय स्कूली यूनिफॉर्म के स्थान पर दूसरे कपड़े पहने। विद्यालय की यूनिफॉर्म अलग है। घर में सामान्य कामकाज के लिए अलग कपड़ों का प्रयोग करें। यह सभी बातें उन अबोध बच्चों के लिए एक प्रेरणा होगी। इससे स्वच्छता के लक्ष्य और स्वच्छ भारत मिशन की सफलता को नई ऊंचाई तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। हमने कहा है कोई बच्चा छूटने न पाए।
प्रत्येक नागरिक, शिक्षक, शिक्षा मित्र, अनुदेशक का दायित्व बनता है कि हर बच्चे को स्कूल तक जरूर लेकर जाए। आज कार्यक्रम स्थल पर बेहतरीन प्रदर्शनी आयोजित की गयी है। इस प्रदर्शनी में बच्चों के मन में एक अलग उत्साह है। निपुण भारत अभियान के अंतर्गत तीसरी क्लास के बच्चे बहुत अच्छे ढंग से वाक्य बनाने और पढ़ने में निपुण दिखाई दे रहे हैं। उन्हें भाषा का ज्ञान है। साथ ही, अंकगणित का ज्ञान भी दिखाई दे रहा है। यह उन बच्चों के लिए एक अच्छी शुरुआत है। निपुण भारत अभियान में हम प्रत्येक बच्चे को पारंगत कर सकें। उन्हें योग्य बना सकें। यह एक शिक्षक के रूप में हमारा दायित्व ही नहीं, राष्ट्रीय कर्तव्य भी है। जब नींव मजबूत होगी, तो भव्य इमारत का निर्माण करने में हम सफल होंगे। सुदृढ़ नींव पर ही एक सशक्त भवन तैयार हो सकता है। यह आप सभी शिक्षकगणों का दायित्व है।
उत्तर प्रदेश हमेशा से सम्भावनाओं वाला प्रदेश रहा है। एक समय था, जब देश के कई क्षेत्रों में शिक्षक उत्तर प्रदेश से जाते थे। अरुणाचल प्रदेश से केन्द्र सरकार में मंत्री श्री किरन रिजिजू ने बताया है कि उनके यहां अधिकांश शिक्षक उत्तर प्रदेश के हैं। मध्य प्रदेश में भी अलीगढ़, एटा, कासगंज, हाथरस, आगरा, मैनपुरी, इटावा, फिरोजाबाद, मथुरा जैसे जनपदों से बड़ी संख्या में लोग वहां गये हैं। एक समय ऐसा भी आया, जब उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को लोगों ने अपने निहित स्वार्थों के लिए पूरी तरह बर्बाद कर दिया। जब शिक्षा की उपेक्षा हुई, तो उत्तर प्रदेश बीमारू राज्य हो गया। प्रदेश के नौजवानों के सामने पहचान का संकट आ गया। लोग यहाँ के लोगों को भेद की दृष्टि से देखते थे।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि शिक्षा समाज की आधारशिला है। शिक्षा के बगैर कोई भी कार्य होना असम्भव है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के विकसित भारत की आधारशिला शिक्षा ही है। इसलिए उन्होंने भारत को एक व्यावहारिक राष्ट्रीय शिक्षा नीति दी। यह भारत की परम्पराओं पर आधारित है।

विगत 09 वर्षों में डबल इंजन सरकार द्वारा किए गए प्रयासों से प्रदेश के निवासी पहचान के संकट मुक्त हुए हैं। शिक्षा पर किया गया कोई भी निवेश कभी व्यर्थ नहीं जाता है। हमारी सरकार ने शिक्षा व्यवस्था के सुधार के लिए अनेक कदम उठाए। शिक्षा का उन्नयन हुआ। उत्तर प्रदेश अब तेजी से दौड़ता दिखाई दे रहा है। अब उत्तर प्रदेश में माध्यमिक शिक्षा परिषद की परीक्षाएं नकलमुक्त हुई हैं। पहले तीन-तीन महीने तक परीक्षाएं चलती थी। अगले दो-तीन महीने में रिजल्ट आते थे। शेष समय में त्योहार आदि के बाद पढ़ाई के लिए बहुत कम समय मिलता था। शिक्षकों और अधिकारियों के प्रयासों से अब मात्र 14 दिनों में माध्यमिक शिक्षा परिषद की सभी परीक्षाएं सम्पन्न होती हैं। अगले 15 दिन में परिणाम भी आ रहे हैं। एक महीने के अंदर सारी प्रक्रिया पूर्ण हो रही है। लगभग 56 लाख बच्चे परीक्षार्थी के रूप में शामिल होते हैं। नकलमुक्त परीक्षा सम्पन्न होती है। पहले अन्य राज्यों से परीक्षार्थी यहां आकर परीक्षा देते थे और नकल करके पास हो जाते थे। हमने एक अभियान चलाकर इस व्यवस्था को बन्द कराया। यह शरारत ही पहचान का संकट खड़ा करती थी और उत्तर प्रदेश के तथा बाहर से आने वाले नौजवानों के भविष्य के साथ खिलवाड़ भी करती थी।
