
कृषि कानून के विरोध में पिछले 34 दिनों से दिल्ली के बॉर्डर पर किसान आंदोलन कर रहे हैं. वहीं बिहार की राजधानी पटना में कानूनों के खिलाफ सड़कों पर उतरे किसानों के साथ पुलिस की झड़प हो गई,पुलिस ने किसानों को राजभवन की तरफ जाने से रोकने के लिए लाठी चार्ज का सहारा लेना पड़ा। पटना की सड़कों पर उतरे किसान राजभवन में कृषि कानून के विरोध में राज्यपाल को ज्ञापन देने जा रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक लिया और लाठी चार्ज शुरू कर दिया. किसान गांधी मैदान से निकलकर डाक बंगला चौराहे पर प्रदर्शन कर रहे थे।
कृषि कानूनों के विरोध में सपा कार्यकर्ताओं ने गांवों में चौपाल कर किसानों को कानून की खामियों से अवगत कराया। साथ ही इस कानून को वापस लिए जाने की मांग उठाई। किसानों को राहत नहीं दिलाने तक आंदोलन जारी रखने का एलान किया।
किसानों के पहुंचते ही पुलिस ने बल का प्रयोग करते हुए किसानों को तितर-बितर करने की कोशिश की लेकिन जब किसान नहीं माने तो उनपर पुलिस ने वाटर कैनन और लाठी चार्ज किया। जिसके बाद किसानों में भगदड़ मच गई,पुलिस ने किसानों को दौड़ा-दौड़ा कर बेरहमी से पीटा।
वहीं, अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे किसान अपने आंदोलन को घर-घर पहुंचाने के लिए बड़ी रणनीति तैयार कर रहे हैं। भारतीय किसान यूनियन के हरियाणा अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि आंदोलन को अधिक से अधिक जोड़ा जाएगा। इसके लिए भारतीय किसान यूनियन हरियाणा ने बैठक बुलाई है, जो एक जनवरी को आंदोलनस्थल पर आयोजित होगी।
कृषि कानूनों के विरोध में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) एक बार फिर टूट गया है। इससे पहले लंबे समय तक भाजपा के सहयोगी रहे और केन्द्र सरकार में शामिल शिरोमणि अकाली दल ने भी एनडीए से नाता तोड़ लिया था। शिअद की नेता हरसिमरत कौर बादल ने मंत्रिमंडल से इस्तीफा भी दे दिया था।
अब राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) ने केंद्र के नए कृषि कानूनों के विरोध में भाजपा नीत राष्ट्रीय राजग से शनिवार को नाता तोड़ लिया। आरएलपी के संयोजक एवं नागौर से सांसद हनुमान बेनीवाल ने शाहजहांपुर में किसान रैली को संबोधित करते हुए यह घोषणा की। बेनीवाल ने केंद्र के तीनों कृषि कानूनों को किसानों के खिलाफ बताया है। उन्होंने अलवर के शाहजहांपुर में किसान रैली में कहा कि भारत सरकार द्वारा लाए गए कृषि विरोधी कानूनों के कारण आज आरएलपी राजग गठबंधन से अलग होने की घोषणा करती है।
बैठक में प्रदेशभर के सदस्यों से आह्वान किया गया है कि जो लोग किसी वजह से अब तक धरनास्थल पहुंचने में असमर्थ रहे हैं, वह इस बैठक में अवश्य हिस्सा लें। हरियाणा का किसान आंदोलन में रणनीति की रूपरेखा तैयार करेगा। आगे उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब की तर्ज पर हरियाणा में भी कई बड़े फैसले लेने का संकल्प किया गया है। इसके तहत अनिश्चितकाल के लिए हरियाणा टोल फ्री की कॉल पहले ही की जा चुकी है।
किसानों से हरियाणा अध्यक्ष चढूनी ने आह्वान किया कि वह अपने घरों पर भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) का झंडा लगाएं। उन्होंने कहा कि किसान अपने ट्रैक्टर, गाड़ियों, बाइक पर भी वही झंडा लगाएं, ताकि सरकार को पता चले कि किसान हर जगह कानूनों के विरोध में खड़ा है।
देशभर में एक ही तरह के झंडे के नीचे किसान आंदोलन चलेगा। इसके लिए जल्द ही भाकियू झंडे का प्रारूप जारी करेगी।उन्होंने कहा कि इस आंदोलन को जन-जन का आंदोलन बनाने के लिए यह फैसला लिया गया है। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन को देशभर में चलाया जाएगा। गांव-गांव जाकर कार्यकर्ता किसान को इन कानूनों की कमी बताएंगे। इतना ही नहीं, आढ़तियों से भी सहयोग से मंडियों में आने वाले हर किसान को कानून के बारे में समझाया जाएगा।



