तीन साल की उम्र में पिता से दूरी, संघर्षों से भरा बचपन, राजनीतिक परिवार से जुड़ाव, कारोबार की दुनिया में अलग पहचान और फिर महज 38 साल की उम्र में जिंदगी का अचानक थम जाना। प्रतीक यादव की कहानी सिर्फ एक राजनीतिक परिवार के सदस्य की नहीं, बल्कि रिश्तों, चुनौतियों, सफलता और अधूरे सपनों की कहानी भी है, जिसने कई मोड़ देखे लेकिन मंजिल तक पहुंचने से पहले ही रुक गई। तीन साल की उम्र में पिता ने छोड़ा, फिर बनी एक अलग पहचान…..
राजू यादव
लखनऊ। 13 मई 2026 की सुबह लखनऊ से आई एक खबर ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों को स्तब्ध कर दिया। 38 वर्षीय प्रतीक यादव को अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। दो बेटियों के पिता प्रतीक यादव का जीवन केवल एक राजनीतिक परिवार की पहचान तक सीमित नहीं था, बल्कि संघर्ष, रिश्तों, महत्वाकांक्षा और निजी फैसलों से भरी एक लंबी कहानी भी था।
बचपन: जब दुनिया सिर्फ मां तक सिमट गई
प्रतीक यादव का बचपन आसान नहीं था। उनकी मां साधना गुप्ता पेशे से नर्स थीं। पारिवारिक परिस्थितियों के चलते कम उम्र में ही उन्हें पिता से अलगाव का सामना करना पड़ा। इसके बाद उनकी परवरिश मुख्य रूप से मां के संरक्षण में हुई। कहा जाता है कि जीवन के शुरुआती संघर्षों ने ही उनके भीतर आत्मनिर्भरता और अलग पहचान बनाने की इच्छा पैदा की।
प्रतीक यादव के निधन के बाद यादव परिवार से जुड़ी एक बड़ी और चौंकाने वाली चर्चा हो रही है। कहा जा रहा है कि प्रतीक यादव ने अपनी पूरी संपत्ति को लेकर पहले ही एक वसीयत तैयार करवा ली थी, जिसमें सारी संपत्ति अपनी दोनों बेटियों के नाम कर दी गई है। सबसे ज्यादा हैरानी की बात यह बताई जा रही है कि इस कथित वसीयत में उनकी पत्नी अपर्णा यादव के नाम किसी भी तरह की संपत्ति का जिक्र नहीं किया गया है। यही वजह है कि इस खबर ने राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक नई बहस छेड़ दी है। लोग यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर ऐसी क्या परिस्थितियां बनीं कि प्रतीक यादव ने इतना बड़ा फैसला लिया. खास बात यह भी है कि इस कथित वसीयत में बेटियों की उम्र को लेकर भी शर्तें रखी गई हैं, जिनके तहत एक निश्चित उम्र के बाद ही संपत्ति बेचने या उसके पूरे अधिकार मिलने की बात कही गई है।
एक घटना जिसने बदल दी जिंदगी
राजनीतिक गलियारों में अक्सर चर्चा होती रही कि एक चिकित्सकीय घटना ने साधना गुप्ता और मुलायम सिंह यादव को करीब लाने में भूमिका निभाई। बाद के वर्षों में दोनों के संबंध सार्वजनिक हुए और वर्ष 2007 में मुलायम सिंह यादव ने एक शपथपत्र के जरिए साधना गुप्ता को अपनी पत्नी तथा प्रतीक को अपना पुत्र स्वीकार किया।
राजनीति से दूरी, कारोबार से पहचान
राजनीतिक परिवार से जुड़े होने के बावजूद प्रतीक यादव ने राजनीति की राह नहीं चुनी। उन्होंने लखनऊ में शिक्षा प्राप्त की और आगे उच्च शिक्षा के लिए ब्रिटेन गए, जहां से एमबीए किया। वापस लौटने के बाद उन्होंने व्यवसाय की दुनिया में कदम रखा। वर्ष 2012 के बाद उन्होंने रियल एस्टेट क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाई। विभिन्न कंपनियों के जरिए उन्होंने अपने व्यवसाय का विस्तार किया और राजनीतिक पहचान से अलग अपनी स्वतंत्र छवि बनाने की कोशिश की।
