
लखनऊ के डालीबाग माटी कला महोत्सव में मंत्री धर्मवीर प्रजापति ने मिट्टी के उत्पाद खरीदे और कुम्हारों का उत्साह बढ़ाया। लोगों से स्वदेशी उत्पाद अपनाने की अपील की। आमजन से की मिट्टी के बर्तन और स्वदेशी उत्पाद अपनाने की अपील, बोले- माटी कला हमारी संस्कृति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की पहचान।
लखनऊ। दीपावली के त्योहार पर स्वदेशी उत्पादों और पारंपरिक माटी कला को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश के होमगार्ड्स एवं नागरिक सुरक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मवीर प्रजापति ने शुक्रवार को लखनऊ के डालीबाग स्थित माटी कला महोत्सव का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने विभिन्न स्टालों पर प्रदर्शित मिट्टी से निर्मित आकर्षक एवं उपयोगी उत्पादों को देखा और स्वयं भी मिट्टी के बर्तनों सहित अन्य उत्पादों की खरीदारी की। उन्होंने कारीगरों और शिल्पकारों से संवाद कर उनका उत्साहवर्धन किया।
माटी कला हमारी समृद्ध परंपरा और संस्कृति का हिस्सा
महोत्सव में कारीगरों के हुनर और मेहनत की सराहना करते हुए मंत्री धर्मवीर प्रजापति ने कहा कि माटी कला हमारी समृद्ध भारतीय परंपरा, संस्कृति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मिट्टी के बर्तन बनाना केवल पारंपरिक कला नहीं, बल्कि लाखों कुम्हार परिवारों की आजीविका का प्रमुख साधन भी है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2019 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें माटी कला बोर्ड का अध्यक्ष बनाया था। वर्ष 2020 से प्रतिवर्ष इस महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों से कारीगर और दुकानदार अपने उत्पाद लेकर पहुंचते हैं। इस महोत्सव में आमजन द्वारा की गई खरीदारी से कारीगरों और दुकानदारों का उत्साह बढ़ता है तथा उनकी आय में वृद्धि होती है। इससे उनके परिवार भी दीपावली का त्योहार बेहतर ढंग से मना पाते हैं।
दीपावली की सजावट से पूजन सामग्री तक उपलब्ध हैं उत्पाद
मंत्री ने कहा कि माटी कला महोत्सव में दीपावली की सजावट से लेकर पूजन सामग्री और दैनिक उपयोग के मिट्टी के बर्तनों तक अनेक प्रकार के उत्पाद उपलब्ध हैं। ऐसे आयोजनों से पारंपरिक शिल्पकारों को अपने उत्पादों के प्रदर्शन, बिक्री और मार्केटिंग का बेहतर अवसर मिलता है। वहीं आमजन को मिट्टी से बने विभिन्न उत्पादों की विविधता से परिचित होने का मौका मिलता है।

मिट्टी के बर्तन अपनाएं, कुम्हार परिवारों को दें आर्थिक संबल
धर्मवीर प्रजापति ने आमजन से अपील की कि वे दैनिक जीवन में मिट्टी से बने बर्तनों और अन्य उत्पादों का अधिक से अधिक उपयोग करें। उन्होंने कहा कि मिट्टी के बर्तनों का इस्तेमाल हमारी पारंपरिक विरासत को संरक्षित करने के साथ-साथ स्थानीय कारीगरों और कुम्हार परिवारों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने मिट्टी के बर्तनों में खाना बनाने और खाने के पारंपरिक महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि माटी कला को बढ़ावा देने से रोजगार के नए अवसर भी सृजित होते हैं।
स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देने का आह्वान
मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार पारंपरिक कला एवं शिल्प को बढ़ावा देने और कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। माटी कला महोत्सव जैसे आयोजन स्थानीय प्रतिभाओं को बाजार उपलब्ध कराने और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करने का प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने लोगों से स्वदेशी उत्पादों को अपनाने तथा स्थानीय कारीगरों द्वारा तैयार वस्तुओं को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मिट्टी के उत्पादों की खरीदारी केवल एक वस्तु खरीदना नहीं, बल्कि भारतीय परंपरा, स्थानीय रोजगार और कुम्हार परिवारों की आजीविका को प्रोत्साहन देना भी है।



