चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर प्रमोद तिवारी ने उठाए सवाल

नई दिल्ली। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और उपनेता प्रमोद तिवारी ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। तिवारी ने दावा किया कि पिछले 10 महीनों में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आयोग के कुछ फैसलों पर 14 बार आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने इन आपत्तियों और आयोग की निर्णय प्रक्रिया से जुड़े पत्राचार को सार्वजनिक करने की मांग की है।

तिवारी का आरोप है कि मतदाता सूची में नए नाम जोड़ने, नाम हटाने और बहाल करने, चुनावी डेटा की सुरक्षा तथा SIR से जुड़े कुछ फैसलों में दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों को नजरअंदाज किया गया। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों आयुक्तों ने कुछ प्रक्रियाओं को लेकर औपचारिक आपत्तियां दर्ज की थीं।

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि इन निर्णयों से भाजपा को राजनीतिक लाभ पहुंचा और हरियाणा, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल तथा असम में चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हुए हैं। हालांकि, ये आरोप राजनीतिक दावे हैं और इनसे अपने आप चुनाव परिणामों में किसी तरह की ‘वोट चोरी’ साबित नहीं होती। चुनाव आयोग की ओर से कहा गया है कि SIR समेत उसके फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से और एकमत से लिए गए हैं तथा उठाई गई आपत्तियों पर विचार किया गया।

संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग

प्रमोद तिवारी ने संसद का विशेष सत्र बुलाकर मुख्य चुनाव आयुक्त से जवाबदेही तय करने की मांग की है। उन्होंने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जांच और कानूनी कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि चुनाव आयोग के भीतर हुई पूरी पत्राचार प्रक्रिया देश के सामने लाई जानी चाहिए। तिवारी ने लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया को जरूरी बताते हुए केंद्र सरकार से इस मामले में जवाब देने की मांग की है।

10 महीने में 14 आपत्तियों से बढ़ा विवाद

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की आपत्तियां मतदाता पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम हटाने और दोबारा जोड़ने तथा चुनावी डेटाबेस से जुड़े मामलों पर थीं। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि Form-6 में बदलाव को लेकर विवेक जोशी ने सवाल उठाए थे, जबकि बाद में संधू ने भी उस पर आपत्ति जताई।

इस पूरे विवाद के बीच चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त तथा सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी को चुनाव आयुक्त के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। निष्पक्ष चुनाव, पारदर्शी मतदाता सूची और आयोग की निर्णय प्रक्रिया को लेकर उठे सवाल अब राजनीतिक बहस के साथ-साथ संस्थागत जवाबदेही के मुद्दे में बदलते दिखाई दे रहे हैं।

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