चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के तीखे सवालों ने सियासी हलकों में हलचल बढ़ा दी है। चुनाव आयुक्तों की ओर से मुख्य निर्वाचन आयुक्त के कुछ फैसलों पर कथित तौर पर दर्ज की गई 14 आपत्तियों की रिपोर्ट का हवाला देते हुए अखिलेश यादव ने आयोग की निष्पक्षता, पारदर्शिता और आंतरिक निर्णय प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव जैसी लोकतांत्रिक प्रक्रिया में किसी भी तरह की अनियमितता लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि आयोग निष्पक्ष तरीके से काम नहीं कर रहा है। बुधवार को लखनऊ स्थित सपा प्रदेश मुख्यालय में प्रेस कांफ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को लोकतंत्र को मजबूत करने वाली स्वतंत्र संवैधानिक संस्था के रूप में काम करना चाहिए, लेकिन उसकी कार्यप्रणाली को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
अखिलेश यादव की यह टिप्पणी उस रिपोर्ट के बाद आई है, जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में कम से कम 14 बार आयोग के फैसलों और प्रक्रियाओं पर लिखित आपत्तियां दर्ज कीं। रिपोर्ट में मतदाता सूची और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े मुद्दों पर दोनों आयुक्तों की आपत्तियों का उल्लेख किया गया है।
14 आपत्तियों को लेकर बढ़ा विवाद
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने, Form-6 से जुड़े बदलावों और चुनावी डेटा के केंद्रीकरण जैसे मुद्दों पर सवाल उठाए थे। रिपोर्ट में कुछ मामलों में प्रक्रियात्मक और अधिकार संबंधी आपत्तियों का भी उल्लेख है। हालांकि, चुनाव आयोग ने इन रिपोर्टों के बाद अपना पक्ष स्पष्ट किया है। आयोग का कहना है कि लिखित नोट, टिप्पणियां और तकनीकी सुझाव बहुसदस्यीय संवैधानिक संस्था की सामान्य आंतरिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं। आयोग ने यह भी कहा कि SIR समेत उसके अंतिम फैसले तीनों आयुक्तों की सहमति से लिए गए।
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2022 के चुनाव और उपचुनावों का भी उठाया मुद्दा
अखिलेश यादव ने 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि सपा समर्थक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए। उन्होंने दावा किया कि पार्टी की ओर से चुनाव आयोग को शिकायतें और शपथपत्र दिए गए, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने बाद के उपचुनावों में भी कथित गड़बड़ियों के आरोप दोहराए। ये अखिलेश यादव/सपा के राजनीतिक आरोप हैं।
SIR को लेकर भी चुनावी बहस तेज
अखिलेश यादव ने बिहार और अन्य राज्यों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर भी सवाल उठाए और दावा किया कि उत्तर प्रदेश में भी मतदाता सूची से जुड़े मामलों में अनियमितताएं हुईं। वहीं चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची की प्रक्रिया में आंतरिक सुझाव और मतभेद निर्णय-प्रक्रिया का हिस्सा हो सकते हैं और अंतिम निर्णय आयोग द्वारा सामूहिक रूप से लिए जाते हैं।
2027 चुनाव से पहले सियासी टकराव
अखिलेश यादव ने आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर अधिकारियों की तैनाती और ट्रांसफर-पोस्टिंग पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव की तैयारी के नाम पर प्रशासनिक स्तर पर ऐसी व्यवस्था की जा रही है, जिससे निष्पक्ष चुनाव को लेकर आशंकाएं पैदा होती हैं। इस पूरे विवाद के बीच एक ओर विपक्ष चुनाव आयोग की निष्पक्षता और आंतरिक निर्णय प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है, वहीं आयोग अपने फैसलों को संस्थागत और सामूहिक प्रक्रिया का परिणाम बता रहा है। ऐसे में मतदाता सूची, SIR और चुनावी संस्थाओं की पारदर्शिता आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की राजनीति के महत्वपूर्ण मुद्दे बने रह सकते हैं।



