मुख्यमंत्री ने जनपद सहारनपुर से राज्यव्यापी ‘स्कूल चलोअभियान-2026’ (द्वितीय चरण) का शुभारम्भ किया।- बच्चों को नवीन शैक्षणिक सत्र की पाठ्य-पुस्तकें, स्कूल बैग,स्टेशनरी आदि प्रदान किए तथा मिड-डे-मील परोसा।
- शिक्षा व्यक्ति, समाज या राष्ट्र की सुदृढ़ आधारशिला, प्रत्येक बच्चेको स्कूल पहुँचाना हमारा सामाजिक दायित्व और राष्ट्रीय कर्तव्य, प्रत्येकजनपदवासी ‘स्कूल चलो अभियान’ को एक जन-आन्दोलन बनाए।
- प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में प्रदेश में ‘स्कूल चलो अभियान’ प्रारम्भ, इसके बेहतरपरिणाम प्राप्त हुए, क्योंकि सरकार की नीयत साफ एवं शिक्षा के उन्नयन की स्पष्ट नीति।
- प्रदेश सरकार ने परिषदीय विद्यालयों को बुनियादी अवस्थापनासुविधाओं से संतृप्त करने हेतु ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ चलाया।
- बेसिक शिक्षा परिषद में 96 प्रतिशत से अधिक विद्यालयों कोसंतृप्तिकरण के लक्ष्य तक पहुँचाने का कार्य किया गया।
- विगत 09 वर्षों में 60 लाख से अधिक बच्चे परिषदीय विद्यालयों में बढ़े, सभी सुविधाओंके कारण ड्रॉप आउट रेट 19-20 प्रतिशत से घटकर 03-04 प्रतिशत पर आ गया।
- हमें ऐसी पीढ़ी तैयार करनी, जो राष्ट्र के कर्तव्यशीलनागरिक के रूप में अपने दायित्वों का निर्वहन कर सके।
- प्रदेश सरकार विद्यालयों में बच्चों को सुविधाएँ उपलब्ध करा रही, विद्यालयों मेंस्मार्ट क्लासेस, डिजिटल लाइब्रेरी, आई0सी0टी0 लैब आदि बनायी जा रही।
- डेढ़ लाख से अधिक दिव्यांग बच्चों को सहायक उपकरण, गत वर्ष 13,000 से अधिक गम्भीर और बहु दिव्यांग बच्चों को 06 हजार रु0 प्रतिवर्ष एस्कॉर्ट एलाउन्स तथा 23,000 से अधिक दिव्यांग बालिकाओं को 2,000 रु0 प्रति वर्ष स्टाइपेण्ड उपलब्ध कराए गए।
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति में लर्निंग बाई डूइंग के माध्यमसे बच्चों की स्किल को स्किलिंग में बदला जा रहा।
- प्रदेश सरकार ने शिक्षामित्रों के मानदेय को 10,000 रु0 से बढ़ाकर 18,000 रु0 तथा अनुदेशकों के मानदेय को 9,000 रु0 से बढ़ाकर 17,000 रु0 प्रतिमाह किया।
- प्रत्येक शिक्षामित्र, शिक्षक, प्रधानाचार्य, अनुदेशक और रसोइया के लिए05 लाख रु0 वार्षिक कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा को शीघ्र लागू करने जा रहे।
मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग अपनी अहम भूमिका निभाते हुए निरन्तर आगे बढ़ रहा : बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)
सहारनपुर। शिक्षा व्यक्ति, समाज या राष्ट्र की सुदृढ़ आधारशिला है। वर्ष 2017 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व व मार्गदर्शन में प्रदेश में ‘स्कूल चलो अभियान’ प्रारम्भ किया गया। इस अभियान के बेहतर परिणाम प्राप्त हुए है, क्योंकि सरकार की नीयत साफ है, शिक्षा के उन्नयन की स्पष्ट नीति है और प्रत्येक बच्चे तक बिना भेदभाव योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने का संकल्प है। मुख्यमंत्री आज जनपद सहारनपुर के उच्च प्राथमिक विद्यालय