Uttar Pradesh

  • उत्तर प्रदेशPhoto of 2027 तक यूपी को बाल श्रम मुक्त बनाने का संकल्प-मुख्यमंत्री

    2027 तक यूपी को बाल श्रम मुक्त बनाने का संकल्प-मुख्यमंत्री

    राजू यादव उत्तर प्रदेश को 2027 तक बाल श्रम मुक्त बनाने के संकल्प के साथ योगी सरकार ने कमर कस…

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  • विशेषPhoto of खतरे में मधुमक्खियां का जीवन..!

    खतरे में मधुमक्खियां का जीवन..!

    खतरे में हैं धरती का सबसे मेहनती सुपर जीव मधुमक्खियां..! सच तो यह है कि एक कीट के रूप में…

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  • राष्ट्रीयPhoto of आरक्षण: पीढ़ीगत विशेषाधिकार या वास्तविक न्याय..?

    आरक्षण: पीढ़ीगत विशेषाधिकार या वास्तविक न्याय..?

    डॉ.सत्यवान सौरभ आरक्षण भारतीय समाज में सदियों से व्याप्त असमानताओं को समाप्त करने और वंचित समुदायों को मुख्यधारा में लाने…

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  • विशेषPhoto of  प्रकृति का सुकुमार कवि सुमित्रानंदन पंत

     प्रकृति का सुकुमार कवि सुमित्रानंदन पंत

    महान साहित्यकार सुमित्रानंदन पंत की जयंती 20 मई पर विशेष… सुमित्रानंदन पंत : प्रकृति का सुकुमार कवि, छायावादी युग का स्तंभ।साहित्य सृजन से लेकर स्वाधीनता आंदोलन के सेनानी, मानवतावादी दृष्टिकोण लोगों के लिए है प्रेरणा पुंज। प्रदीप कुमार वर्मा सुमित्रानंदन पंत आधुनिक हिंदी साहित्य में ‘छायावादी युग’ के श्रेष्ठ कवि थे। सुमित्रानंदन पंत को प्रकृति के उपासक और प्रकृति की सुंदरता का वर्णन करने वाले कवि के रूप में भी जाना जाता है। पंत को ऐसी कविताएँ लिखने की प्रेरणा उनकी अपनी जन्मभूमि उत्तराखंड से ही मिली। जन्म के छह-सात घंटे बाद ही माँ से बिछुड़ जाने के दुख ने पंत को प्रकृति के करीब ला दिया था। पंत ने सात वर्ष की अल्प आयु में ही कविता लिखना शुरू कर दिया था। उनकी कविताओं में प्रकृति का सौन्दर्य चित्रण के साथ-साथ नारी चेतना और ग्रामीण जीवन की विसंगतियों का मार्मिक चित्रण देखने को मिलता हैं। यही वजह है कि सुमित्रानंदन पंत को प्रकृति के सुकुमार कवि के रूप में भी जाना जाता है। यही नहीं पंत जी का साहित्य सज्जन आज भी प्रासंगिक और अनुकरणीय माना जाता है।         सुमित्रानंदन पंत का जन्म उत्तराखंड राज्य बागेश्वर ज़िले के कौसानी में 20 मई 1900 को हुआ था। सुमित्रानंदन पंत के पिता कानाम गंगादत्त पंत और माता का नाम सरस्वती देवी था।  यह विधाता की करनी ही थी कि पंत के जन्म के कुछ घंटो बाद ही उनकी माता का देहांत हो गया। जिसके बाद उनका लालन-पोषण उनकी दादी ने किया। बचपन में उनका नाम गुसाईं दत्त था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा कौसानी गांव से ही शुरू की। लेकिन हाई स्कूल के समय रामकथा के किरदार लक्ष्मण के व्यक्तित्व एवं लक्ष्मण के चरित्र से प्रभावित होकर उन्होंने अपना नाम गुसाई दत्त से बदलकर सुमित्रानंदन पंत रख लिया।   हाई स्कूल के बाद वह वाराणसी आ गए और वहां के जयनारायण हाईस्कूल में शिक्षा प्राप्त की।            इसके बाद सुमित्रानंदन पंत वर्ष 1918 में इलाहबाद चले गए और ‘म्योर कॉलेज’ में बाहवीं कक्षा में दाखिला लिया उस समय पूरे भारत में ब्रिटिश सरकार के खिलाफ स्वतंत्रता आंदोलन चल रहा था। इलाहाबाद में पंत गांधी जी के संपर्क में आए। वर्ष 1921 में महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन से प्रभावित होकर उन्होंने म्योर कॉलेज को छोड़ दिया और आंदोलन में सक्रिय हो गए। इसके बाद वह घर पर रहकर स्वयंपाठी के रूप में हिंदी, संस्कृत, बांग्ला और अंग्रेजी साहित्य का अध्ययन करने लगे। इसके साथ ही सुमित्रानंदन पंत अपने जीवन में कई दार्शनिकों-चिंतकों के संपर्क में आए।  गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर और श्रीअरविंद के प्रति उनकी अगाध आस्था थी। वह अपने समकालीन कवियों सूर्यकांत त्रिपाठी निराला और हरिवंशराय बच्चन से भी प्रभावित हुए।            पंत जी के साहित्य में प्रकृति का प्रमुखता से चित्रण मिलता है। इस संदर्भ में पता चलता है कि उनकी मां के स्वर्गवास के बाद प्रकृति की रमणीयता ने पंत जी के जीवन में माँ की कमी को न केवल पूरा किया, बल्कि अपनी ममता भरी छाँह में पंत जी के व्यक्तित्व का विकास किया। इसी कारण सुमित्रानंदन पंत जीवन-भर प्रकृति के विविध रूपों को प्रकृति के अनेक आयामों को अपनी कविताओं में उतारते रहे। यहां यह भी बताना उचित रहेगा की सत्य, शांति, अहिंसा, दया, क्षमा और करुणा जैसे मानवीय गुणों की चर्चा बौद्ध धर्म-दर्शन में प्रमुख रूप से होती है। इन मानवीय गुणों को पंत जी की कविताओं में भी देखा जा सकता है। …

