निगम ही चला रहा है राष्ट्रीय स्वच्छता सर्वेक्षण व जनजागरण अभियान

उपायुक्त गजेन्द्र सिंह रलावता को हटाए जाने के बाद अब अजमेर नगर निगम का काम कैसे चलेगा ? निगम ही चला रहा है राष्ट्रीय स्वच्छता सर्वेक्षण व जनजागरण अभियान। फरवरी में 80 वार्डों के चुनाव होने हैं। उपायुक्त के दोनों पद रिक्त हैं।

गत 30 नवम्बर को अजमेर नगर निगम के उपायुक्त के पद से रिटायर होने के बाद दो दिसम्बर को गजेन्द्र सिंह रलावता ने अनुबंध के आधार पर पुन: उपायुक्त का पद संभाला था, लेकिन रलावता ने कोई एक पखवाड़े ही इस पद पर काम किया और अब स्वायत्त शासन विभाग के निदेशक ने पुनर्नियुक्ति वाला 2 दिसम्बर का आदेश निरस्त कर दिया। आदेश की सूचना मिलते ही रलावता ने अब निगम कार्यालय आना बंद कर दिया है। कहा जा रहा है कि रलावता को कांग्रेस की आंतरिक राजनीति का शिकार होना पड़ा है।

निगम में अधिकारियों की कमी और रलावता की मेहनत को देखते हुए आयुक्त खुशाल यादव ने रलावता की अनुबंध पर नियुक्ति करवाई थी, ताकि नगर निगम का कामकाज चलता रहे। यादव की सिफारिश में कोई राजनीति नहीं थी, लेकिन सत्तारुढ़ पार्टी के अनेक नेताओं को रलावता की पुनर्नियुक्ति रास नहीं आई। इसके पीछे रलावता के बड़े भाई और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता महेन्द्र सिंह रलावता से राजनीति खींचतान होना रहा। कई कांग्रेसी नेता नहीं चाहते थे कि महेन्द्र सिंह रलावता के भाई गजेन्द्र सिंह रलावता रिटायरमेट के बाद निगम में जमे रहे।

महेन्द्र सिंह रलावता को सचिन पायलट का समर्थक माना जाता है। यही वजह रही कि कांग्रेसियों को गजेन्द्र सिंह रलावता को हटवाने में सफलता मिल गई। लेकिन सवाल उठता है कि अब नगर निगम का काम कैसे चलेगा? उपायुक्त के दोनों पद रिक्त पड़े हैं। आयुक्त खुशाल यादव ने आरएएस देविका तोमर को अस्थायी तौर पर उपायुक्त का चार्ज दिलवा रखा है। तोमर के पास पहले ही दो महत्वपूर्ण पदों का चार्ज है। तीसरे पद के चार्ज में उन्हें पहले ही कठिनाई आ रही है। निगम में स्वास्थ्य अधिकारी जैसे महत्वपूर्ण पर भी खाली पड़े हैं। यही हाल राजस्व अधिकारियों का का है।

आयुक्त यादव जैसे तैसे रलावता से काम चला रहे थे, लेकिन अब रलावता भी राजनीति की भेंट चढ़ गए हैं। निगम के माध्यम से ही इन दिनों राष्ट्रीय स्वच्छता सर्वेक्षण अभियान भी चल रहा है। जनगणना 2020 भी चल रही है। इतना ही नहीं फरवरी में निगम के 80 वार्डों के चुनाव होने हैं। वार्ड चुनाव के प्रशिक्षण का काम भी शुरू हो रहा है। स्मार्ट सिटी के कामों की नोडल एजेंसी भी नगर निगम ही है। इतनी जिम्मेदारियां होने के बाद भी उपायुक्त के दोनों पद रिक्त पड़े हैं। अच्छा हो कि कांग्रेस के नेता रिक्त पदों को भरवाने में ताकत लगाएं।

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