गोरखपुर में सत्ता के संरक्षण में जमीनों का गोरखधंधा-अखिलेश यादव

भाजपा सरकार में पूरे प्रदेश में जमीनों का गोरखधंध चल रहा है। जहां भी जमीन दिख जाती है भाजपा उसे हड़पने और कब्जा करने के लिए सक्रिय हो जाती है। भाजपा सरकार में गोरखपुर में विरासत गलियारा के नाम पर व्यापारियों के मकान और दुकान ढहा कर जमीन लूटी जा रही है। व्यापारियों का उत्पीड़न हो रहा है। गोरखपुर में व्यापारियो की समस्याओं की सुनने और उनकी आवाज उठाने गये नेता विरोधी दल विधानसभा माता प्रसाद पाण्डेय और नेता प्रतिपक्ष विधान परिषद लाल बिहारी यादव को भाजपा के विधायक, कार्यकर्ताओं ने रोका, उन पर हमला किया। रोकने के लिए रास्ते में बुलडोजर लगा दिया। भाजपा सरकार लोकतंत्र और संविधान विरोधी है। दोनों सदनों के विपक्ष के नेताओं को रोका जाना उन पर हमला होना निन्दनीय है। यह सब कभी हिटलर के जमाने में होता था। भाजपा सरकार में बुलडोजर अन्याय का प्रतीक बन गया है। अखिलेश यादव ने कहा कि गोरखपुर में दोनों नेता विरोधी दल के साथ हुई घटना की जितनी निदा की जाय कम है। इस घटना में नेता विरोधी दल गोरखपुर के अधिकारियों जिलाधिकारी और एसएसपी के खिलाफ लिखकर कार्रवाई की मांग करेंगे और दोनों सदनों में नोटिस देंगे। गोरखपुर में सत्ता के संरक्षण में जमीनों का गोरखधंधा

अखिलेश यादव ने कहा कि गोरखपुर में सत्ता के संरक्षण में जमीनों का गोरखधंधा चल रहा है। अगर गोरखपुर के लोगों ने मुंह खोल दिया, राज बता दिया तो वहां विरासत की जगह वहां हिरासत गलियारा बनवाना पड़ेगा। सरकार गोरखपुर में व्यापारियों की जमीनों का बाजार मूल्य दें। गोरखपुर में विरासत गलियारा में जमीन, मकान का मुआवजा सहमति से नहीं बाजार की कीमत के हिसाब से देना चाहिए। वहां मार्केट रेट बहुत ज्यादा है। शासन-प्रशासन पुलिस को आगे कर व्यापारियों और जो लोग रह रहे हैं उनसे जबरदस्ती सहमति करा रहे हैं। मुआवजा ज्यादा न देना पड़े इसके लिए सरकार डर दिखाकर, सहमति कराने के लिए दबाव बना रही है। जब अपनी जमीन का मामला था तब अधिकतम संभव मुआवजा वसूला गया और जमीन देने के नाम पर तथाकथित दयावान बनने के नाम पर वाहवाही लूटी गयी। सच्चाई यह है कि कारीडोर के नाम पर भाजपाई लूटतंत्र सक्रिय है जो तरह-तरह के बहाने करके लोगों की जमीन औने-पौने दाम पर खरीद लेते हैं और बाद में ऊंचे दाम पर बेंच देते हैं। स्थानीय जनता के साथ धोखा हो रहा है। यही वजह है कि भाजपा अयोध्या और प्रयागराज में हारी है। वाराणसी में हारते-हारते बची है। अगला नम्बर गोरखपुर और मथुरा का है।

भाजपा की सरकार बनते ही मुख्यमंत्री जी ने गोरखपुर और झांसी में मेट्रो चलाने की घोषणा किया था। केन्द्र सरकार के 11 साल और प्रदेश सरकार के 9 साल हो गये है। दोनों सरकार के कुल मिलाकर 20 साल हो गये लेकिन मुख्यमंत्री जी गोरखपुर में भी मेट्रो नहीं चला पाए। भाजपा सरकार में जमीनों का गोरखधंधा गोरखपुर, के अलावा अयोध्या, लखनऊ समेत प्रदेश के हर जिले में चल रहा है। भाजपा सरकार विकास के लिए कोई काम नहीं कर रही है। सिर्फ योजनाएं बनाकर अपने लोगों को ठेका दे रही है और किसानों, व्यापारियों की जमीनांे की लूट कर रही है। जब किसानों, व्यापारियों की जमीनें खरीदना होता हो तो यह सरकार, सस्ती कीमत पर जबरन छीन लेती है। जब जमीने भाजपा नेताओं के हाथ में आ जाती है तो सर्किल रेट बढ़ा देती है। अयोध्या में यही काम हुआ और अन्य जिलों में भी ऐसा ही हो रहा है। इस सरकार में जमीनों का गोरखधंधा लखनऊ में बैठकर खूब किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री जी के अपने सलाहकार को जमीनों के गोरखधंधा के कारण इस्तीफा देना पड़ा। पीछे-पीछे न जाने किससे-किससे हाथ मिलाए थे। जिनसे हाथ मिलाये थे वे देश छोड़कर जा चुके है। केवल वही नहीं सरकार में और भी छिपे लोग है जो आपने गांव के आस पास की जमीनों को हड़प रहे हैं। जमीनों की सौदेबाजी कर रहे हैं। गोरखपुर के लोग भी जानते है कि सबसे ज्यादा रजिस्ट्रियां किसके नाम पर है। कई सौ एकड़ जमीन दबाव बनाकर गरीबों से छीनी जा चुकी है। जो पूरे प्रदेश में भ्रष्टाचार की बात करते थे उन्हें अपने नाक के नीचे चल रहा गोरखधंधा नहीं दिखाई दे रहा है, क्योंकि उस गोरखधंधे में वे खुद और उनके खासम-खास लोग शामिल हैं। इन्हें जमीन के साथ-साथ सोने से भी बहुत प्यार है। जमीनों के मामले के साथ-साथ फर्जीवाड़े का भी गोरखधंधा सिसोदिया नर्सिंग एवं पैरा मेडिकल कॉलेज में भी हुआ जहां कई सौ बच्चों की फीस जमा हुई थी वे डिग्री के लिए घूम रहे है।

