राम मंदिर चढ़ावा चोरी: ट्रस्ट के हर वित्तीय लेनदेन की गहनता से होगी जांच, बड़े पैमाने पर हेरफेर की आशंका। मंदिर से चोरी सिर्फ धन की नहीं होती, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था भी लूट ली जाती है। जब भगवान के चरणों में श्रद्धा से चढ़ाया गया दान ही सुरक्षित न रहे, तो सवाल केवल सुरक्षा का नहीं, बल्कि विश्वास का भी बन जाता है। आखिर क्यों बार-बार मंदिर अपराधियों के निशाने पर हैं? इस वीडियो में जानिये- राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में अभी तक किस आरोपी के पास कितना कथित माल बरामद हुआ।
अयोध्या। भारत की सांस्कृतिक पहचान केवल उसके इतिहास, भाषाओं और परंपराओं से नहीं बनती, बल्कि उन आस्था-स्थलों से भी निर्मित होती है जिन्होंने सदियों से समाज को नैतिकता, सहअस्तित्व और सामुदायिक एकता का संदेश दिया है। मंदिर केवल पूजा-अर्चना के स्थान नहीं हैं; वे विश्वास, संस्कृति, लोकजीवन और सामाजिक सहभागिता के जीवंत केंद्र हैं। यहां लोग केवल ईश्वर के दर्शन करने नहीं आते, बल्कि अपने सुख-दुख साझा करने, मन की शांति पाने और जीवन के संघर्षों में आशा का संबल प्राप्त करने आते हैं। यही कारण है कि जब किसी मंदिर में चोरी होती है, तो उसका प्रभाव केवल आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं रहता। यह करोड़ों लोगों की आस्था, सामाजिक विश्वास और सांस्कृतिक चेतना पर सीधा आघात होता है।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में एसआईटी अब ट्रस्ट के पांच साल के ऑडिट का फिर से ऑडिट करेगी। जांच में जेवरातों का ब्योरा भी नहीं मिला है। शुरुआती जांच में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों को देखते हुए हर वित्तीय लेनदेन की बारीकी से तफ्तीश की जाएगी। एसआईटी को कुछ अहम साक्ष्य भी मिले हैं जिससे जांच की जद में ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारी आ सकते हैं। निर्माण कार्यों की भी जांच होगी। यही वजह है कि शासन ने एसआईटी जांच का समय दो सप्ताह बढ़ा दिया है। अब एसआईटी 15 जुलाई को रिपोर्ट शासन को सौंपेगी।
दरअसल, एसआईटी ने प्रारंभिक जांच में आपराधिक पहलू की जांच की है। इसी आधार पर एफआईआर दर्ज कराई गई है। एसआईटी ने खामियों के साथ ही मंदिर की सुरक्षा और गणना प्रक्रिया की लापरवाही को छह महीने पहले भनक लगी थी। सूत्रों के मुताबिक छह महीने पहले चढ़ावे की राशि में गिरावट आने पर सीए ने पदाधिकारियों को जानकारी दी थी। चंपत राय को भी पत्र लिख जांच के लिए कहा गया था लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।
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सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी से जुड़े अधिकारी लगातार अयोध्या में हैं और साक्ष्य जुटा रहे हैं। शुरुआती जांच में बड़े पैमाने पर मिली खामियों को देखते हुए एसआईटी ने पिछले पांच साल में मंदिर ट्रस्ट की ओर से कराए गए ऑडिट की जांच का निर्णय लिया है। इसमें एसआईटी देखेगी कि ऑडिट में कहां खामियां हैं। सूत्रों के मुताबिक अब तक की जांच में एसआईटी को बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों के सुबूत मिले हैं। माना जा रहा है कि इससे अनिल मिश्रा, गोपाल राव व चंपत राय की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। वहीं एसआईटी के तीनों अधिकारी लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी रेंज लखनऊ किरन एस और विशेष वित्त सचिव नील रतन बृहस्पतिवार को बैठक करने के बाद अयोध्या जा सकते हैं।