दोस्ती से प्यार तक की कहानी
प्रतीक यादव और अपर्णा बिष्ट की मुलाकात एक सामाजिक कार्यक्रम के दौरान हुई थी। समय के साथ दोस्ती गहरी हुई और कई वर्षों बाद यह रिश्ता विवाह तक पहुंचा। उनकी शादी उस समय काफी चर्चित रही।2011 में सैफ़ई में शाही शादी हुई अमिताभ बच्चन बच्चन,जया बच्चन ओर अनिल कपूर जैसे कई बड़े राजनीतिक और फिल्मी चेहरे शामिल हुए थे।
फिटनेस का जुनून और लग्जरी लाइफस्टाइल
प्रतीक यादव फिटनेस के प्रति काफी गंभीर माने जाते थे। बताया जाता है कि एक समय उनका वजन काफी बढ़ गया था, जिसके बाद उन्होंने खुद को पूरी तरह बदलने का फैसला किया। एक समय ऐसा भी आया जब प्रतीक यादव का वजन बढ़कर लगभग 103 किलो तक पहुंच गया था। जब मुलायम सिंह यादव की नजर इस पर पड़ी, तो उन्होंने बेटे के सामने एक दिलचस्प चुनौती रखी। उन्होंने कहा कि अगर वजन कम करोगे तो बड़ा इनाम मिलेगा। प्रतीक ने इस चुनौती को गंभीरता से लिया और अपनी मेहनत, अनुशासन और फिटनेस के प्रति समर्पण से करीब 36 किलो वजन घटा लिया। इसके बाद फिटनेस उनके जीवन का अहम हिस्सा बन गई। जिम और बॉडी फिटनेस के प्रति उनका लगाव इतना बढ़ा कि उन्होंने लखनऊ के गोमती नगर क्षेत्र में अपना जिम भी शुरू किया, जहां फिटनेस को उन्होंने केवल शौक नहीं बल्कि जीवनशैली बना लिया।

आखिरी सोशल मीडिया पोस्ट और तबीयत बिगड़ने की खबरें
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अप्रैल 2026 के अंत में उनकी तबीयत बिगड़ने की खबर सामने आई थी। इसके बाद उनका इलाज चला। रिपोर्टों में दावा किया गया कि उन्हें पल्मोनरी एम्बोलिज्म (फेफड़ों की धमनियों में रक्त के थक्के से जुड़ी स्थिति) जैसी गंभीर समस्या का सामना करना पड़ा था। हालांकि चिकित्सा संबंधी विस्तृत निष्कर्षों और कारणों पर आधिकारिक दस्तावेजों तथा विशेषज्ञों की राय को ही अंतिम आधार माना जाता है।
दिसंबर 2016 में प्रतीक यादव ने अपनी लग्जरी लाइफस्टाइल को लेकर भी सुर्खियां बटोरीं, जब उन्होंने करीब 5 करोड़ 23 लाख रुपये की Lamborghini Huracán खरीदी। उस समय यह चर्चा का विषय बन गई थी क्योंकि उन्हें उत्तर प्रदेश के उन शुरुआती लोगों में गिना गया, जिनके पास इतनी प्रीमियम और हाई-परफॉर्मेंस सुपरकार मौजूद थी। तेज रफ्तार गाड़ियों और आधुनिक जीवनशैली के प्रति उनका विशेष लगाव अक्सर चर्चा में रहता था। महंगी गाड़ियों और फिटनेस के प्रति उनके शौक की चर्चा अक्सर होती रही।
3 अप्रैल 2026 को प्रतीक यादव ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा किया था, जो बाद में उनका आखिरी सार्वजनिक संदेश साबित हुआ। उन्होंने लिखा था, “इंजन दहाड़ उठा, आसमान ने रास्ता दिया और मैंने पूरी तरह कंट्रोल अपने हाथ में ले लिया।” यह पंक्तियां उनके आत्मविश्वास, जुनून और जीवन को अपने तरीके से जीने की सोच को दर्शाती थीं। उस समय यह एक सामान्य पोस्ट की तरह दिखाई दिया, लेकिन बाद में लोगों ने इसे उनकी जिंदगी के आखिरी सार्वजनिक संदेश के रूप में देखा।
