गोरखपुर में श्रीमद्भागवत महापुराण कथा ज्ञान-यज्ञ का शुभारंभ, CM योगी बोले- आध्यात्मिक परंपरा जीवन के मूल प्रश्नों से जोड़ती है। मुख्यमंत्री ने गोरखपुर में ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 57वीं एवं ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 12वीं पुण्यतिथि पर ‘सप्त दिवसीय पुण्यतिथि समारोह’के अन्तर्गत ‘संगीतमय श्रीमद्भागवत महापुराण कथा ज्ञान-यज्ञ’ के शुभारम्भ किया श्रीमद्भागवत महापुराण जैसी कथाएं व्यक्ति को केवल आध्यात्मिक दृष्टि नहीं देतीं, बल्कि उसे अपने जीवन, कर्म, विचार और आचरण पर भी विचार करने की प्रेरणा देती। गोरक्षपीठ की परम्परा केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं, बल्कि अपनी सनातन ऋषि परम्परा, ज्ञान, भक्ति, संस्कृति, जीवन मूल्यों और विरासत से समाज को जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम।
गोरखपुर। ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 57वीं एवं ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 12वीं पुण्यतिथि के अवसर पर श्री गोरखनाथ मंदिर में आयोजित सप्त दिवसीय पुण्यतिथि समारोह के तहत बुधवार को ‘संगीतमय श्रीमद्भागवत महापुराण कथा ज्ञान-यज्ञ’ का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भाग लिया और कथा के आध्यात्मिक एवं सामाजिक महत्व पर अपने विचार रखे। मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक विज्ञान और तकनीक ने मानव जीवन को सुविधाओं से समृद्ध किया है, लेकिन स्थायी सुख और शांति का प्रश्न आज भी महत्वपूर्ण बना हुआ है। उनके अनुसार, इसी संदर्भ में भारत की आध्यात्मिक और ज्ञान परंपरा की प्रासंगिकता सामने आती है।
जीवन, कर्म और आचरण पर विचार करने की प्रेरणा देती है कथा
मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीमद्भागवत महापुराण जैसी कथाएं केवल आध्यात्मिक दृष्टि प्रदान नहीं करतीं, बल्कि व्यक्ति को अपने जीवन, कर्म, विचार और आचरण पर आत्मचिंतन के लिए भी प्रेरित करती हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में कथा का उद्देश्य व्यक्ति को जीवन के मूल प्रश्नों से जोड़ना और उनके उत्तर तलाशने का मार्ग दिखाना रहा है। कथा के माध्यम से ज्ञान, भक्ति, निष्काम कर्म और जीवन के उद्देश्य को समझने की प्रेरणा मिलती है।
गोरक्षपीठ की परंपरा को बताया समाज से जुड़ने का माध्यम
मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरक्षपीठ की परंपरा धार्मिक आयोजनों तक सीमित नहीं है, बल्कि सनातन ऋषि परंपरा, ज्ञान, भक्ति, संस्कृति, जीवन मूल्यों और विरासत से समाज को जोड़ने का माध्यम भी है। उन्होंने ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज और ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की स्मृतियों को नमन करते हुए कहा कि उनकी पुण्यतिथि के अवसर पर प्रत्येक वर्ष विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
29 सितंबर तक चलेगी श्रीमद्भागवत कथा
कार्यक्रम के तहत 23 से 29 सितंबर तक अपराह्न सत्र में श्रीमद्भागवत महापुराण की कथा का आयोजन किया जाएगा। मुख्यमंत्री के अनुसार, इसमें गोरखपुर सहित पूर्वी उत्तर प्रदेश के श्रद्धालु भाग लेंगे। वहीं, प्रातःकालीन सत्र में सनातन परंपरा से जुड़े विभिन्न विषयों पर विद्वानों की गोष्ठियां आयोजित की जाएंगी। इस तरह पुण्यतिथि समारोह में धार्मिक कार्यक्रमों के साथ सामाजिक और राष्ट्र से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श भी होगा।
नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी कथाओं के माध्यम से श्रद्धालुओं को धर्म, संस्कृति, परंपरा, मान-बिंदुओं और विरासत को समझने का अवसर मिलता है। उन्होंने इसे नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का एक माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि लंबे समय से चली आ रही कथा परंपरा के बावजूद भारत की सामूहिक स्मृति में इससे जुड़े प्रसंग और परंपराएं आज भी मौजूद हैं। उनके अनुसार, आज भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु ऐसी कथाओं में शामिल होकर जीवन के उद्देश्य और आचरण पर विचार करते हैं।
विचार, वाणी और कर्म में सामंजस्य जरूरी
मुख्यमंत्री ने कहा कि व्यक्ति के विचार, वाणी और कर्म में एकरूपता उसके व्यक्तित्व को प्रभावशाली बनाती है। उन्होंने मनसा, वाचा और कर्मणा के बीच सामंजस्य को जीवन की सार्थकता से जोड़ा। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति कुछ कहता है, कुछ करता है और उसके मन में कुछ और होता है तो उसके भीतर भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। उनके अनुसार, विचार और आचरण के बीच असामंजस्य व्यक्ति के लिए चुनौती बनता है।
सोशल मीडिया के दौर में सत्य-असत्य की पहचान चुनौती
मुख्यमंत्री ने वर्तमान समय में सोशल मीडिया को भी चर्चा के केंद्र में रखा। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के कारण सत्य और असत्य के बीच अंतर करना कई बार चुनौतीपूर्ण हो जाता है।उन्होंने ‘अर्धसत्य’ की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पूर्ण सत्य नहीं होता, लेकिन भ्रम की स्थिति पैदा कर सकता है। मुख्यमंत्री के अनुसार, भारतीय ज्ञान परंपरा व्यक्ति को विवेक विकसित करने, सत्य की पहचान करने और जीवन की वास्तविकता को समझने की दिशा दिखाती है।
संत के जीवन में विचार और आचरण की एकरूपता पर जोर
मुख्यमंत्री ने वृंदावन धाम से आए जगतगुरु मूलक पीठाधीश्वर स्वामी राजेंद्र देवाचार्य जी महाराज का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि संत का जीवन स्वयं उसके संदेश का प्रमाण होता है और जब विचार, वाणी तथा आचरण में एकरूपता दिखाई देती है तो उसका समाज पर प्रभाव पड़ता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि श्रीमद्भागवत महापुराण की कथा श्रद्धालुओं को ज्ञान, भक्ति, निष्काम कर्म, आत्मचिंतन और जीवन के उद्देश्य को समझने की प्रेरणा देगी। कार्यक्रम में जगतगुरु मूलक पीठाधीश्वर स्वामी राजेंद्र देवाचार्य जी महाराज सहित अन्य संतजन और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।



