सिंचाई और खनन विभाग की मिलीभगत से बिक गई करोड़ों की मिट्टी!

  • सिंचाई और खनन विभाग की मिलीभगत से बिक गई करोड़ों की मिट्टी!
  • नदी के एक हिस्से का पानी रोककर कराया चोरी से अवैध खनन।

राकेश यादव

लखनऊ। राजधानी लखनऊ में सिंचाई और खनन विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत से नदी के एक हिस्से का पानी रोककर करोड़ों रुपए की मिट्टी अवैध रूप से बेच डाली। मुख्यमंत्री योगी के भ्रष्ट व्यवस्था को रोकने के लिए की जा रही बैठकों को धता बताते हुए सिंचाई व खनन के अधिकारियों व कर्मचारियों का यह कारनामा उजागर हो गया। स्थानीय भाजपा नेता की शिकायत पर जिला प्रशासन मुखर होकर अधिकारियों के नेतृत्व में छापा मारकर इसका खुलासा किया। उधर सिंचाई विभाग के मंत्री और शासन में बैठे अधिकारी इस मामले पर चुप्पी साधे रखी है।

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मिली जानकारी के मुताबिक इंदिरा डैम के पास खनन माफियाओं ने गोमती नदी पर 1400 एमएम के 36 सीमेंट पाइप लगाकर एक अवैध पुल का निर्माण करा दिया था।गोमती नदी को पार करने के लिए सिंचाई विभाग के कुछ अभियंताओं की शह पर खनन माफिया इसी पुल का इस्तेमाल करते थे, ताकि उनका अवैध खनन का धंधा बेरोकटोक चल सके। मामला सामने आते ही जिला प्रशासन के बड़े अधिकारी मौके पर पहुँचे और गोमती नदी पर बने अवैध पुल को तत्काल हटाने का निर्देश दिया। इसके तुरंत बाद ही पुकलेंड से पुल को हटाने की प्रक्रिया शुरु हो गई। गोमती नदी से 36 सीमेंटेड पाइप हटते ही गोमती का पानी का प्रवाह भी बढ़ गया क्योंकि पाइप लगाने से पहले खनन माफियाओं ने नदी की सतह पर मिट्टी पर भी पाट रखी थी। सूत्रों का कहना है कि सिंचाई विभाग के एक अधिशासी अभियंता की छत्रछाया में यह कार्य चल रहा था।

प्रदेश में सत्तारूढ़ दल भाजपा के चिनहट मंडल अध्यक्ष अक्षय की शिकायत से खुलासा हुआ है। स्थानीय भाजपा नेता की शिकायत के अनुसार यहां एनजीटी के नियमों को दरकिनार कर लगभग 10 करोड़ से भी अधिक का अवैध खनन हुआ है। जिला प्रशासन के अधिकारी और कर्मचारी यह आँकलन कर रहे थे कि अभी तक मिट्टी 10 करोड़ रुपए तक बेची गई है। उधर इस पूरे प्रकरण पर सिंचाई विभाग के मंत्री और शासन में बैठे अधिकारियों ने चुप्पी साधे रखी है।

खनन माफियाओं ने गोमती नदी के तट पर अवैध खनन की सारी सीमाएं लांघ दी है। 50 डमफर और तीन पोकलैंड मशीनों की मदद से दिन-रात गोमती तट पर अवैध खनन का काम हो रहा था, खनन माफिया गोमती नदी के तट से मिट्टी खोदकर नदी का खोखला कर रहे थे। सिंचाई विभाग और खनन की मिलीभगत से हुआ करोड़ों का अवैध खनन हुआ जबकि सिंचाई विभाग की महत्वपूर्ण परियोजना इंदिरा डैम के आस-पास नो-कंस्ट्रक्शन जोन घोषित है। डैम सटे किसान पथ के ठीक नीचे गोमती नदी पर बगैर जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत के गोमती नदी पर अवैध पुल का निर्माण कराया जाना बिल्कुल सम्भव नहीं है। एक सेवानिवृत्त अभियन्ता का कहना है कि सिंचाई विभाग के तीन बड़े अधिकारियों का भी इस अवैध खनन में हिस्सा है। सिंचाई विभाग में जुड़े अधिकारी गोमती नदी से मिट्टी सप्लाई कुछ स्थानों पर चल रही प्लॉटिंग को भरने के लिए बेचते हैं। गोमती नदी के किनारे नो-कन्स्ट्रशन जोन में करोड़ों रुपये के खनन होने के बाद आज अज्ञात के विरुद्ध एफआईआर दर्ज हो गई। सूचना के अनुसार जिला प्रशासन को अवैध खनन के पुख्ता सबूत मिले हैं।

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