योगी संवाद से साध रहे हैं ट्रिपल इंजन सरकार का लक्ष्य

मुख्यमंत्री संवाद से साध रहे हैं ट्रिपल इंजन की सरकार का लक्ष्य। नगर निकायों के चुनावों में प्रबुद्ध सम्मेलन को योगी ने बनया सबसे प्रभावी हथियार। बातचीत के साथ विकास योजनाओं की सौगात भी।

लखनऊ। नगर निकाय के चुनावों के लिए पिछले दिनों आरक्षण की घोषणा हो चुकी है। शीघ्र ही इस बाबत अधिसूचना भी जारी हो जाएगी। केंद्र एवं प्रदेश की तरह नगर निकायों में भी भाजपा की सरकार हो यह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा है। वह नगर निकायों को सरकार का तीसरा इंजन मानते हैं। उनके मुताबिक अगर तीसरा इंजन भी अपना हो तो विकास की गति और तेज हो जाएगी। तेज विकास गति उत्तर प्रदेश की जरूरत है। चूंकि शहर ही मौजूदा समय में विकास की धुरी हैं। लिहाजा इनका विकास जरूरी है। इसीलिए आज कल वह लगातार ट्रिपल इंजन सरकार की बात कर रहे हैं। मालूम हो कि उत्तर प्रदेश में 17 नगर निगम करीब 200 नगर पालिका परिषद और 500 नगर पंचायतें हैं। सरकार का इरादा इस बार क्लीन स्वीप का है। खासकर 17 नगर निगमों पर। नगर निकाय के पिछले (2017) चुनावों में अलीगढ़ एवं मेरठ को छोड़ बाकी सभी नगर निगम के चुनाव भाजपा के पक्ष में आये थे।


चूंकि इस बार इरादा क्लीनस्वीप का है। लिहाजा सरकार और संगठन ने पूरी ताकत इन चुनावों में झोंक दी है। मुख्यमंत्री ने इसके लिए संवाद को अपना मुख्य हथियार बनाया है। बतौर मूख्यमंत्री संवाद लोगों से जुड़ने और समस्यायों के समाधान का सबसे बड़ा जरिया है। किसी समस्या के गंभीर होने से पहले अगर उसपर संबंधित लोगों से संवाद हो जाय तो वह समस्या हल हो सकती है। वह इस बात को कई बार सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं। यह उनके खुद का आजमाया हुआ बेहद सफल नुस्खा है। लिहाजा नगर निकाय के चुनावों में भी वह इसे आजमा रहे हैं। प्रबुद्धजन सम्मेलन इसीकी एक कड़ी हैं। इस क्रम में अब तक मुख्यमंत्री सहारनपुर,, गाजियाबाद, झांसी, प्रयागराज, अलीगढ़, आगरा, फिरोजाबाद, मेरठ, मुरादाबाद, गोरखपुर लखनऊ में प्रबुद्ध सम्मेलन कर चुके हैं। आज सहारनपुर में कर रहे हैं। वह जहा भी जा रहे लोगों से संवाद के साथ विकास की भी सौगात भी दे रहे हैं। इन चुनावों में सड़क, बिजली, पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं ही प्रमुख मुद्दा होती हैं। यही वजह है कि नगरीय सुविधाओं में इजाफा करने के लिए सरकार भरपूर धन भी उपलब्ध करा रही है। 33 हजार 700 करोड़ रुपये के अनुपूरक बजट में नई योजनाओं पर 14 हजार करोड़ रुपए खर्च का प्रावधान है। इसमें से अधिकांश रकम सड़क निर्माण और नागरिक सुविधाओं को बेहतर करने में खर्च होगी।

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