साहित्य जगत
साहित्य जगत का मुख्य प्रयोजन समाज को साथ लेकर चलना और सबको साधने का प्रयास होता है। भिन्न-भिन्न शैलियों में विभिन्न वादों के कवि,अनुगामी,लेखक और साहित्यकार भिन्न-भिन्न मत स्थापित करते रहते हैं। उनके भिन्न मुहावरों और शब्दावलियों के बावजूद अंतत: लोक-मंगल की ही बात उभर कर सामने आती है। इसकी व्यापक स्वीकृति होने के कारण इसे रचना में अंकित करना तो संभव हो जाता है। परंतु उसे जीवन में उतारना कठिन होता है। साहित्य के लिए आंतरिक दृढ़ता, सघन संलग्नता और तीव्र आध्यात्मिक समर्पण की जरूरत होती है। आज के सामाजिक परिदृश्य एवं परिपेक्ष में वह अर्थप्रधान और स्वार्थपरक व अकल्पनीय होती जा रही है।हिंदी को राष्ट्रभाषा भले घोषित कर दिया गया है। आज हम हिंदुस्तानी होने में गर्व करते हैं।आज क्र दौर में हिंदी भाषा बोलने में अपमान महसूस किया जाता है। लोग कहते हैं बच्चों को हिंदी नहीं,अंग्रेजी सिखाएंगे। अंग्रेजी सीखेंगे तो कुछ बनकर दिखाएंगे। यही कारण है कि आज के दौर में हिंदी भाषा कमज़ोर हो गयी है। हिंदी भाषा आज केवल एक औपचारिक भाषा बन कर ही रह गई है। जबकि हिंदी भाषा को लोग आम बोलचाल में बोलना बेहद पसंद करते हैं। आज के युवाओं की बात करें, तो वे हिंदी के बजाय अंग्रेजी भाषा को विशेष तवज्जो देते हैं। हिंदी भाषा को केवल एक विषय समझा जाता है।
साहित्य केवल अपने लिए लिखने को साहित्य नहीं कहते हैं। जैसे पक्षी अपने आनंद के उल्लास में गाता है उसी प्रकार हम भी अपने आनंद में विभोर होकर केवल अपने लिए ही लिखते हैं, मानो श्रोता या पाठक का उससे कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं होता। यह बात बिल्कुल निर्विवाद रूप से नहीं कही जा सकती कि पक्षी जब गाता है तब पक्षी समाज जरा भी उसके ध्यान में नहीं होता।हिन्दी साहित्य जगत को बढ़ावा देना हमारा लक्ष्य है। आज से पहले भी पौराणिक,ऐतिहासिक और मिथकीय चरित्रों पर लेखन होता था।अब उसमें काफी वृद्धि हुई है। राष्ट्रवाद के दौर में पाठकों की रुचि को ध्यान में रखकर ढेर सारे लेखकों ने महाभारत और रामायण के चरित्रों को लेकर उपन्यास लिखे। हिंदी में कथा साहित्य के दौर को विचारधारा की गुलामी से मुक्त होने का दौर कह सकते हैं। उसको वर्तमान और भविष्य की चिंताओं को अपने अपने उपन्यासों का विषय बनाकर पाठकों के समक्ष ले जाने का जोखिम उठाने का दौर है।
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कर्मयोद्धा राम नाईक
संविधान सभा में उ0प्र0 से निर्वाचित सदस्यों के भाषण, विधान सभा में महिलाओं के प्रतिनिधित्व एवं मंत्रिपरिषद में उनकी सहभागिता…
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चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से
नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान ककुवा ने कोरोना महामारी के विकराल रूप की चर्चा करते हुए कहा- अब तौ यहै लागत…
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जानें क्यों न खिलाएं गाय को रोटी
शास्त्रों और पुराणों में गाय को पूजनीय स्थान दिया गया है। यही कारण है कि गाय को गौमाता कहकर भी…
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जानें क्या है गोमांस भक्षण
हृदयनारायण दीक्षित प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गाय को आदरणीय बताया है। उनका यह वक्तव्य स्वागत योग्य है। भारतीय संस्कृति में…
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देश-विदेश के लगभग 5000 धर्माचार्य,महात्माओं,प्रबुद्धजनों की उपस्थिति में होगा काशी विश्वनाथ कोरीडोर लोकार्पण
लगभग 352 साल बाद ज्ञानवापी कूप मंदिर का नंदी जी के साथ मुख्य मंदिर का भाग बना। प्रधानमंत्री 13 दिसंबर 2021…
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काशी हमारी पुरातन,सनातन,संस्कृति का केन्द्र एवं वर्तमान भारत के उद्भव के आधुनिकता का मुख्य केन्द्र है-प्रधानमंत्री
डा0 मुरली धर सिंह (भारद्वाज) ज्योर्तिलिंग काशी विश्वनाथ मंदिर का स्वतंत्र भारत में 241 साल बाद पहली बार भारतीय शासक…
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भारत की ऋषि परंपरा प्राचीन है
हृदयनारायण दीक्षित भारत की ऋषि परंपरा प्राचीन है। ऋषियों को मंत्र द्रष्टा कहा गया है। ऋषि अनेक हैं। सब संवादरत…