इस्माईलपुर (कम्पोजिट) से राज्यव्यापी ‘स्कूल चलो अभियान-2026’ (द्वितीय चरण) का शुभारम्भ करने के उपरान्त आयोजित कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने बच्चों को नवीन शैक्षणिक सत्र की पाठ्य-पुस्तकें, स्कूल बैग, स्टेशनरी आदि प्रदान किये। मुख्यमंत्री जी ने जनपद के सर्वश्रेष्ठ विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को सम्मानित किया। उन्होंने स्कूली बच्चों को मिड-डे-मील परोसा तथा बच्चों का अन्नप्राशन किया। इसके पूर्व, मुख्यमंत्री जी ने कार्यक्रम स्थल पर आयोजित प्रदर्शनी का अवलोकन किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जनपद सहारनपुर पर माँ शाकुम्भरी की असीम कृपा है। उन्हें माँ शाकुम्भरी की पावन धरा पर ‘स्कूल चलो अभियान’ के द्वितीय चरण का शुभारम्भ करने का अवसर प्राप्त हो रहा है। यह केवल संयोग नहीं, बल्कि ईश्वरीय कृपा है। कल रात से ही यहाँ अन्नदाता किसानों के अन्न भण्डार भरने और भीषण गर्मी से राहत दिलाने के लिए माँ शाकुम्भरी की विशेष कृपा बरस रही है। वर्ष 2017 में बेसिक शिक्षा परिषद में मात्र 36 प्रतिशत विद्यालय ही पूर्णतः बुनियादी अवस्थापना सुविधाओं से संतृप्त माने जा रहे थे। विद्यालयों में शौचालय की सुविधा, फर्नीचर, लाइब्रेरी, विद्युत तथा पेयजल की व्यवस्था नहीं थी। विद्यालयों में मिड-डे-मील के लिए भी अलग व्यवस्था नहीं थी। प्रदेश सरकार ने परिषदीय विद्यालयों को बुनियादी अवस्थापना सुविधाओं से संतृप्त करने हेतु ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ चलाया। ऑपरेशन कायाकल्प के अन्तर्गत समस्त जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों तथा उद्यमियों से अपील की गई कि बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में व्यापक रूप से सुविधाएं उपलब्ध कराकर संतृप्तिकरण के लक्ष्य को प्राप्त किया जाए। इसके अन्तर्गत पैरामीटर्स तय किये गये। प्रत्येक स्कूल में बालक-बालिकाओं के लिए अलग-अलग शौचालय का निर्माण किया जाए। पेयजल की व्यवस्था और मिड-डे-मील के आइटम्स निर्धारित किये जाएं। प्रत्येक बच्चे को डिजिटल लाइब्रेरी तथा स्मार्ट क्लास सुविधा मिल सके। सरकार की ओर से प्रत्येक बच्चे को यूनिफॉर्म, स्कूल बैग, पुस्तकें तथा अन्य सभी सुविधाओं से आच्छादित किया जा सके। साथ ही, छात्र और शिक्षक के रेशियों को ठीक किया जा सके।
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प्रदेश सरकार ने अगले 05 वर्ष में बेसिक शिक्षा परिषद में 96 प्रतिशत से अधिक विद्यालयों को संतृप्तिकरण के लक्ष्य तक पहुँचाने का कार्य किया। जब प्रत्येक बच्चे को बैग, बुक्स, शर्ट, जूता-मोजा, स्वेटर, यूनिफॉर्म आदि मिलने प्रारम्भ हुए, तो परिणामस्वरूप विद्यालयों में बच्चों का नामांकन बढ़ा। विगत 09 वर्षों में 60 लाख से अधिक बच्चे बेसिक शिक्षा परिषद में बढ़े हैं। इन सभी सुविधाओं के कारण ड्रॉप आउट रेट 19-20 प्रतिशत से घटकर आज 03-04 प्रतिशत पर आ गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अच्छी शिक्षा हमें