बायोजेंटा बनाएगी एंटी-कैंसर दवाएं, 1250 करोड़ के निवेश से बाराबंकी में भूमि पूजन

  • बायोजेंटा बनाएगी एंटी-कैंसर दवाएं, 1250 करोड़ के निवेश से बाराबंकी में बड़े फार्मा प्रोजेक्ट का भूमि पूजन।
  • 13 एकड़ में बनेगी फॉर्मा फैक्ट्री, 2,000 से अधिक युवाओं को मिलेगा रोजगार।
  • एंटी-कैंसर दवाओं के साथ ह्युमन हार्मोन्स और अन्य महत्वपूर्ण जीवनरक्षक दवाओं का निर्माण किया जाएगा।
  • नकली दवाओं के क्रय पर शिकंजे के साथ यूपी को फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने में जुटा एफएसडीए।
  • लेटर ऑफ कंफर्ट पाने वाली 17 कंपनियों में फैक्ट्री शुरू करने वाली पहली इकाई बनेगी बायोजेंटा।
  • एलओसी प्राप्त करने वाली अन्य कंपनियां के भी जल्द भूमि पूजन और निर्माण के चरण तक पहुंचने की संभावना।
  • गाज़ियाबाद, गौतमबुध नगर समेत अन्य जिलों में भी निर्माण कार्य शुरू।

बाराबंकी। उत्तर प्रदेश में नकली और अवैध दवाओं के खिलाफ कार्रवाई के साथ उत्तर प्रदेश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) विभाग अब प्रदेश को फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरिंग के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में भी तेजी से काम कर रहा है। इसी कड़ी में बाराबंकी के मेडिकल पार्क में बायोजेंटा ग्लोबल की 1,250 करोड़ रुपये की फार्मास्युटिकल परियोजना का भूमि पूजन एवं शिलान्यास हुआ। करीब 13 एकड़ भूमि में स्थापित होने वाली इस फैक्ट्री में एंटी-कैंसर दवाओं के साथ ह्युमन हार्मोन्स और अन्य महत्वपूर्ण जीवनरक्षक दवाओं का निर्माण किया जाएगा। कंपनी की परियोजना से प्रदेश में फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरिंग को नई गति मिलने के साथ 2,000 से अधिक युवाओं को रोजगार मिलने की उम्मीद है।

गुणवत्तापूर्ण दवा निर्माण को बढ़ावा देना है उद्देश्य


भूमि पूजन कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की कमिश्नर रोशन जैकब ने कहा कि विभाग को उत्तर प्रदेश सरकार ने एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। एफएसडीए अब अपनी नियामक एवं प्रवर्तन की जिम्मेदारियों के साथ उत्तर प्रदेश फार्मास्युटिकल एवं मेडिकल डिवाइस पॉलिसी-2023 के क्रियान्वयन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। विभाग का उद्देश्य प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण दवा निर्माण को बढ़ावा देना और निवेशकों के लिए बेहतर वातावरण तैयार करना है।

नकली दवाओं पर कार्रवाई से मैन्युफैक्चरिंग हब तक


एफएसडीए की भूमिका को अब केवल नकली और अवैध दवाओं पर कार्रवाई तक सीमित नहीं रखा जा रहा है। एक ओर विभाग दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और अवैध कारोबार पर शिकंजा कस रहा है, वहीं दूसरी ओर नए फार्मास्युटिकल निवेश को जमीन पर उतारने के लिए फैसिलिटेटर की भूमिका निभा रहा है। बायोजेंटा की परियोजना इसी बदलाव की महत्वपूर्ण मिसाल है। डॉ रोशन जैकब ने बताया कि हाल में लखनऊ में आयोजित नेशनल फार्मा कॉन्क्लेव में देश की फार्मा इंडस्ट्री के बड़े इंडस्ट्रियलिस्ट्स ने भाग लिया था। कॉन्क्लेव के दौरान 17 यूनिट्स को लेटर ऑफ कंफर्ट (एलओसी) सौंपे गए। इनमें बायोजेंटा भी शामिल थी। ये यूनिट्स उत्तर प्रदेश के साथ-साथ अन्य राज्यों से हैं और प्रदेश में फार्मास्युटिकल एवं मेडिकल डिवाइस क्षेत्र में निवेश करना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि बायोजेंटा नई यूनिट्स में साइट पर काम शुरू करने वाली पहली इकाई है। उम्मीद है कि एलओसी प्राप्त करने वाली अन्य कंपनियां भी जल्द भूमि पूजन और निर्माण के चरण तक पहुंचेंगी। उन्होंने बताया कि इनमें से सात यूनिट्स उत्पादन शुरू कर चुकी हैं और अब उनकी सब्सिडी की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी।

