एलडीए के ‘जीरो टॉलरेंस’ पर सवाल

लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) की अवैध निर्माणों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के बीच जोन-4 में कथित अवैध निर्माणों को लेकर शिकायतों ने सवाल खड़े कर दिए हैं। खदरा-मदेयगंज क्षेत्र में कमर्शियल मार्केट और बहुमंजिला निर्माणों को लेकर स्थानीय लोगों ने कार्रवाई और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ने के बावजूद समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है।

लखनऊ। लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) की अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। जोन-4 के खदरा-मदेयगंज क्षेत्र में कमर्शियल गतिविधियों और बहुमंजिला निर्माणों को लेकर स्थानीय स्तर पर शिकायतें सामने आई हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि निर्माण कार्य लगातार आगे बढ़ने के बावजूद समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारियों का पक्ष इस रिपोर्ट के प्रकाशन तक प्राप्त नहीं हो सका है।

अलीगंज हादसे के बाद भी उठ रहे सवाल

कुछ समय पहले अलीगंज क्षेत्र में हुए भीषण अग्निकांड के बाद अवैध और मानकों के विपरीत निर्माणों को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई पर गंभीर चर्चा हुई थी। हादसे के बाद अवैध निर्माणों की पहचान और नियमानुसार कार्रवाई को लेकर अधिकारियों की जवाबदेही का मुद्दा भी सामने आया। ऐसे में शहर के दूसरे इलाकों में कथित अनधिकृत निर्माणों की शिकायतें सामने आना एलडीए की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।

खदरा-मदेयगंज में निर्माण को लेकर शिकायत

स्थानीय लोगों के मुताबिक, खदरा-मदेयगंज थाना क्षेत्र के आसपास कई स्थानों पर व्यावसायिक निर्माण और बहुमंजिला इमारतों का निर्माण हो रहा है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि संबंधित विभाग को इसकी जानकारी दिए जाने के बावजूद कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट नहीं है। स्थानीय नागरिकों का यह भी आरोप है कि शिकायतों के बाद अधिकारियों से संपर्क करने में कठिनाई होती है। उनका कहना है कि यदि किसी निर्माण में नियमों का उल्लंघन है तो निर्माण शुरुआती स्तर पर ही रोका जाना चाहिए, न कि उसके पूरा होने के बाद कार्रवाई की जाए।

‘निर्माण पूरा होने के बाद कार्रवाई’ पर सवाल

अवैध निर्माण के मामलों में सबसे बड़ा सवाल निगरानी और समयबद्ध कार्रवाई का है। यदि किसी निर्माण में स्वीकृत मानचित्र, भूमि उपयोग, भवन उपविधि या अन्य निर्धारित नियमों का उल्लंघन है, तो संबंधित विभाग की जिम्मेदारी बनती है कि वह नियमानुसार समय रहते कार्रवाई करे। स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण पूरा होने के बाद नोटिस या सीलिंग जैसी कार्रवाई होने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होता। उनका सवाल है कि निर्माण के शुरुआती चरण में जिम्मेदार अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था क्यों प्रभावी नहीं दिखती?

जीरो टॉलरेंस नीति के क्रियान्वयन पर निगाह

प्रदेश सरकार और स्थानीय विकास प्राधिकरणों की ओर से अवैध निर्माण के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात लगातार कही जाती रही है। ऐसे में जोन स्तर पर सामने आने वाली शिकायतों की निष्पक्ष जांच और नियमों के अनुसार कार्रवाई महत्वपूर्ण हो जाती है। यदि शिकायतों में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह देखना होगा कि संबंधित निर्माणों को समय रहते क्यों नहीं रोका गया और जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होती है। वहीं यदि निर्माण वैध हैं, तो एलडीए को दस्तावेजों और स्वीकृत मानचित्र के आधार पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

जनता चाहती है स्पष्ट जवाब

लखनऊ के नागरिकों की मांग है कि अवैध निर्माण से जुड़ी शिकायतों की पारदर्शी तरीके से जांच हो और कार्रवाई की स्थिति सार्वजनिक की जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि संबंधित क्षेत्रों में निर्माण कार्य स्वीकृत मानचित्र और निर्धारित भवन नियमों के अनुरूप हैं या नहीं। अब निगाह एलडीए की ओर है कि वह सामने आई शिकायतों पर क्या कार्रवाई करता है और जोन-4 में निर्माण संबंधी विवादों को लेकर अपनी स्थिति कब स्पष्ट करता है।

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