जीवन को अपना मानो….

सुजीत यादव

जीवन को अपना मानो
झूठ बिकता बाजार में
सच रहता पर्दे में जानो
कुछ करना है जीवन मे
तो आगे ही बढ़ना होगा
बिना सहारे बिना पुकारे
मंजिल शिखर पर चढ़ना सुरजीत।

सपनों की शहर बसाने
कांटो में सँवरना होगा
गुंजन तितली बागे बहार
फूल बन बिखरना होगा
मिले दर्द गर खुशियां बेच
सौदा खरा करना होगा
पत्थरों से खाके चोट
झरने की तरह बहना होगा सुरजीत।

चांद सितारे की चमक से
कहीं न तुझे ठहरना होगा
कड़ी धूप में पांव जले तो
जगत आग में तपना होगा सुरजीत।।

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