अनुच्छेद-330 की भाँति 340 के तहत ओबीसी को मिले राजनीतिक प्रतिनिधित्व का अधिकार

153

अनुच्छेद-330 की भाँति 340 के तहत ओबीसी को मिले राजनीतिक प्रतिनिधित्व का अधिकार। आरक्षित सीट से एक बार एमएलए,एमपी का चुनाव जीते व्यक्ति को आरक्षित से प्रतिबंधित किया जाए।

लौटनराम निषाद

लखनऊ। भारतीय संविधान में एससी, एसटी के आरक्षित सांसद, संसद भवन में 75 वर्षो से राजनीतिक लाभ ले रहे हैं,तब भी बराबर दलित खतरा मे रहता है। आरक्षित 131 सांसद उसके लिए कोई आवाज संसद भवन में नहीं उठाते हैं।भारतीय ओबीसी महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौ.लौटनराम निषाद ने बताया कि लोकसभा में अनुसूचित जाति के लिए 84 व अनुसूचित जनजाति के लिए 47 सीटें आरक्षित हैं।उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की आरक्षित सीटों से कोई एक बार विधानसभा व लोकसभा का चुनाव लड़कर एमपी,एमएलए बन जाता है,तो दुबारा उसे आरक्षित सीट से चुनाव लड़ने पर रोक लगाई जानी चाहिए।एससी, एसटी के लिए जो सीटें आरक्षित होती हैं,उस पर अक्सर घुमा फिराकर एक ही परिवार का कब्जा जमा रहता है।

उन्होंने ओबीसी आरक्षण को क्रीमीलेयर के प्रतिबंध से मुक्त किया जाए या एससी, एसटी आरक्षण को भी क्रीमीलेयर के दायरे में लाया जाए। ओबीसी को लोकसभा व विधानसभा में आरक्षण नहीं देना संविधान के मौलिक अधिकारों की हत्या है। इस वर्ष स्वतंत्रता का 75 वर्ष पुरा करने पर अमृत महोत्सव, माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मनाया है। 75 वर्षो से विष का घड़ा लेकर डिप्रेस्ड क्लास, देश के बंचित वर्ग घुट घुट कर विष पी रहा है। उन्होंने ओबीसी पीएम से संविधान का अनुच्छेद 340 लागू करने की माँग किया है।जब संविधान के अनुच्छेद-340 का अनुपालन नहीं तो 330 व 332 को इतने लंबे समय से जारी क्यों रखा गया है..?

डिप्रेस्ड क्लास ऑफ द सोशल जस्टिस के लिए अनुच्छेद-340 का पूर्णतः क्रियान्वयन आवश्यक है।निषाद ने बताया कि भारत के राष्ट्रपति को शक्ति निहित है कि अनुच्छेद 340 के अनुसार डिप्रेस्ड क्लास यानी कि मझोली जातियां जो वंचित जातियों के श्रेणी में है, जो समान्य वर्ग व ओबीसी और एसी- एसटी के बीच में पीस रही हैं। वैसे लोगों को भारतीय संविधान के अनुसार अनुच्छेद 340 लागू किया जाता है तो इन्हें भी प्रतिनिधित्व मिल सजता है,अन्यथा ये राजनीतिक बिचौलियों व राजनीतिक दलालों के शोषण की शिकार बनी हुई हैं। जिस तरह से एससी एसटी के लिए अनुच्छेद 330 को लागू किया गया है उसी तरह अनुच्छेद 340 को लागू किया जाए ताकि डिप्रेस्ड क्लास यानी कि संविधान से वंचित समाज को भी अपने आरक्षित सीट से जीत कर लोकसभा व विधानसभा में पहुंचने का अवसर मिले।

आज देश में एससी एसटी के सांसद, विधायकजीतकर संवैधानिक अधिकार प्राप्त किए हैं और वंचित वर्गों के समस्याओं को देश के संसद भवन व विधानसभा में कभी भी उजागर नहीं करते हैं।उन्होंने कहा कि जो राजा है, वह राजा बनते जा रहा है, जो गरीब है वह गरीब बनते जा रहा है। ऐसी स्थिति में अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति के लोग भी डिप्रेस्ड क्लास के अंतर्गत ही आते हैं।निषाद ने बताया कि 1977 में जनता पार्टी की सरकार बनी थी तो 1978 में मंडल कमीशन का गठन किया गया।बीपी मंडल ने 1980 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसे वी पी सिंह ने 1990 में लागू किया। अन्य पिछड़े वर्ग को आरक्षण देने में 37 वर्ष लगे और आर्थिक आधार पर आरक्षण देने में चुपचाप बिना किसी चर्चा के व बिना किसी आयोग की सिफारिश के संसद में 48 घण्टे में पारित कर राष्ट्रपति का हस्ताक्षर करा दिया गया।इतना पक्षपात पूर्ण सरकार देश के अंदर पहली बार बनी है,जिसने संविधान व उच्चतम न्यायालय के निर्णय को दरकिनार कर सामान्य वर्ग को 10 प्रतिशत कोटा दे दिया।