टीबी पर सर्जिकल स्ट्राइक: सामने आए 1.43 लाख मरीज

राकेश यादव
राकेश यादव

देश को टीबी मुक्त बनाने की दिशा में चलाया जा रहा ‘टीबी मुक्त भारत अभियान’ बड़ी सफलता की ओर बढ़ रहा है। इस अभियान के तहत 1.43 लाख टीबी मरीजों की पहचान की गई है, जिनमें 41 हजार से अधिक ऐसे मरीज शामिल हैं जिनमें बीमारी के कोई स्पष्ट लक्षण नहीं थे। यह उपलब्धि समय रहते जांच और उपचार की महत्ता को दर्शाती है, जिससे टीबी के संक्रमण को फैलने से रोकने में मदद मिलेगी।‘टीबी मुक्त भारत अभियान’ में 1.43 लाख मरीज खोजे,41 हजार से अधिक लक्षणविहीन टीबी रोगी मिले।

लखनऊ। प्रदेश में चल रहे 100 दिवसीय ‘टीबी मुक्त भारत अभियान’ में अब तक तकरीबन 31 लाख लोगों की स्क्रीनिंग की गई है। जिनमें से 1.43 लाख टीबी के मरीज चिंहित हुए हैं। खास बात यह है कि इन 1.43 लाख चिंहित मरीजों में से 41 हजार से अधिक ऐसे लोगों के शरीर में टीबी के बैक्टीरिया मिले हैं जिनमें कोई लक्षण नहीं हैं। सभी मरीजों का इलाज शुरू कर दिया गया है।

अपर मुख्य सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अमित कुमार घोष ने बुधवार को 100 दिवसीय अभियान की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि जिन क्षेत्रों में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई है, उन्हें चिन्हित कर माइक्रोप्लान को और सुदृढ़ बनाया जाए तथा घर-घर संपर्क और जन-जागरूकता गतिविधियों को बढ़ाया जाए। उन्होंने सभी जाँच और स्क्रीनिंग से संबंधित डेटा को रियल-टाइम में ‘निक्षय पोर्टल’ पर अपलोड करने की भी हिदायत दी, ताकि पारदर्शिता और प्रभावी निगरानी सुनिश्चित की जा सके। अपर मुख्य सचिव ने शुक्रवार को होने जा रही समीक्षा बैठक में सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को आवश्यक रूप से रहने के भी निर्देश दिए।

समीक्षा बैठक में बताया गया कि 100 दिवसीय अभियान के पहले 77 दिनों में प्रदेश के उच्च जोखिम वाले गांवों, शहरी वार्डों, झुग्गी-बस्तियों और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में 17960 आयुष्मान आरोग्य शिविरों के माध्यम से सघन स्क्रीनिंग और जाँच अभियान चलाया जा रहा है। पहले 77 दिनों में 30 लाख 92 हजार 768 लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है, जिसमें से एक लाख 42 हजार 661 लोग टीबी के मरीज के तौर पर चिंहित हुए हैं। इनमें 41 हजार 57 लक्षणविहीन मरीज मिले हैं।

अभियान के अंतर्गत आयोजित ‘आयुष्मान आरोग्य शिविर’ केवल टीबी जाँच तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनमें हीमोग्लोबिन जाँच, रक्तचाप, मधुमेह स्क्रीनिंग सहित अन्य आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं भी एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे आमजन को समग्र स्वास्थ्य लाभ मिल रहा है। प्रदेश में अब तक 26,722 उच्च जोखिम वाले गांवों और क्षेत्रों की पहचान की जा चुकी है और 17, 960 आयुष्मान आरोग्य शिविरों का आयोजन किया गया है, जिनमें शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में व्यापक कवरेज सुनिश्चित किया गया है।


जनभागीदारी को इस अभियान की सबसे बड़ी ताकत बनाते हुए विभिन्न स्तरों पर व्यापक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। सार्वजनिक उपक्रमों और कॉरपोरेट संस्थाओं के सहयोग से सैकड़ों कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं, वहीं माई भारत स्वयंसेवकों और निजी क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी से हजारों लोगों तक जागरूकता का संदेश पहुंचाया गया है। विभाग से प्राप्त आकंड़ों के अनुसार प्रदेश में अब तक 22 लाख 15 हजार 686 एक्स-रे किए जा चुके हैं। इसके साथ ही मॉलिक्यूलर जाँच के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है, जहां 2578 नैट मशीनों के माध्यम से अब तक 6,05,275 जाँच की गई हैं।

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