प्रतीक यादव का जीवन किसी अधूरी फिल्म की कहानी जैसा दिखाई देता है, जिसमें संघर्ष, रिश्ते, सफलता और भावनाओं के कई पड़ाव शामिल थे। तीन साल की उम्र में पिता से दूरी का सामना किया, फिर युवावस्था में मुलायम सिंह यादव ने सार्वजनिक रूप से उन्हें अपना पुत्र स्वीकार किया और पारिवारिक अधिकार भी दिए। आगे चलकर उन्होंने ब्रिटेन से एमबीए किया, कम उम्र में व्यवसाय की दुनिया में कदम रखा, और वर्षों की दोस्ती के बाद प्यार को विवाह तक पहुंचाया। जिंदगी ने उन्हें पहचान, परिवार, सफलता और सपनों की दुनिया दी, लेकिन उनकी कहानी अचानक ऐसे मोड़ पर आकर थम गई, जहां कई अध्याय अभी लिखे जाने बाकी थे।
प्रतीक यादव के जीवन में खुशियां और उपलब्धियां जितनी तेजी से आईं, निजी जीवन में उतार-चढ़ाव भी उतने ही सामने आए। जनवरी 2026 में उनके और उनकी पत्नी Aparna Yadav के रिश्तों को लेकर सार्वजनिक चर्चा तेज हो गई थी। उस दौरान सोशल मीडिया पर साझा की गई कुछ पोस्टों में वैवाहिक संबंधों को लेकर गंभीर मतभेद और मानसिक तनाव का जिक्र सामने आया था। हालांकि उस समय परिवार की ओर से यह भी कहा गया कि अकाउंट हैक होने की आशंका थी। इसके कुछ दिनों बाद प्रतीक ने पुरानी पोस्ट हटा दीं और अपर्णा के साथ एक नया वीडियो तथा संदेश साझा कर स्पष्ट किया कि दोनों के बीच का विवाद सुलझ चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक व्यस्तताओं के कारण समय की कमी रहती है, लेकिन परिवार में सब ठीक है। अपने संदेश में उन्होंने एक भावनात्मक बात लिखी थी— “हम चैंपियंस का परिवार हैं।”
किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए
विशेषज्ञों के अनुसार यदि इनमें से कोई लक्षण दिखाई दें तो तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी हो सकता है—
- अचानक सांस फूलना
- सीने में तेज दर्द
- एक पैर में सूजन या दर्द
- खांसी में खून आना
- चक्कर या कमजोरी महसूस होना
एक अधूरी कहानी
प्रतीक यादव का जीवन कई उतार-चढ़ावों से भरा रहा। बचपन के संघर्ष, राजनीतिक परिवार से जुड़ाव, व्यवसाय की दुनिया में अपनी पहचान बनाने की कोशिश और निजी जीवन के कई अहम पड़ाव—इन सबके बीच उनकी कहानी अचानक रुक गई। प्रतीक यादव की जिंदगी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं मानी जाती। बचपन में ही पिता से अलगाव के बाद उनकी दुनिया अपनी मां साधना गुप्ता तक सीमित हो गई थी। साधना पेशे से नर्स थीं और एक घटना ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी। बताया जाता है कि जब मुलायम सिंह यादव की मां मूर्ति देवी की तबीयत खराब हुई थी, तब साधना ने सतर्कता दिखाते हुए एक चिकित्सकीय गलती को रोकने में अहम भूमिका निभाई। समय के साथ दोनों के बीच संबंध बने और वर्ष 2007 में विवाह हुआ। उसी वर्ष मुलायम सिंह यादव ने एक शपथपत्र के जरिए साधना गुप्ता को अपनी पत्नी और प्रतीक को अपना पुत्र स्वीकार किया। हालांकि राजनीतिक परिवार से जुड़े होने के बावजूद प्रतीक ने राजनीति की राह से दूरी बनाए रखी और अपनी अलग पहचान बनाने का रास्ता चुना। उनके जीवन को देखने वाले लोग इसे एक ऐसी कहानी मानते हैं, जिसमें कई अध्याय पूरे हुए, लेकिन आखिरी अध्याय शायद अभी बाकी था।



