किसान नेता आजादी से जुड़े गणतंत्र कार्यक्रम को क्यों बिगाडऩा चाहते हैं..?

अब रूट और दोहपर 12 बजे बाद के समय को लेकर ऐतराज।आखिर कुछ किसान नेता देश की आजादी से जुड़े गणतंत्र दिवस के कार्यक्रम को क्यों बिगाडऩा चाहते हैं..?

एस0पी0मित्तल

दिल्ली की सड़कों पर किसान ट्रेक्टर मार्च को लेकर 24 जनवरी को दिल्ली पुलिस और किसान यूनियनों के प्रतिनिधियों के बीच सहमति हो गई थी। योगेन्द्र यादव जैसे किसान प्रतिनिधियों ने संतोष भी व्यक्त कर दिया था। नेताओं का कहना रहा कि देश के इतिहास में यह पहला अवसर होगा, जब दिल्ली में गणतंत्र दिवस के दिन ही किसानों के ट्रेक्टर भी सड़कों पर मार्च करेंगे। लेकिन 25 जनवरी को कई किसान नेताओं ने दिल्ली पुलिस के साथ हुए समझौते को नकार दिया। ऐसे नेताओं का कहना है जो दोपहर 12 बजे बाद ट्रेक्टर मार्च निकालने का कोई मतलब नहीं है तथा मार्च का जो रूट तय किया गया है, उसका अधिकांश भाग हरियाणा में आता है।

कुछ किसान नेताओं के ऐसे बयानों से सवाल उठता है कि आखिर देश की आजादी से जुड़े पर्व के समारोह को क्यों बिगाड़ा जा रहा है? देश के हर नागरिक के लिए देश की आजादी का पर्व बहुत महत्वपूर्ण और गौरवपूर्ण होता है। देश की आजादी को बनाए रखने के लिए सीमा पर खड़े जवान अपना बलिदान देने के लिए तैयार रहता है, लेकिन देश के अंदर ही कुछ लोग आजादी से जुड़े गणतंत्र दिवस के कार्यक्रम को बिगाडऩे पर उतारू हों तो फिर कई सवाल खड़े होते हैं? सब जानते हैं कि गणतंत्र दिवस पर दिल्ली के राजपथ पर अनेक कार्यक्रम होते हैं। इसमे हमारी सेनाएं अपनी वीरता का प्रदर्शन भी करती हैं तथा राजपाथ पर विकास की झांकियां भी प्रदर्शित होती हैं।

राजपथ के कार्यक्रम को पूरा देश टीवी पर उत्साह के साथ देखता है। लेकिन अब कहा जा रहा है कि जिस वक्त राजपथ पर समारोह हो, तभी किसानों को भी दिल्ली की सड़कों पर ट्रेक्टर मार्च निकालने की अनुमति दी जाए। किसानों की भावनाओं का ख्याल करते हुए ही दिल्ली पुलिस ने ट्रेक्टर मार्च की अनुमति दे दी थीं। रूट और समय पर किसानों के प्रतिनिधियों ने अपनी सहमति दी थी, लेकिन अब बेवजह का विवाद खड़ा किया जा रहा है। सवाल उठता है कि जिन नेताओं ने दिल्ली पुलिस के अधिकारियों से बात की क्या वे किसानों के प्रतिनिधि नहीं है..?

यहां यह उल्लेखनीय है कि कृषि कानूनों को लेकर भी सरकार से 40 किसान यूनियनों के प्रतिनिधियों ने बात की है। इतने अधिक प्रतिनिधियों की वजह से ही कई बार वार्ताएं विफल हुई। पिछले दो माह से दिल्ली की सीमाओं पर बड़ी संख्या में किसानों ने डेरा जमा रखा है। इससे दिल्ली के नागरिकों को भारी परेशानी हो रही है। दिल्ली की सीमा से लगे गांवों के किसान भी फल सब्जियां दिल्ली मंडियों में नहीं बेच पा रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियाँ भी किसन आंदोलन को लेकर अनेक आशंकाएं जता चुकी है। पाकिस्तान में बैठे शरारती तत्व सोशल मीडिया के माध्यम से गलत संदेश प्रसारित कर रहे हैं। केन्द्र सरकार ने ऐसे 300 ट्वीटर हैंडल पर रोक लगाई है।

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