सच में मेरी चिंता मेरे बच्चे हैं…

नरेश दीक्षित

मेरी चिंता मुसलमान नहीं हैं, मेरी चिंता पाकिस्तान भी नहीं है। मेरी चिंता अफगानिस्तान नहीं है और मेरी चिंता तालिबान भी नहीं है। मैं हमेशा यही सोचता हूं कि कहीं मेरे बच्चे, मूर्ख-धार्मिक, दूसरों से नफरत करने वाले, पिछड़ी सोच वाले तो नहीं बन रहे ? मैं कोशिश करता हूं कि मेरे बच्चे, सारी दुनिया के साथ कदम मिलाकर चलने वाले, बुद्धिमान तर्कवान खुले दिमाग के और वैज्ञानिक सोच वाले बनें।मैं खुद हमेशा उदारता, खुले दिल और विज्ञान की बात फैलाता हूं। कहीं मुझे, प्रकारांतर में भी एक भी शब्द जातीय धार्मिक नफरत का बोलते या बताते न सुन सकें। वही बातें सीधे अपने बच्चों को बताता हूं। मैं हमेशा कट्टरता का विरोध करता हूं, नफरत का विरोध करता हूं, जहालत का विरोध करता हूं। मैं बच्चों को बताता हूं कि तुम्हारा हिंदू घर में पैदा होना महज एक इत्तेफाक है। तुम मुसलमान घर में भी पैदा हो सकते थे। तुम्हारा इस जाति में पैदा होना भी एक इत्तेफाक है। तुम दूसरी जाति में भी पैदा हो सकते थे। सच में मेरी चिंता मेरे बच्चे हैं…

तुम्हारा भारत में पैदा होना भी महज एक इत्तेफाक है। तुम पाकिस्तान बांग्लादेश या किसी और देश में भी पैदा हो सकते थे। इसलिए इत्तेफाक से हुई किसी भी चीज पर गर्व मत करो। इत्तेफाक से कहीं और पैदा हुए लोगों से नफरत मत करो। यही वैज्ञानिक सोच है। यही मानवीय सोच है। मैंने धर्म से किनारा नहीं किया। उन्हें रामायण, महाभारत, राम कृष्ण कबीर की किसी हम उम्र बच्चे से अधिक जानकारी है। मगर हर कृत्य और चमत्कार का वैज्ञानिक और दोतरफा विश्लेषण भी है। इसलिए उन्हें रावण की दिव्य ज्ञान और दुर्योधन के राइटफुल क्लेम की जानकारी भी है। उन्हें न्याय की बेसिक समझ है। मैं जो कुछ कर रहा हूं, लिख या कह रहा हूं, वो छ्द्म धर्मनिरपेक्षता के लिए या समाज मे समभाव फैलाने के स्वयम्भू ठेके के तहत नहीं होता। ये मेरा स्वार्थ से भरा, बेहद निजी कारण है, ये मैं अपने बच्चों को, उनके आसपास कभी भी भड़क सकने वाली हिंसा से बचाने के लिए कर रहा हूं। क्योंकि जब तक यह धार्मिक जहालत कट्टरता और मूर्खता रहेगी दुनिया से हिंसा नहीं जाएगी।

मुझे यह भी देखना है कि 69000 शिक्षक भर्ती घोटाले की तरह हमारे बच्चों का भविष्य, उनकी नौकरियां कोई फैजान करीमेंट कंपनी को विधिवत आशीर्वाद देने वाला तथाकथित हिंदूधर्म का रक्षक या इस तरह का मुसलमान छीन ना ले, उनका भविष्य न बर्बाद कर दे! क्योंकि एक लाख 72000 गरीब शिक्षामित्रों का जीवन/भविष्य और उनके बच्चों का सपना सब कुछ यह वाले मुसलमान छीन ही चुके हैं जिन्होंने उन्हें अयोग्य घोषित करके दर-दर मरने को विवश कर दिया और लगभग 10000 शिक्षामित्र बेमौत मारे गए… यह 172000 वही शिक्षामित्र थे जिन्हें समाजवादी पार्टी की सरकार ने समायोजित शिक्षक बनाया था और उन्हें दलितों पिछड़ों गरीबों वंचितों शोषितों आदिवासियों पीड़ितों के दुश्मनों ने बर्बाद कर दिया ? जबकि उनसे काम सहायक शिक्षक का लिया जा रहा है और वेतन एक मजदूर से भी कम दिया जा रहा है और यह सब तथाकथित हिंदुओं की सरकार में हो रहा है। आपको यही साजिश समझने की आवश्यकता है! लेकिन मुझे तो उन्हें सुरक्षित, सानंद बढ़ते हुए देख देख कर बूढ़ा होना है….? सच में मेरी चिंता मेरे बच्चे हैं…

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