सूत्रों के मुताबिक ट्रस्ट के लिए सबसे बड़ी मुसीबत दान किए गए जेवरात का ब्योरा देने में होगी क्योंकि ट्रस्ट ने इसका ऑडिट ही नहीं कराया है। ऐसे में ट्रस्ट क्या तर्क देगा, ये समय बताएगा। वहीं, निर्माण कार्य में कमीशन के भी आरोप हैं। इसमें अनिल मिश्रा पर शिकंजा कस सकता है। ऑडिट रिपोर्ट में खामियों की चर्चा पहले भी रही है, लिहाजा विस्तृत रिपोर्ट उसकी और परतें खोलेगी।

अविनाश शुक्ला के कमरे से मिला रामराज्य कोष लिखा संदूक
राम मंदिर चढ़ावा चोरी के आरोपी अविनाश शुक्ला के कौशलपुरी स्थित श्याम साधनालय योग केंद्र में उसके कमरे से रामराज्य कोष लिखा एक संदूक मिला है। उस पर क्यूआर कोड भी लगा है। पुलिस और जांच एजेंसियां अब यह पता लगा रही हैं कि इस संदूक में जमा होने वाला धन कहां से आता था और उसका राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण से कोई संबंध है या नहीं। अभी यह भी स्पष्ट नहीं है कि संदूक से कोई नकदी बरामद हुई या नहीं। पुलिस क्यूआर कोड से लेनदेन की भी पड़ताल कर रही है।
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एक नया खुलासा सामने आया है। वायरल हुई बरामदगी सूची के अनुसार आरोपियों से ₹79.85 लाख नकद के साथ 1121 डॉलर, सोने की चेन, अंगूठी और चांदी के आभूषण भी बरामद किए गए थे। इस मामले ने अब कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर बरामदगी की पूरी सच्चाई क्या है?
अनिल मिश्रा ने टिन्नू पर फोड़ा ठीकरा
सूत्रों के मुताबिक पूछताछ में अनिल मिश्रा ने पूरा ठीकरा टिन्नू यादव पर फोड़ा है। कहा, गणनाकर्मी टिन्नू के इशारे पर काम करते थे। अनिल मिश्रा ने अपनी भूमिका पूरी तरह से नकार दी है। अनिल मिश्रा से ये पूछा गया कि जब मंदिर प्रबंधन में आपका दखल था तो कैसे करोड़ों पार हो गए और आपको भनक तक नहीं लगी। इस पर अनिल मिश्रा ने कहा कि ट्रस्ट ही चोरी पकड़ी। जैसे ही पता चला जांच शुरू कर दी गई और फिर एसआईटी की मांग भी की गई। निगरानी में चूक होने की बात अनिल मिश्रा ने स्वीकारी। अनिल मिश्रा कई सवालों के जवाब नहीं दे पाए। वहीं गोपाल राव के भी जल्द बयान दर्ज किए जा सकते हैं।
टिन्नू ने किया विश्वासघात, सपा नेता को दी थी सूचना : चंपत राय
पुलिस ने जब चंपत राय से पूछताछ की तो उन्होंने कहा कि उनकी चढ़ावा चोरी में कोई भूमिका नहीं है। जानकारी मिलते ही वह सक्रिय हुए और संदिग्धों को पकड़ा। एफआईआर भी कराई.। उन्होंने स्वीकार किया, कोई हेरफेर न हो, इसकी जिम्मेदारी उनकी थी। टिन्नू यादव बहुत पहले से जुड़ा था, उसने गलत किया, इसकी उम्मीद नहीं थी। वहीं उन्होंने एक सपा नेता का भी मामले में जिक्र किया है। पुलिस ने पूछा-रिश्तेदार या जानने वालों को काम पर किस तरह रखा गया? चंपत राय ने कहा, जरूरतमंदों को काम दिया। इसमें केवल मैं ही नहीं, ट्रस्ट के अन्य सदस्यों की भी भूमिका रही। टिन्नू ने एक सपा नेता को मामले की जानकारी दी थी, तभी से मामले ने तूल पकड़ा। वह चोरी पकड़ने के बाद एफआईआर दर्ज करवाने गए थे लेकिन फिर दर्ज नहीं करवाई थी। इसके पीछे की वजह स्पष्ट नहीं बताई। चंपत राय ने कहा कि अयोध्या में उनकी सेवा पूरी हो गई है और वह कलंक लेकर नहीं जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि उनके भरोसे के साथ विश्वासघात हुआ है।
जानिए! राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में किस आरोपी से कितना कथित माल बरामद हुआ?
