यूट्यूब पर कांग्रेस की डिजिटल ताकत में बड़ा उछाल

यूट्यूब पर कांग्रेस की डिजिटल ताकत में बड़ा उछाल, एक सप्ताह में मिले 6.9 करोड़ व्यूज़; बीजेपी से 3.6 गुना आगे। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर राजनीतिक मुकाबले की नई तस्वीर, राहुल गांधी और कांग्रेस के चैनलों की बढ़ती दर्शक संख्या ने खींचा ध्यान।

डिजिटल और सोशल मीडिया के दौर में राजनीतिक दलों के बीच सियासी मुकाबला अब केवल रैलियों, जनसभाओं और चुनावी प्रचार तक सीमित नहीं रह गया है। यूट्यूब और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म भी राजनीतिक संवाद, जनसंपर्क और जनमत तैयार करने के महत्वपूर्ण माध्यम बनते जा रहे हैं। इसी बीच कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी के आधिकारिक यूट्यूब चैनलों की दर्शक संख्या में आए उछाल ने डिजिटल राजनीति की नई तस्वीर सामने रखी है।

हालिया मीडिया रिपोर्ट्स और डेटा एनालिटिक्स फर्म ‘DataBeings’ के आंकड़ों के मुताबिक, कांग्रेस के आधिकारिक यूट्यूब चैनल, राहुल गांधी के निजी चैनल, इंडियन यूथ कांग्रेस और उत्तर प्रदेश कांग्रेस के चैनलों को मिलाकर एक विशेष सप्ताह में करीब 6.9 करोड़ (69 मिलियन) व्यूज़ दर्ज किए गए। इन आंकड़ों में कांग्रेस का आधिकारिक चैनल सबसे आगे रहा, जबकि राहुल गांधी का निजी चैनल दूसरे स्थान पर रहा। इस आंकड़े की तुलना में बीजेपी और उससे जुड़े प्रमुख चैनलों को इसी अवधि के दौरान करीब 1.92 करोड़ व्यूज़ मिले। इस तरह संबंधित सप्ताह के आंकड़ों के आधार पर कांग्रेस से जुड़े चैनलों की संयुक्त व्यूअरशिप बीजेपी के इन चैनलों से लगभग 3.6 गुना अधिक रही।

डिजिटल राजनीति में कांग्रेस की बढ़ती सक्रियता

कांग्रेस के चैनलों पर बढ़ते व्यूज़ को डिजिटल प्रचार, राजनीतिक मुद्दों की प्रस्तुति और सोशल मीडिया पर पार्टी की सक्रियता के संदर्भ में देखा जा रहा है। राहुल गांधी के भाषणों, राजनीतिक बयानों, जनसभाओं और विभिन्न मुद्दों पर उनकी प्रतिक्रियाओं को डिजिटल दर्शकों के बीच मिल रही पहुंच ने इस चर्चा को और तेज किया है। विशेष रूप से युवा कांग्रेस और प्रदेश कांग्रेस के चैनलों की भागीदारी यह संकेत देती है कि पार्टी का डिजिटल नेटवर्क अलग-अलग स्तरों पर दर्शकों तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रहा है।

लाइफटाइम व्यूज़ और सब्सक्राइबर्स में बीजेपी अब भी मजबूत

हालांकि, किसी एक सप्ताह के व्यूज़ के आधार पर राजनीतिक दलों की संपूर्ण डिजिटल ताकत का आकलन करना उचित नहीं होगा। लाइफटाइम ऑडियंस, कुल सब्सक्राइबर्स और व्यापक डिजिटल उपस्थिति के मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी के आधिकारिक चैनलों की स्थिति अब भी काफी मजबूत बताई जा रही है। इसलिए ताजा आंकड़े एक सीमित अवधि में कांग्रेस की बेहतर डिजिटल पहुंच को जरूर दर्शाते हैं, लेकिन इन्हें पूरे डिजिटल परिदृश्य में स्थायी बढ़त का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

अब डिजिटल प्लेटफॉर्म भी बनेगा सियासी मुकाबले का मैदान

बदलते दौर में राजनीतिक दलों के लिए सोशल मीडिया पर सक्रियता के साथ-साथ दर्शकों का भरोसा, कंटेंट की गुणवत्ता और मुद्दों की प्रभावी प्रस्तुति भी महत्वपूर्ण होती जा रही है। ऐसे में कांग्रेस के 6.9 करोड़ साप्ताहिक व्यूज़ और बीजेपी के 1.92 करोड़ व्यूज़ के बीच का अंतर डिजिटल राजनीति में नई बहस को जन्म दे रहा है।आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस अपनी इस डिजिटल पहुंच को कितनी निरंतरता दे पाती है और बीजेपी अपने व्यापक डिजिटल नेटवर्क के दम पर इस मुकाबले में किस तरह अपनी स्थिति मजबूत करती है।

Related Articles

Back to top button