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सामाजिक परिवर्तन के प्रतीक हैं डॉ0 अम्बेडकर
बाबा साहब अंबेडकर ने बड़े उद्योग लगाने की वकालत की, परंतु कृषि को समाज की रीढ़ की हड्डी भी माना,औद्योगिक…
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‘वृक्ष रत्न’ सम्मान से सम्मानित आकांक्षा यादव
साहित्यकार एवं ब्लॉगर आकांक्षा यादव ‘वृक्ष रत्न’ सम्मान से सम्मानित।स्वदेशी समाज सेवा समिति के 11वें स्थापना दिवस पर हुईं सम्मानितदेश…
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आकर्षण का केंद्र है सौन्दर्य
हृदयनारायण दीक्षित मनुष्य जीवन में सौन्दर्य का महत्व है। सौन्दर्य कला का मुख्य तत्व है। कलात्मक सृजन के लिये भी…
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भोजन क बर्बादी देखि कय जीव सिहर उठत हय
चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान ककुवा ने मुंडन-शादी दावतों में भोजन बर्बाद होने की चर्चा…
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मनुष्य द्वारा रचित सबसे बड़ी सम्पदा है भाषा
हृदयनारायण दीक्षित ध्वनि का रूप नहीं होता। संसार रूपों से भरापूरा है। समाज रूप को नाम देता है। नाम शब्द…
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रघुकुल नंदन कब आओगे
रामा रामा रटते रटते,बीती रे उमरिया ।रघुकुल नंदन कब आओगे,भिलनी की डगरिया ॥ मैं शबरी भिलनी की जाई,भजन भाव ना…
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वोटन के फेर मा ढीलि परिगै मोयो सरकार
चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से ….. मोदी सरकार के लिए बेरोजगारी सबसे बड़ी चुनातियों में से एक है। यही…
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कोल्हू के बैल की भांति जीता है आदमी..!
साधारण आदमी कोल्हू के बैल की भांति जीता है…. उमेश कुमार शुक्ला मैंने सुना है, एक दार्शनिक, एक तार्किक, एक…
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देवी कृपा की सत्य कथा
सूरथ नाम के राजा और समाधि नाम के वैश्य पर देवी की कृपा की कथा….! [responsivevoice_button voice=”Hindi Female” buttontext=”इस समाचार…
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डीजल केर भाव रोज बढ़तै जाय रहा,बिजलिव बिल्लवाय हय…
चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से … नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान ककुवा ने खेती-किसानी की चर्चा करते हुए कहा- वयसी…
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प्राण नहीं तो जीवन नहीं
[responsivevoice_button voice=”Hindi Female” buttontext=”इस समाचार को सुने”] हृदयनारायण दीक्षित वायु प्रदूषण से राष्ट्रीय बेचैनी है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की हालत…
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आध्यात्मिक दृष्टि से निर्मित हैं हमारी देवमूर्तियां
आचार्य डा0 प्रदीप द्विवेदी(पत्रकार एवं आध्यात्मिक लेखक) [responsivevoice_button voice=”Hindi Female” buttontext=”इस समाचार को सुने”] सम्पूर्ण भारत में आप भ्रमण करिये…
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अखण्ड भारत- संभल लो संभल जाओ..
भास्कर चतुर्वेदी अखंड बोलना इसलिए पड़ता है क्योंकि सबकुछ खंड-खंड हो चला है। जम्बूद्वीप से छोटा है भारतवर्ष। भारतवर्ष में…
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पुरुषों की आदत ने औरतों को नारकीय जीवन दिया..!
अपर्णा [responsivevoice_button voice=”Hindi Female” buttontext=”इस समाचार को सुने”] यानी भारतीय किचन कितना महान है यह भारत की हर स्त्री बहुत…
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प्रभु स्मरण का रास्ता भी एक तथा मंजिल भी एक है..!
प्रभु का स्मरण करने का रास्ता भी एक है तथा मंजिल भी एक है..! डा0 जगदीश गांधी प्रभु का स्मरण…
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हनुमान जन्मोत्सव विशेष
उमेश कुमार शुक्ला ज्योतिषीयों के सटीक गणना के अनुसार हनुमान जी का जन्म 1 करोड़ 85 लाख 58 हजार 113…
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