प्रतिभाओं के सम्मान और प्रोत्साहन को लेकर अखिलेश यादव का बड़ा ऐलान।
लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में सरकार बनने पर यश भारती सम्मान को फिर शुरू करने और इसकी सम्मान राशि बढ़ाने का ऐलान किया है। 27 सितंबर 2026 को लखनऊ में पत्रकारों से बातचीत के दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि यश भारती सम्मान की राशि ₹11 लाख से बढ़ाकर ₹21 लाख की जाएगी। इसके साथ ही मासिक सम्मान राशि को ₹50 हजार से बढ़ाकर ₹1 लाख करने की बात भी कही। अखिलेश यादव के इस ऐलान पर पूर्व सदस्य राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग अनिल यादव ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि प्रतिभाओं को सम्मान और प्रोत्साहन देना समाज तथा प्रदेश की प्रगति के लिए आवश्यक है।
अनिल यादव ने कहा, “अखिलेश यादव जी की सोच हमेशा प्रतिभा, मेहनत और उपलब्धियों का सम्मान करने की रही है। यश भारती केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की प्रतिभाओं को सम्मान देने की पहचान है।” उन्होंने कहा कि ₹21 लाख की सम्मान राशि का प्रस्ताव प्रदेश के कलाकारों, साहित्यकारों, खिलाड़ियों और अन्य प्रतिभाओं के लिए प्रोत्साहन का संदेश है। उनके मुताबिक प्रतिभाओं के संघर्ष और उपलब्धियों को पहचान मिलना जरूरी है।
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प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने पर जोर
अनिल यादव ने कहा कि प्रदेश की प्रतिभाएं विभिन्न क्षेत्रों में देश और दुनिया में अपनी पहचान बना रही हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी नीतियों की जरूरत है, जिनसे प्रतिभाशाली लोगों को आगे बढ़ने के अवसर मिलें और उनकी उपलब्धियों को उचित सम्मान दिया जा सके। उन्होंने आगे कहा, “तरक्की, विकास, सम्मान और अधिकार के लिए ऐसी नीतियां जरूरी हैं, जो प्रदेश की प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर दें।”
1994 में शुरू हुआ था यश भारती सम्मान
यश भारती सम्मान की शुरुआत 1994 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल में हुई थी। यह सम्मान कला, साहित्य, खेल, संस्कृति और अन्य क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली प्रतिभाओं को दिया जाता रहा है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, योगी सरकार ने 2020 में यश भारती की जगह राज्य संस्कृति पुरस्कार शुरू किया था।
अब 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अखिलेश यादव की ओर से यश भारती सम्मान को पुनः शुरू करने और सम्मान राशि बढ़ाने की घोषणा राजनीतिक एवं सांस्कृतिक दोनों दृष्टि से चर्चा में है। प्रस्तावित बदलावों का अंतिम स्वरूप समाजवादी पार्टी की सरकार बनने की स्थिति में उसकी नीतियों और आगामी घोषणापत्र से स्पष्ट होगा।