सुसभ्य व संस्कारिक नागरिक बनाएगी तथा सही मार्ग दिखाएगी। अच्छी शिक्षा से ही अच्छे समाजसेवी, शिक्षक, प्रधानाचार्य, जनप्रतिनिधि, अधिकारी, उद्यमी, इंजीनियर, चिकित्सक और न्यायिक अधिकारी बनेंगे। शिक्षा हमारी पीढ़ी को आत्मविश्वास के साथ देश के भविष्य, समाज और राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने योग्य बनाएगी। एक स्वस्थ समाज के लिए यह आवश्यक है कि कोई भी बच्चा स्कूल में जाने से वंचित न रहे। यदि कोई बच्चा शिक्षा से वंचित है, तो यह केवल परिवार की क्षति नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की क्षति है। यही बच्चे आगे बढ़ेंगे। इन्हीं बच्चों को समाज के अलग-अलग क्षेत्रों में नेतृत्व प्रदान करना है।

आज मंच पर जितने भी नेता, मंत्री, सांसद, पूर्व सांसद, अधिकारी, शिक्षक तथा पुलिस-प्रशासन के अधिकारी हैं, वह पहले कभी छात्र थे। इन्होंने पढ़ाई की, फिर इस स्तर पर पहुँचे। यही बच्चे जब पढ़ेंगे, तो अलग-अलग क्षेत्रों में प्रतिनिधित्व करेंगे। कोई उद्यमी, कारीगर, चिकित्सक, इंजीनियर, राजनेता या समाजसेवी बनेगा। हमें ऐसी पीढ़ी तैयार करनी है, जो राष्ट्र के कर्तव्यशील नागरिक के रूप में अपने दायित्वों का निर्वहन कर सके। हमें ऐसी पौध तैयार करनी है, जो समाज को सही दिशा में ले जाए। हमारा सामूहिक राष्ट्रीय दायित्व है कि हम अपने देश, समाज और परिवार की खुशहाली के लिए इस दिशा में प्रयास प्रारम्भ करें।
हमारा देश व समाज खुशहाल हो, विकसित भारत की संकल्पना साकार हो, इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति, राजनेता, सांसद, विधायक, पार्षद, प्रधान, ब्लॉक प्रमुख, प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षक, अधिवक्ता, व्यापारी तथा चिकित्सक की जिम्मेदारी बनती है कि वह अपने आसपास अवलोकन करें, कोई बच्चा स्कूल जाने से वंचित न रहने पाए। हमें प्रत्येक बच्चे को स्कूल पहुँचाना है। यह हमारा सामाजिक दायित्व और राष्ट्रीय कर्तव्य है। राष्ट्रीय कर्तव्य का जब सामूहिकता के साथ निर्वहन होता है, तो राष्ट्र प्रगति के पथ पर अग्रसर होता है।

प्रत्येक जनपदवासी से अपील की कि वह ‘स्कूल चलो अभियान’ को एक जन-आन्दोलन बनाएं। इस अभियान का हिस्सा बने। प्रत्येक बच्चे को स्कूल पहुँचाने में अपना योगदान दें। बेसिक शिक्षा परिषद के प्रधानाचार्यों और शिक्षकों का दायित्व है कि जिन बच्चों का एडमिशन हुआ है, उन्हें समय पर यूनिफॉर्म, बैग, बुक्स, जूता-मोजा की धनराशि सहित अन्य आवश्यक सुविधाएँ प्राप्त हो जाएं। बच्चों के सामने बेहतरीन पठन-पाठन का माहौल हो। आज प्रदेश सरकार विद्यालयों में बच्चों को सभी सुविधाएँ उपलब्ध करा रही है। सरकार द्वारा विद्यालयों में स्मार्ट क्लासेस, डिजिटल लाइब्रेरी, आई0सी0टी0 लैब आदि बनायी जा रही हैं। शिक्षकों को टैबलेट वितरित किया जा रहा है। साथ ही, बेसिक शिक्षा परिषद में डेढ़ लाख से अधिक दिव्यांग बच्चों को सहायक उपकरण वितरित किए गए गत वर्ष 13,000 से अधिक गम्भीर और बहु दिव्यांग बच्चों को 06 हजार रुपये प्रति वर्ष एस्कॉर्ट एलाउन्स उपलब्ध कराया गया। 23,000 से अधिक दिव्यांग बालिकाओं को 2,000 रुपये प्रति वर्ष स्टाइपेण्ड उपलब्ध कराया गया।