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  • लाइफ स्टाइलPhoto of मोबाइल और टीवी देखने से बच्चों को कैसे रोकें..?

    मोबाइल और टीवी देखने से बच्चों को कैसे रोकें..?

    विजय गर्ग मोबाइल फोन, टैबलेट और स्मार्ट टीवी के उदय के साथ, कई माता-पिता अपने छोटे बच्चों को स्क्रीन से…

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  • विशेषPhoto of 25 मई को सामूहिक विवाह समारोह

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    सामूहिक विवाह समारोह 25 मई को, सौ से अधिक जोड़े एक साथ लेंगे साथ फेरे। मानव एकता एसोसिएशन व योगी…

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  • लाइफ स्टाइलPhoto of प्रशासन से पॉपुलैरिटी तक: आईएएस अधिकारियों का डिजिटल सफर

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    डॉ.सत्यवान सौरभ आईएएस अधिकारी: ड्यूटी या डिजिटल स्टारडम..? “प्रशासन से पॉपुलैरिटी तक: आईएएस अधिकारियों का डिजिटल सफर” “आईएएस अधिकारी: सोशल…

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  • विशेषPhoto of डॉ.सत्येन्द्र पटेल प्रखर PHD मानद उपाधि से सम्मानित

    डॉ.सत्येन्द्र पटेल प्रखर PHD मानद उपाधि से सम्मानित

    धनंजय सिंह जबलपुर। डॉक्टर सत्येन्द्र पटेल प्रखर जी को आपदा प्रबंधन में उल्लेखनीय योगदान प्रदान करने के लिए दिनांक 10…

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  • विशेषPhoto of राष्ट्रधर्म का सजीव रूप हैं लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर-मुख्यमंत्री

    राष्ट्रधर्म का सजीव रूप हैं लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर-मुख्यमंत्री

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जन्मशती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्हें…

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  • उत्तर प्रदेशPhoto of गर्भवती महिलाओं और बच्चों को मिलेगा पोषण का सुरक्षा कवच

    गर्भवती महिलाओं और बच्चों को मिलेगा पोषण का सुरक्षा कवच

    राजू यादव गर्भवती महिलाओं और बच्चों को मिलेगा पोषण का सुरक्षा कवच, योगी सरकार ने खोला खजाना। आंगनबाड़ी से गांव-गांव…

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