आँखों में सपने बसे, मन में पलते भाव। आँख समझ लेती सदा, बिन बोले मनभाव॥
आँख मिली तो खिल उठे, मन के सूने द्वार। नयनों की इक दृष्टि में, छिपा हुआ संसार॥
आँखों से आँसू बहे, मन की पीड़ा बोल। शब्द जहाँ चुप हो गए, नयन गए सब खोल॥
नयन झुकें तो प्रेम है, नयन उठें तो मान। आँखों की भाषा पढ़े, केवल सच्चा प्राण॥
आँख दिखाती सत्य को, चाहे मुख कुछ और। नयनों से छलता नहीं, मन का कोई छोर॥
आँखों में जो शर्म है, उसमें प्रेम अपार। नयनों की उस चुप्पियों, छिपा हुआ संसार॥
आँखों का विश्वास ही, रिश्तों की पहचान। टूटे जब विश्वास तो, सूना लगे जहान॥
नयन मिले तो बात हो, नयन हटे तो मौन। आँखों जैसी बोलती, भाषा होती कौन॥
—– डॉ. सत्यवान सौरभ