देश के भविष्य के साथ और देश की अखंडता के साथ खिलवाड़ करने का अधिकार किसी को नहीं होना चाहिए। हमारे आदर्श आचार्य चाणक्य, पं0 मदन मोहन मालवीय, डॉ0 राधाकृष्णन हैं। जब आचार्य चाणक्य जैसा गुरु होगा, तो देश कभी विपन्न नहीं हो सकता। विदेशी ताकतें हमारी ओर आंखें उठाकर नहीं देख सकती। इस प्रकार का माहौल बनाने के लिए विगत 09 वर्षों में आप सभी शिक्षकों ने बड़ी मेहनत और प्रयास किये हैं। उत्तर प्रदेश की बहुत सी योजनाएं राष्ट्रीय स्तर पर सक्सेस स्टोरी के रूप में देखी जाती है। ऑपरेशन कायाकल्प, निपुण भारत तथा माध्यमिक शिक्षा के क्षेत्र में प्रोजेक्ट अलंकार जैसे प्रयास इनका उदाहरण है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन स्कूलों में आप सभी ने अध्ययन किया है, यदि उन स्कूलों में कोई सुविधा अब तक नहीं हो पायी है, तो आपका दायित्व है कि आप भी उस विद्यालय में सुविधाओं के विकास के लिए अपना थोड़ा योगदान करें। इसे ही कृतज्ञता ज्ञापित करना कहते है। विद्यालय हमारे लिए किसी मन्दिर से कम नहीं हैं। वहां जाकर कार्यक्रमों में भागीदार बनना तथा अपना योगदान करना चाहिए। अनेक पुराने सरकारी इण्टर कॉलेज तथा राजकीय बालिका इण्टर कॉलेज व शासकीय सहायता प्राप्त निजी क्षेत्र में संचालित विद्यालयों ने बहुत अच्छा काम किया था। उन्होंने देश की एक पीढ़ी को गढ़ने का काम किया था। एक समय के बाद हालत उनकी स्थिति खराब हो गई।
हमने प्रोजेक्ट अलंकार के माध्यम से ऐसे सभी विद्यालयों के सुधार के लिए एक सुविधा उपलब्ध करायी। लगभग 1,000 ऐसे विद्यालयों के लिए माध्यमिक शिक्षा परिषद ने धनराशि उपलब्ध करवाई। आज इनके भवन भव्य दिखाई दे रहे हैं। इनमें अच्छे फर्नीचर, लेबोरेटरी, डिजिटल लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं दी गई हैं। यह उन संस्थाओं के प्रति हमारी कृतज्ञता है, जिन्होंने पीढ़ियों को गढ़ा था। यह कार्य आने वाली पीढ़ी के लिए एक आश्वस्ति भी है। आज का यह कार्यक्रम इसी दिशा में एक नई कड़ी है। हमें निरन्तर आगे बढ़ना होगा। आपके द्वारा किये गये प्रयास बच्चों में आत्मविश्वास के रूप में सामने आ रहे हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार सभी शिक्षकों से विद्यालयों में एक अनुशासित वातावरण बनाए जाने की अपेक्षा करती है। इस अनुशासित वातावरण के माध्यम से देश के भविष्य को अपनी पूरी क्षमता, मेहनत और प्यार से उन बच्चों को पढ़ा कर गढ़ने की आवश्यकता है। देश का भविष्य अच्छा होगा, तो हर नागरिक का भविष्य अपने आप अच्छा हो जाएगा। हमारी शिक्षा व्यवस्था इसका माध्यम बनेगी। कार्यक्रम को श्रम एवं सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर, बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री संदीप सिंह तथा माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती गुलाब देवी ने भी सम्बोधित किया।



