उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय जी-पूर्व मंत्री ने प्रधानमंत्री को लिखा पत्र। प्रदेश के ऊर्जा मंत्री द्वारा अपने ही विभाग एवं पावर कॉर्पोरेशन पर लगाए गए गंभीर आरोपों, ध्वस्त विद्युत व्यवस्था तथा सरकार व शासन स्तर पर जवाबदेही निर्धारित किए जाने के संबंध में लिखा पत्र।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय पूर्व मंत्री ने योगी सरकार के अत्यंत चिंताजनक पहलुओं की ओर ध्यान आकृष्ट कराते हुए विद्युत विभाग में प्रशासनिक मतभेद, संस्थागत टकराव, नियामक संस्थाओं को निष्प्रभावी किए जाने तथा कमरतोड़ महंगाई झेल रही उत्तर प्रदेश की जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालकर पहले से ही भयंकर बेरोजगारी और महंगाई का दंश झेल रही जनता पर दोहरा कुठाराघात किये जाने के सम्बन्ध में प्रधानमंत्री जी को पत्र लिखकर उत्तर प्रदेश की जनता के हितों के संरक्षण हेतु तत्काल हस्तक्षेप किये जाने की मांग है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने पत्र में उल्लिखित किया है कि लगातार समाचार पत्रों की बन रही सुर्खियों से स्पष्ट है कि समस्या केवल बिजली आपूर्ति अथवा तकनीकी व्यवधानों तक सीमित नहीं है, बल्कि शासनतंत्र के विभिन्न अंगों के मध्य समन्वय के अभाव, उत्तरदायित्व की अस्पष्टता तथा जनहित से जुड़े निर्णयों के क्रियान्वयन में गंभीर कमियां विद्यमान हैं। स्वयं प्रदेश के ऊर्जा मंत्री द्वारा पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन पर लगाए गए गंभीर आरोप शासन-प्रशासन की पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।
उत्तर प्रदेश में जहां विद्युत व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है वहीं प्रदेश के ऊर्जा मंत्री बनाम पावर कॉर्पोरेशन के रूप में सरकार के भीतर एक असाधारण टकराव का खामियाजा प्रदेश की जनता झेलने के लिए विवश है। सरकार का नियंत्रण शासन-प्रशासन से पूरी तरह खत्म हो चुका है।
ऊर्जा मंत्री ने भर्ती, छंटनी, प्रशासनिक निर्णयों तथा फ्यूल सरचार्ज जैसे विषयों पर सार्वजनिक रूप से आपत्ति व्यक्त की है। यदि विभाग का मुखिया स्वयं यह कहने की स्थिति में पहुँच गया है कि उसकी जानकारी के बिना निर्णय लिए जा रहे हैं, तो यह सामान्य प्रशासनिक मतभेद नहीं बल्कि शासन व्यवस्था की गंभीर विफलता है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने पत्र में लिखा है कि इस पूरे प्रकरण में सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न प्रदेश के मुख्यमंत्री की भूमिका से जुड़ा है। यदि ऊर्जा मंत्री की शिकायतें सही हैं, तो मुख्यमंत्री द्वारा उन शिकायत पर क्या कार्रवाई की गई? यदि ऊर्जा मंत्री को मुख्यमंत्री जी का विश्वास प्राप्त है और ऊर्जा मंत्री के आरोप सही हैं, तो मुख्यमंत्री जी द्वारा अब तक क्या कार्रवाई की गई? और यदि वे निराधार हैं तो उन्हें पद पर बनाये रखने का क्या औचित्य है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने अंत में पत्र में लिखा है कि उतर प्रदेश की विद्युत व्यवस्था, 10 प्रतिशत फ्यूल सरचार्ज की वसूली, ऊर्जा मंत्री द्वारा लगाए गए आरोपों, पावर कारपोरेशन की कार्यप्रणाली, उ0प्र0 विद्युत नियामक आयोग के निर्देशों की अवहेलना एवं आरक्षण व भर्ती-छंटनी सम्बन्धी नियमों के कथित उल्लंघनों की स्वतंत्र उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।

