रुश्दी मियां की खामोशी क्षेत्र में बनी चर्चा का विषय

रुश्दी मियां की खामोशी क्षेत्र में बनी चर्चा का विषय। बड़ी संख्या में उनके समर्थकों में हो रही बेचैनी।पिछले विधान सभा चुनाव में आधा लाख से भी अधिक वोट पाकर अपनी ताकत का कराया था एहसास। रुश्दी मियां की खामोशी क्षेत्र में बनी चर्चा का विषय

अयोध्या/भेलसर। लोक सभा चुनाव के लगभग दो महीने ही बचे हैं ऐसे में भाजपा अपने कार्यकार्ताओं को लगातार कार्यक्रम के जरिये सक्रिय कर रही है।वहीं इंडिया गठबन्धन के प्रत्याशी के रूप में मिल्कीपुर के विधायक अवधेश प्रसाद के नाम का एलान होते ही सपा कार्यकर्ताओं के अलावा इंडिया गठबन्धन में शामिल कांग्रेस कार्यकताओं ने भी गठबन्धन धर्म का पालन करना शुरू कर दिया है।क्षेत्र में जगह जगह भाजपा,सपा तथा कांग्रेस के कार्यकर्ता अपने अपने ढंग से प्रचार कर रहे हैं।वहीं रूदौली विधान सभा क्षेत्र से पिछला चुनाव बसपा के टिकट पर लड़कर तहलका मचाने वाले पूर्व विधायक अब्बास अली जैदी उर्फ रुश्दी मियां की खामोशी क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।रुश्दी मियां रूदौली से दो बार सपा से विधायक रह चुके हैं।2022 में हुए विधान सभा चुनाव में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उन्हें टिकट देकर फिर सपा का प्रत्याशी घोषित किया।रुश्दी मियां ने प्रचार भी शुरू कर दिया।अचानक अखिलेश यादव ने रुश्दी मियां का टिकट होल्ड कर दिया।जब रुश्दी मियां भागकर अखिलेश यादव से मिलने लखनऊ पहुंचे तो बताया जाता है कि अखिलेश यादव ने रुश्दी मियां से मिलने से इनकार कर दिया और वह दूसरे रास्ते से प्रचार करने निकल गये।यह बात अब्बास अली जैदी रुश्दी मियां को काफी नागवार लगी। और उन्होंने रूदौली विधान सभा से सपा को सबक सिखाने की ठान ली। क्षेत्र में जनाधार रखने वाले नेता अब्बास अली जैदी रुश्दी मियां सपा से बगावत करके बसपा से चुनाव लड़ने का एलान कर दिया।बड़ी संख्या में सपा समर्थकों ने भी रुश्दी मियां का खुल कर साथ दिया।

धर्मनगरी अयोध्या हिंदुओं की पावन नगरी है। लेकिन यहां के सियासतदान भी एक से बढ़कर एक रहे हैं। अयोध्या से लगभग 40 किलोमीटर दूर रुदौली विधानसभा पड़ती है,जहाँ माँ कामाख्या का विशाल धाम है। रुदौली विधानसभा में वैसे तो दलित और ओबीसी मतदाता की संख्या ज्यादा है। लेकिन दूसरे नंबर पर सबसे ज्यादा अल्पसंख्यक वोटर हैं। जो अगर एक साथ मिलकर किसी के साथ हो ले तो उसकी जीत पक्की हो जाती है। यहां पिछले तीन चुनाव 2012-17-22 में भाजपा का परचम लहराया है। उससे पहले नवाब खानदान से ताल्लुक रखने वाले अब्बास अली जैदी उर्फ रुश्दी मियां का परचम लहराता था। अब्बास अली जैदी रुदौली विधानसभा से सपा के टिकट पर दो बार विधायक रह चुके हैं। खानदानी तौर पर अब्बास अली जैदी उर्फ रुश्दी मियां मशहूर जमींदार खानदान से ताल्लुक रखते हैं।समाज सेवा इनके खानदानी व्यवहार में शामिल है।

रुश्दी मियां को तो कामयाबी नहीं मिली लेकिन सपा का खेल बिगाड़ कर रख दिया।उस चुनाव में रुश्दी मियां को करीब 50 हजार से भी अधिक मत मिले थे।क्षेत्र में बसपा का जनाधार काफी सिकुड़ गया है लेकिन रुश्दी मियां को जो वोट मिले थे उनमें ज्यादातर उनके ही व्यक्तिगत सम्बन्ध की वजह से उन्हें मिले थे।रुश्दी मियां चुनाव तो जरूर हार गए लेकिन उनकी गिनती जिले के जनाधार नेताओं में होने लगी।अब जबकि लोक सभा चुनाव का समय बहुत कम बचा है ऐसे में रुश्दी मियां द्वारा अभी तक सक्रियता न दिखाना लोगों में चर्चा बना हुआ है।बताया जाता है कि करीब दो महीने पहले रूदौली में एक मोबाइल शॉप के उदघाटन करने आये विधायक अवधेश प्रसाद से उनकी मुलाकात भी हुई और सपा में शामिल होने के लिये अवधेश प्रसाद ने कुछ चर्चा भी की।तभी से यह कयास लगाये जा रहे हैं कि रुश्दी मियां जल्द ही अपने घर की वापसी यानी सपा में शामिल हो सकते हैं।सूत्रों के अनुसार रुश्दी मियां सपा में शामिल होने से पहले 2027 में होने वाले विधान सभा चुनाव में रूदौली से टिकट की गारंटी चाहते हैं।मजबूत आश्वासन न मिलने के कारण मामला लटक गया।रुश्दी मियां के बड़ी संख्या में समर्थक जो पहले सपा में थे काफी असमंजस में नजर आ रहे हैं।अधिकांश समर्थकों का रुझान तो इंडिया गठबन्धन के प्रत्याशी की तरफ है।यदि रुश्दी मियां शीघ्र ही खुल कर अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं करते तो रूदौली विधान सभा मे उनके काफी समर्थक पाला बदल सकते हैं। रुश्दी मियां की खामोशी क्षेत्र में बनी चर्चा का विषय

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