डीजल केर भाव रोज बढ़तै जाय रहा,बिजलिव बिल्लवाय हय…

चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से …


नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान


ककुवा ने खेती-किसानी की चर्चा करते हुए कहा- वयसी सरकार विधानसभा चुनाव क फेर मा उलझी हय। अइसी किसानन कय तकलीफ बढ़त जाय रही। रबी फसल कय बुवाई क्यारु सीजन हय। डीजल केर भाव रोज बढ़तै जाय रहा। बिजलिव बिल्लवाय हय। नहरन मा पानी अबहीं छोंड़ा नाय गवा। धान, उरद, जोनधरी अउ तिल्ली सब काटि-माड़िय चुके हयँ। अब खेतन कय पलेवा खातिन पानी चही। जी किसान पलेवा कय चुके, उई खादिय अउ बेसार खातिन भटक रहे हयँ। जिम्मेदार अधिकारी नेतन केरी लल्लो-चप्पो म बाझा हयँ। न नेता खाली हयँ, न अफसर। बस, कहय क खातिन सब जने किसानन केर हमदर्द बने हयँ। आखिर किसान जाय तौ जाय कहाँ…?


चतुरी चाचा अपने प्रपंच चबूतरे पर पालथी मारे हुक्का गुड़गुड़ा रहे थे। पुरई भइया स्यामा गईया दूह रहे थे। ककुवा गाँव के बच्चों से उनकी पढ़ाई-लिखाई और बाल दिवस के बारे में बतिया रहे थे। आज मौसम अच्छा था, किंतु सुबह धुंध दिखाई दे रही थी। मेरे चबूतरे पर पहुंचते ही पीछे से कासिम चचा एवं मुंशीजी की जोड़ी पच्छे टोला से आ गयी। ककुवा ने खेती-बाड़ी से प्रपंच की शुरुआत कर दी। ककुवा का कहना था कि गेंहू और आलू की बुवाई का समय चल रहा है। परन्तु, खाद और बीज को लेकर मारामारी मची है। डीएपी उर्वरक के लिए हर वर्ष अफरा-तफरी मचती है।इसके अतिरिक्त सिंचाई के लिए पानी बड़ा महंगा साबित हो रहा है। किसान इस समय बड़ा परेशान है। नेतागण चुनाव की तैयारी में मशगूल हैं। वहीं, जिम्मेदार अधिकारी फील्ड में काम करने के बजाय सत्ताधारी नेताओं की जी-हुजूरी में व्यस्त हैं। ऐसे में किसानों का दर्द सुनने वाला कोई नहीं है। वोट के लिए सारे नेता किसानों के हितैषी बन जाते हैं।


चतुरी चाचा ने ककुवा की बात को जायज ठहराते हुए कहा- फसल बुवाई क बेरिया हर साल पानी, खाद अउ बीज केरी किल्लत होत हय। अखबारन मा ख़बर छपत हय। नेता लोग आश्वासन देत हयँ। अधिकारीगन बयान पय बयान जारी करत हयँ। किसान संगठन अपन अलगय नेतागिरी चमकावत हयँ। किसानन की समस्या जस की तस बनी रहत हय। यहू साल वहै सब होय रहा। सब जानत हयँ कि किसान कौनिव तना अपन खेत तौ बोइन डारी। सच पूछो, किसानन का बिजली अउ डीजल सस्ता मिलय का चही। नहरन मा समय ते पानी छोड़ा जाय का चही। बुवाई सीजन के पहिलेन खाद अउ बीज केरी व्यवस्था होय जाय का चही। खराब परे सरकारी नलकूपन केरी मरम्मत होय क चही। सिंचाई क खातिर सरकारी नलकूपन केरी संख्या बढ़य चही। सरकार जौ तनुक जेत जाय तौ किसानन कय आधी समस्या खत्म होय जाय। किसान देस का अन्नदाता हय। किसान सरकारों का भाग्य विधाता हय। तबहूँ किसानन कय सुनवाई नाइ होत हय।


इसी बीच चंदू बिटिया प्रपंचियों के लिए जलपान लेकर आ गई। आज जलपान में तुलसी-अदरक की कड़क चाय के साथ ‘पोय’ के पत्तों की कुरकुरी पकौड़ियाँ और हरी धनिया-मिर्च की चटपटी चटनी थी। पकौड़ियाँ खाने के बाद सबने चाय के कुल्हड़ थाम लिये। ककुवा ने चंदू बिटिया से पूछा- पोती, आज तौ इतवार हय। तुमरे स्कूल मा बाल दिवस कब-कैसन मनवा जाई? बहुते स्कूलन मा सुम्बार का बाल दिवस मनी। चंदू बिटिया ने बताया- बाबा जी, हमारे स्कूल में शनिवार को ही जवाहरलाल नेहरु का जन्मदिन मनाया गया था। हम बच्चों ने बाल मेला लगाया था। बाल दिवस पर गीत, नृत्य और नाटक भी पेश किए गए थे। चंदू बिटिया इतना बताकर फुर्र हो गई।


