मृत्युभोज सामाजिक कुरीति व कलंक है। आर.के.वर्मा के पिता की श्रद्धांजलि सभा में ब्रह्मभोज बहिष्कार का संकल्प।
लखनऊ/गोशाईंगंज। इंसान स्वार्थ व खाने के लालच में कितना गिरता है उसका नमूना होती है सामाजिक कुरीतियां। ऐसी ही एक पीड़ा देने वाली कुरीति वर्षों पहले कुछ स्वार्थी लोगों ने भोले-भाले इंसानों में फैलाई गई थी वो है मृत्युभोज। मानव विकास के रास्ते में यह गंदगी कैसे पनप गई यह समझ से परे है। जानवर भी अपने किसी साथी के मरने पर मिलकर दु:ख प्रकट करते हैं। लेकिन इंसानी बेईमान दिमाग की करतूतें देखो कि यहां किसी व्यक्ति के मरने पर उसके साथी, सगे-संबंधी भोज करते हैं। मिठाइयां खाते हैं। यह एक सामाजिक बुराई है। इसको खत्म करने के लिए हम सभी को जागरूक होकर काम करना पड़ेगा। यह बात शनिवार को गोशाईंगंज विधानसभा क्षेत्रांतर्गत ग्राम हरदी में सपा बूथ प्रभारी रामकृष्ण वर्मा के पिता यशकायी रामयज्ञ वर्मा की श्रद्धांजलि सभा को बतौर मुख्य अतिथि सम्बोधित करते हुए गोशाईंगंज विधानसभा क्षेत्र के प्रभारी/प्रत्याशी चौ.लौटनराम निषाद ने सम्बोधित करते हुए मृत्युभोज/ब्रह्मभोज या तेरहवीं भोज को सामाजिक कुरीति,बङी विकृति बताते हुए पूरी तरह इसके बहिष्कार का आह्वान किया।उन्होंने कहा कि ब्रह्मभोज शास्त्र सम्मत नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि किसी घर में खुशी का मौका हो, तो समझ आता है कि मिठाई व पूङी पकवान बनाकर, खिलाकर खुशी का इजहार करें, खुशी जाहिर करें। लेकिन किसी व्यक्ति के मरने पर मिठाइयां परोसी जाएं, खाई जाएं, इस शर्मनाक परम्परा को मानवता की किस श्रेणी में रखें। इंसान की गिरावट को मापने का पैमाना कहां खोजे, इस भोज के भी अलग-अलग तरीके हैं। कहीं पर यह एक ही दिन में किया जाता है। कहीं तीसरे दिन से शुरू होकर बारहवें-तेरहवें दिन तक चलता है। कई लोग श्मशान घाट से ही सीधे मृत्युभोज का सामान लाने निकल पड़ते हैं। मैंने तो ऐसे लोगों को सलाह भी दी कि क्यों न वे श्मशान घाट पर ही टेंट लगाकर जीम लें ताकि अन्य जानवर आपको गिद्ध से अलग समझने की भूल न कर बैठें।
उन्होंने अपील करते हुए कहा कि यह किसी भी तरह से उचित नहीं है।अपने माता-पिता, सगे-सम्बंधी का मृत्युभोज न कर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन करे,उनकी स्मृति के लिए छायादार व फलदार वृक्ष लगायें,व्यर्थ की फिजूलखर्ची से बचें।उन्होंने रामकृष्ण वर्मा के इस साहसिक कार्य की सराहना करते हुए साधुवाद दिया। अर्जक संघ के प्रेरक धनीराम वर्मा गुरूजी ने ब्रह्मभोज की फीजूलखर्जी रोककर बच्चों की शिक्षा पर खर्च करने की अपील किया। अपना दल(कमेरावादी) के अम्बेडकर नगर जिलाध्यक्ष जयप्रकाश पटेल ने ग्रामीणों से कहा कि मृत्युभोज और नशे पर धन राशि खर्च न करते हुए परिवारव समाज की उन्नति का काम करें। उस राशि को अपने बच्चों की शिक्षा पर खर्च करें।
जिससे वे पढ़ लिखकर देश और समाज के लिए अच्छा काम कर सकेंगे। शिक्षित व्यक्ति सही मायने में संसार में सबसे अधिक धनी व्यक्ति होता है । रुपया पैसा गाड़ी बंगला जेवरात, ये सभी वस्तुएं एक समय के बाद समाप्त हो जाती हैं। लेकिन शिक्षा एक मात्र ऐसा धन है जो कि जितना खर्च करो बढ़ता ही जाता है। विद्यावान व्यक्ति की हर स्थान पर प्रशंसा होती है व समाज में उच्च स्थान प्राप्त होता है । यह एक ऐसा धन है जिसे ना तो कोई चोर चुरा सकता है, ना ही कोई बांट सकता है, ना ही किसी प्राकृतिक आपदा से यह नष्ट होता है। समय और अनुभव के साथ यह बढ़ता ही जाता है।
मुलायम सिंह यादव यूथ बिग्रेड के राष्ट्रीय सचिव विजय बहादुर वर्मा ने कहा कि दहेज प्रथा सामाजिक अभिशाप है।कहा कि हमारे देश में दहेज प्रथा एक ऐसा सामाजिक अभिशाप है जो महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों, चाहे वे मानसिक हों या फिर शारीरिक, को बढ़ावा देता है। इस व्यवस्था ने समाज के सभी वर्गों को अपनी चपेट में ले लिया है। अमीर और संपन्न परिवार जिस प्रथा का अनुसरण अपनी सामाजिक और पारिवारिक प्रतिष्ठा दिखाने के लिए करते हैं। वहीं निर्धन अभिभावकों के लिए बेटी के विवाह में दहेज देना उनके लिए दुष्कर हो जाता है।श्रद्धांजलि सभा का संचालन समाजवादी पिछड़ावर्ग प्रकोष्ठ के प्रदेश सचिव जगन्नाथ पाल ने किया और अरबिंद वर्मा,भगवानबक्श सिंह (विधायक अभय सिंह के पिता),शिवकुमार पाल आदि सहित सैकङों लोग श्रद्धांजलि सभा में शामिल हो श्रद्धासुमन अर्पित किए।