अखिलेश यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री जी ने अपने गृह जनपद जाने का रिकार्ड बनाया है। इतना कोई मुख्यमंत्री अपने गृह जनपद नहीं गया होगा। वहां जनता दरबार लगता है लेकिन उसके बावजूद वहां अन्याय, अत्याचार चरम पर है। 17 साल की यूट्यूबर के साथ रेप की घटना हो गयी, जिसने घटना की है वह भाजपा का करीबी है। समाजवादी सरकार में विकास योजनाओं आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे, लखनऊ मेट्रो और बिजली स्टेशन समेत अन्य परियोजनाओं के लिए जितनी जमीने ली गयी उसमें किसानों, मकान मालिकों को जमीनों का बाजार मूल्य के अनुसार सर्किल रेट बढ़ाकर मुआवजा दिया गया था। समाजवादी सरकार में विकास कार्य के लिए जब भी जमीन की जरूरत पड़ी थी मालिकों को बाजार मूल्य के हिसाब से मुआवजा दिया था। समाजवादी पार्टी विकास विरोधी नही है। हम गोरखपुर के लोगों का भरोसा दिलाते हैं कि समाजवादी पार्टी की सरकार आने पर इनका फर्जी विरासत का गलियारा नहीं, विकास का गलियारा बनाएंगे।

उन्होंने कहा कि गोरखपुर में आज भी जो बड़े कारखाने चल रहे हैं। वह समाजवादी सरकार में बनाये गये थे। नेताजी मुख्यमंत्री थे तब कई योजनाएं शुरू की। वही कारखाने चल रहे हैं। भाजपा सरकार में प्रदेश भर में जमीन पर कब्जे हो रहे है। 2017 के बाद लखनऊ में कई तालाबों पर कब्जे हो गये है। प्रदेश में कानून व्यवस्था ध्वस्त है। प्रदेश में केवल जौनपुर जिले में 60 दिन में 26 हत्याएं हुई है। जब सरकार जमीन छीनने में लगी है तो कानून व्यवस्था कौन देखेगा..? जो लोग आरक्षण और संविधान के विरोधी है, वह सेकुलर और समाजवाद के खिलाफ बोलते है। ऐसे लोग चुनाव में हार और आपने सहयोगी दलों के डर से संविधान और आरक्षण के खिलाफ सीधे नहीं बोलते है। घुमा फिराकर बात करते हैं। अखिलेश यादव ने कहा कि सेकुलरिज्म और समाजवाद ने लोकतंत्र को और विस्तार दिया है। लोकतंत्र को सशक्त करने के लिए सबके सम्मान के लिए समाजवाद और सेकुलरिज्म जरूरी है। भाजपा आरक्षण, भाईचारा, एकता के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि अगर देश में पूंजीवादी व्यवस्था होगी तो गरीबों को कुछ नहीं मिलेगा। भाजपा समाजवाद विरोधी है और एंटी सेकुलर है। भाजपा नफरत फैलाती है।

अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार ने अपने शासन काल में बिजली उत्पादन नहीं बढ़ाया। प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार में ललितपुर, एटा, बारा, घाटमपुर में बिजलीघर बनाए गये। आज प्रदेश को जो बिजली मिल रही है वह समाजवादी सरकार में बनाए गए बिजलीघरो से मिल रही है। भाजपा सरकार में जो बिजली मंत्री बनाए गये है उन्हें बिजली के निजीकरण और बेचने के लिए बनाया गया है। इससे पहले नेता विरोधी दल माता प्रसाद पाण्डेय ने विस्तार से पूरे घटनाक्रम की जानकारी देते हुए कहा कि भाजपा के लोगों ने समाजवादी पार्टी के प्रतिनिधिमंडल को रोकने के लिए बुलडोजर लगा दिया, हमला किया, अंडे फेके। जिससे काफिले की गाड़िया टूट गयी। प्रतिनिधिमंडल ने वहीं धरना दिया। गोरखपुर में सत्ता के संरक्षण में जमीनों का गोरखधंधा

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