प्रपंच को आगे बढ़ाते हुए चतुरी चाचा ने ककुवा से पूछा- ककुवा भाई, आजु बड़के चबूतरे प नइ आये। आखिर उई कहाँ चलेगे। ककुवा बोले- अरे! हम बताव का भूलिन गेन। बड़के आज काल्हि बड़े परेशान हयँ। कोल्ड स्टोर वाले वहिका बेसार वाला सगरा आलू सड़ाय डारिन। बड़के क्यार खेत तैयार हय। अब वहिका आलू नाय मिलि रहे। चार दिन ते कोल्ड स्टोर पय परा हय। तमाम किसान हुवाँ धरना दै रहे हयँ। कौनव क आलू गायब हयँ। कौनव क आलू सड़ गवा। कौनव क आलू जामि गवा। बड़ी आफत हय। कोल्ड स्टोर केरा मालिक कहूँ छुपान बैइठ हय। बताव, अब किसान आलू क बेसार कहाँ ते लावै। यतनी अंधेरगर्दी मची हय। ससुरा 132 रुपया बोरी केरावा लिहिस अउर सबके आलू नासि कय डारिस। चतुरी चाचा ने कहा- हम तौ कहित हय कि ई गोल्डन कोल्ड स्टोर वाले का पुलिस उठाए क जेल मा बन्द करै।


कासिम चचा ने विषय परिवर्तन करते हुए कहा- इस समय देश में भारत सरकार के नागरिक सम्मान पद्मश्री और सलमान खुर्शीद की पुस्तक को लेकर हायतौबा मची है। सलमान कांग्रेस के बड़े नेता हैं। वह बहुत गम्भीरता से बात करते हैं। उन्होंने अपनी पुस्तक में हिंदुत्व की तुलना खूंखार आतंकी संगठन आईएसआईएस व बोको हरम से कर दी है। अयोध्या पर लिखी पुस्तक में खुर्शीद ने कट्टर हिंदुत्व पर चोट की है। अब पेज नम्बर 113 पर लिखी बातों को लेकर भाजपा और उसके सहयोगियों ने कोहराम मचा दिया है। इधर, केंद्र सरकार ने फ़िल्म अभिनेत्री कंगना रानावत और फ़िल्म एवं सीरियल निर्माता एकता कपूर को पद्मश्री जैसे नागरिक सम्मान से नवाज दिया है। इसको लेकर देश में तरह-तरह की बातें हो रही हैं। कंगना को विवादों में रहने की आदत है। उसने पद्मश्री मिलने के बाद कह दिया कि भारत को असली आजादी वर्ष 2014 में मिली है। इस बात को लेकर उसकी खूब खिंचाई हो रही है। वहीं, एकता कपूर को पद्मश्री दिए जाने का भी विरोध हो रहा है।


मुंशीजी ने कासिम चचा की बात को आगे बढ़ाते हुए कहा- एकता कपूर को पद्मश्री दिया जाना किसी को भी अच्छा नहीं लगा। मोदी सरकार ने न जाने कैसे एकता कपूर को पद्मश्री के लिए चुन लिया। अगर उन्हीं के घर में सम्मान देना था तो एकता के अभिनेता पिता जितेन्द्र को पद्मश्री दे देते। लोगों का कहना है कि एकता की फिल्में और सीरियल परिवार-समाज में अपसंस्कृति फैलाते हैं। ओटीटी प्लेटफार्म पर एकता ने बड़ी गन्दी और ओछी भाषा परोसी है। इसके बावजूद उसे पद्मश्री जैसा बड़ा नागरिक सम्मान दे दिया गया। यह बात किसी को हजम नहीं हो रही है। कंगना का चुनाव किसी मायने में उचित है। उसने कई सामाजिक फिल्में दी हैं। साथ ही, उसने नारी सम्मान के बड़ा संघर्ष भी किया है। हालांकि, मोदी सरकार में पद्म विभूषण, पद्म भूषण व पद्मश्री सम्मान जमीनी लोगों को ही दिया जा रहा है।


मैंने कोरोना का अपडेट देते हुए प्रपंचियों को बताया कि विश्व में अबतक 25 करोड़ 32 लाख से ज्यादा लोग कोरोना ग्रसित हो चुके हैं। इनमें 51 लाख चार हजार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इसी तरह भारत में अबतक तीन करोड़ 44 लाख से ज्यादा लोग कोरोना से पीड़ित हो चुके हैं। इनमें चार लाख 62 हजार से अधिक लोगों की असमय मृत्यु हो चुकी है। भारत में मुफ्त कोरोना टीका लगाने का अभियान युद्ध स्तर पर चल रहा है। देश में अबतक तकरीबन 110 करोड़ टीके लगाए जा चुके हैं। करीब 36 करोड़ भारतीयों को टीके की दोनों खुराक मिल चुकी हैं। बच्चों की कोरोना वैक्सीन का बेसब्री से इंतजार है। विश्व के कई देशों में कोरोना महामारी का प्रकोप फिर बढ़ गया है। दुनिया के कुछ देशों को एक बार फिर लॉकडाउन का सामना करना पड़ रहा है। चिंता की बात यह है कि अब कोरोना महामारी की जद में पशु भी आ गए हैं। ऐसे में हम भारतीयों को ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए। हमें मॉस्क और दो गज की दूरी का पालन अवश्य करना चाहिए।

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