अविनाश शुक्ला – 20,39,220 रुपए और 1121 अमेरिकी डॉलर (1,06,667.10 रुपए), एक चांदी जैसी धातु, सोने की 2 चेन और एक अंगूठी।
अनुकल्प मिश्रा- 16,82,040 रुपए
लवकुश मिश्रा- 14,25,000रुपए
रमाशंकर मिश्रा- 7,32,170 रुपए
राम शंकर यादव टिन्नू- एक लाख
करुणेश पांडेय – 18,07,063 रुपए
मनीष यादव – 2 लाख रुपए
कुल बरामदगी- 79.85 लाख और 1121 डॉलर
यह विवरण जांच एजेंसियों द्वारा किए गए कथित बरामदगी के दावों पर आधारित है। अंतिम सत्य का निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।
जनकपुर की पीड़ा: “बेटी के ससुराल में हुई चोरी, कैसे न हो दुख?”
नेपाल के पवित्र नगर जनकपुर में भी अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण को लेकर गहरी चिंता और भावनात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। जनकपुर के लोगों का कहना है कि यह केवल एक मंदिर की घटना नहीं, बल्कि उनकी बेटी माता सीता के ससुराल से जुड़ी आस्था का प्रश्न है। सोशल मीडिया पर प्रसारित एक इंटरव्यू में महंत राम तपेश्वर दास ने कहा कि श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण के लिए जनकपुर धाम से श्रद्धा और प्रेम के प्रतीक स्वरूप अनेक बहुमूल्य उपहार भेजे गए थे। शिलान्यास के अवसर पर 5 किलो चांदी की ईंट भी राम मंदिर ट्रस्ट को समर्पित की गई थी। जनकपुर के श्रद्धालुओं का कहना है कि “जिस घर में हमने अपनी बेटी सीता को विदा किया, उसी घर से अगर भगवान श्रीराम के नाम पर चढ़ाए गए उपहार और आस्था की अमानत गायब होने की खबर आए, तो यह हर जनकपुरवासी के लिए गहरे दुख और पीड़ा का विषय है।” नेपाल से लेकर भारत तक करोड़ों रामभक्त अब यही प्रार्थना कर रहे हैं कि भगवान श्रीराम की नगरी में चढ़ाई गई श्रद्धा की हर अमानत सुरक्षित लौटे और सत्य सबके सामने आए।
पुलिस ने मांगी 48 घंटे की कस्टडी रिमांड :
जेल में बंद आरोपी अविनाश शुक्ला को 48 घंटे की कस्टडी में लेकर पूछताछ करने के लिए पुलिस ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण) की अदालत में दायर रिमांड अर्जी पर बृहस्पतिवार को सुनवाई होगी, जहां कोर्ट इस पर फैसला करेगा।
अखिलेश यादव ने कहा कि अब बीजेपी सांसदों को तोड़कर संविधान बदलना चाहती है, पहला नाम मर्यादा का श्री राम हैं दूसरा संविधान है और भारतीय जनता पार्टी दोनों को दगा दे रही है।भाजपा के लोगो को अपना नाम भाजपा की जगह भा च पा कर लेना चाहिए। प्रभु श्री राम इतने दयालु हैं, अगर सीसीटीवी बंद कर दे कुछ देर के लिए तो अपने आप चढ़ावा वापस आ जाएगा।” प्रेम, दया, अपनापन हमारे बीच रहे, हमारे देश की हिन्दुस्तानियत बनी रहे।
चोरी के आरोप में भी पीएम की संलिप्तता क्यों न मानें: आरपी गौतम
कांग्रेस के नव नियुक्त उत्तर प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने आरोप लगाया कि मंदिर से लेकर ट्रस्ट बनाने तक का कार्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हुआ। वह इसका श्रेय लेते हैं। फिर चंदा चोरी में उनकी संलिप्तता क्यों न मानी जाए? वह इसका श्रेय क्यों नहीं ले रहे हैं? मामले को दबाने के लिए छोटे कर्मचारियों को जेल भेजा जा रहा है। उन्होंने चंपत राय की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए।