राज्य सरकार ने लर्निंग बाई डूइंग कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों को प्रारम्भिक स्तर पर कौशल आधारित शिक्षा देना प्रारम्भ किया है। प्रधानमंत्री जी ने वर्ष 2020 में राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू करायी है। 36 वर्ष बाद भारत ने अपनी राष्ट्रीय शिक्षा नीति घोषित की है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में लर्निंग बाई डूइंग के माध्यम से बच्चों की स्किल को स्किलिंग में बदला जा रहा है। इस अभियान का हिस्सा बनकर बच्चे आत्मविश्वास से बोल रहे हैं। हमें बच्चों को उसी मजबूती के साथ आगे बढ़ाना है।
प्रदेश सरकार ने शिक्षामित्रों के मानदेय को 10,000 रुपये से बढ़ा कर 18,000 रुपये तथा अनुदेशकों के मानदेय को 9,000 रुपये से बढ़ा कर 17,000 रुपये प्रतिमाह किया है। हम प्रत्येक शिक्षामित्र, शिक्षक, प्रधानाचार्य, अनुदेशक और रसोइया के लिए 05 लाख रुपये वार्षिक कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा को शीघ्र लागू करने जा रहे हैं। आप सभी मिलकर मेहनत कीजिए तथा ग्राम पंचायत के वॉर्ड में बैठक कीजिए। किस स्कूल में कितने बच्चे अधिक आ सकते हैं, एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा प्रारम्भ होनी चाहिए। हमें बच्चों को स्कूल में बेहतरीन माहौल देना होगा। बच्चों के साथ अच्छा व्यवहार करना होगा। बच्चों को प्यार से कविताओं, गानों, लोकोक्तियां, मुहावरों के माध्यम से सिखाने की नई पद्धति को जन्म देना होगा। इससे बच्चों को आसानी से जीवन भर वह शिक्षा याद रहेगी। उन्होंने अभिभावकों से कहा कि अपने बच्चों को स्कूल जरूर भेजें।
बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि माँ शाकुम्भरी की पावन कृपा एवं माँ सरस्वती के आशीर्वाद से शिक्षा का महायज्ञ निरन्तर प्रकाशमान हो रहा है। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में देश को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग अपनी अहम भूमिका निभाते हुए निरन्तर आगे बढ़ रहा है। उत्तर प्रदेश में प्रत्येक विद्यालय को मूलभूत सुविधाओं के साथ जोड़ने का काम किया गया है। शिक्षकों को उनके द्वारा दी जा रही सेवाओं के बदले उन्हें सम्मानित किया जा रहा है। प्रत्येक विद्यार्थी को गुणवत्तापरक शिक्षा देने में बेसिक शिक्षा विभाग सफलतापूर्वक आगे बढ़ रहा है। स्कूल चलो अभियान प्रतिवर्ष दो बार चलाया जाता है। आज का कार्यक्रम केवल स्कूल चलो अभियान का शुभारम्भ नहीं, बल्कि हमारे देश के उज्ज्वल भविष्य को सँवारने तथा उन्हें उच्च धारा से जोड़ने का अभियान है। इस अवसर पर लोक निर्माण राज्यमंत्री बृजेश सिंह, संसदीय कार्य और औद्योगिक विकास राज्यमंत्री जसवन्त सिंह सैनी, विधायक मुकेश चौधरी, देवेन्द्र कुमार निम, शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी तथा अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।