13 एकड़ में बनेगी फैक्ट्री, कैंसर की दवाओं का होगा निर्माण


बायोजेंटा ग्लोबल के एमडी दीपनारायण शर्मा ने बताया कि कंपनी की वैश्विक स्तर पर 35 देशों में मौजूदगी है और वह हिमाचल प्रदेश में भी काम कर रही है। अब कंपनी ने उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में अपनी नई फैक्ट्री स्थापित करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से फैक्ट्री की स्थापना के लिए बाराबंकी मेडिकल पार्क में 13 एकड़ भूमि आवंटित किए जाने और परियोजना को आगे बढ़ाने की गति से वह प्रभावित हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य में मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए लिए जा रहे फैसलों की सराहना की। वाराणसी से ताल्लुक रखने वाले दीपनारायण शर्मा ने कहा कि उन्होंने देश के विभिन्न राज्यों में काम किया है, लेकिन उत्तर प्रदेश लौटकर यहां नई फैक्ट्री स्थापित करना उनके लिए भावनात्मक और महत्वपूर्ण अनुभव है। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित फैक्ट्री में कैंसर संबंधी दवाइयों, हार्मोन्स और अन्य महत्वपूर्ण जीवनरक्षक दवाओं का निर्माण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कंपनी का लक्ष्य अपनी फैसिलिटी में गुणवत्तापूर्ण दवाओं का निर्माण करना है, ताकि लोगों को सुरक्षित और बेहतर जीवन के लिए आवश्यक दवाएं उपलब्ध हो सकें। साथ ही परियोजना के माध्यम से उत्तर प्रदेश के 2,000 से अधिक युवाओं को रोजगार देने और राज्य के मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को मजबूत करने में योगदान देने का लक्ष्य रखा गया है।

400 से अधिक फार्मा कॉलेज और एक लाख से ज्यादा रिटेल स्टोर यूपी की ताकत


डॉ रोशन जैकब ने कहा कि फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश के पास कई महत्वपूर्ण फायदे हैं। प्रदेश में कई एक्सप्रेसवे, 400 से अधिक फार्मा कॉलेज और एक लाख से अधिक रिटेल फार्मा स्टोर मौजूद हैं। ये सुविधाएं फार्मा उद्योग के लिए मजबूत बाजार, कनेक्टिविटी और कुशल मानव संसाधन का आधार तैयार करती हैं। प्रदेश के पास पर्याप्त भूमि बैंक भी उपलब्ध है। इससे फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरिंग की पूरी चेन को विकसित करने की संभावनाएं बढ़ती हैं। एपीआई से लेकर फॉर्मूलेशन और एंड-टू-एंड मैन्युफैक्चरिंग तक की गतिविधियों को एक मजबूत औद्योगिक इकोसिस्टम के भीतर विकसित किया जा सकता है।

एनसीआर से निकटता, एक्सप्रेसवे और बड़ा बाजार भी बने ताकत


उत्तर प्रदेश की भौगोलिक स्थिति भी फार्मा उद्योग के लिए महत्वपूर्ण है। एनसीआर के निकटता के कारण प्रदेश को विशाल बाजार मिलता है। इसके अलावा राज्य में एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट और मोबिलिटी कॉरिडोर का व्यापक नेटवर्क विकसित हुआ है। ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर के बीच स्थित होने के कारण परिवहन और लॉजिस्टिक्स की सुविधाएं भी बेहतर हैं। प्रदेश में भारत सरकार और अन्य प्रमुख वैज्ञानिक एवं अनुसंधान संस्थानों की मौजूदगी से रिसर्च एंड डेवलपमेंट (आएएंडडी) के लिए भी मजबूत आधार उपलब्ध है। इसके साथ ही बड़ी संख्या में शिक्षित और कुशल मानव संसाधन फार्मास्युटिकल उद्योग के विस्तार के लिए महत्वपूर्ण ताकत है।

फार्मा कॉन्क्लेव के बाद तेजी से धरातल पर उतर रहा निवेश


प्रदेश में फार्मास्युटिकल निवेश को गति देने में हाल में आयोजित फार्मा कॉन्क्लेव की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कॉन्क्लेव में सन फार्मा, सिप्ला, डॉ. रेड्डीज, जायडस कैडिला, मैनकाइंड फार्मा, टॉरेंट फार्मा और डाबर सहित फार्मा क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था। कई प्रमुख उद्योगपतियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने मुख्यमंत्री के साथ वन-टू-वन बैठकें कर प्रदेश में निवेश, नीतिगत सहयोग और उपलब्ध औद्योगिक सुविधाओं पर चर्चा की थी।


इसके बाद 17 कंपनियों को एलओसी जारी किए गए। अब बायोजेंटा का भूमि पूजन इस प्रक्रिया को निवेश से निर्माण और निर्माण से उत्पादन की दिशा में बढ़ता हुआ कदम दिखाता है। सात यूनिट्स के उत्पादन शुरू करने और बायोजेंटा द्वारा साइट पर काम शुरू करने से प्रदेश की फार्मा नीति के क्रियान्वयन के परिणाम भी सामने आने लगे हैं।

योगी सरकार का लक्ष्य यूपी को फार्मा हब बनाना


मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार उत्तर प्रदेश को देश के प्रमुख फार्मास्युटिकल विनिर्माण केंद्रों में शामिल करने के लिए निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर और नीतिगत प्रोत्साहन को एक साथ आगे बढ़ा रही है। सरकार का जोर केवल निवेश प्रस्तावों तक सीमित न रहकर उन्हें धरातल पर उतारने पर है।बाराबंकी में बायोजेंटा का ₹1,250 करोड़ का प्रोजेक्ट इसी नीति की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। एक तरफ एफएसडीए नकली, अवैध और घटिया दवाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रहा है, तो दूसरी तरफ गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक दवाओं के निर्माण के लिए नई औद्योगिक इकाइयों को प्रोत्साहित कर रहा है। ऐसे में रेगुलेशन के साथ मैन्युफैक्चरिंग और निवेश को बढ़ावा देने का यह दोहरा मॉडल उत्तर प्रदेश को फार्मास्युटिकल क्षेत्र में नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

इस अवसर पर एमएसएमई राज्य मंत्री हंसराज विश्वकर्मा, यूपीसीडा के सीईओ बलकार सिंह, मुख्यमंत्री के सलाहकार जीएन सिंह समेत कई अधिकारी उपस्थित रहे।

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