बांदा जेल में बड़ा एक्शन! आत्महत्या के बाद जागा प्रशासन

बांदा जेल में हुई आत्महत्या की घटना के बाद कारागार प्रशासन हरकत में आ गया है। सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए जेल में अतिरिक्त स्टाफ की तैनाती की गई है। दो डिप्टी जेलर समेत करीब डेढ़ दर्जन सुरक्षाकर्मियों को तत्काल प्रभाव से बांदा जेल भेजा गया है। सवाल यह है कि आखिर सुरक्षा व्यवस्था में ऐसी कौन-सी चूक हुई, जिसके बाद प्रशासन को यह बड़ा कदम उठाना पड़ा? क्या इस कार्रवाई से जेल की सुरक्षा व्यवस्था में सुधार होगा?

राकेश यादव

लखनऊ। प्रदेश का कारागार विभाग किसी भी घटना के बाद हरकत में आता है। बांदा जेल में बंदी के आत्महत्या की घटना के बाद जागे विभाग ने जेल में सुरक्षाकर्मियों और अधिकारियों की कमी का अहसास हुआ और आनन फानन एक्शन में आए अधिकारियों ने मंडलीय कारागार बांदा में दो डिप्टी जेलर और 15 सुरक्षाकर्मियों को तैनात कर दिया। इन सभी कर्मियों ने प्रभार भी संभाल लिया है। यह मामला विभागीय अधिकारियों में चर्चा का विषय बना हुआ है। चर्चा है कि सिर्फ बांदा जेल में ही नहीं प्रदेश की कई अन्य जेलों में अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों की काफी कमी है।

मिली जानकारी के मुताबिक मंडलीय कारागार बांदा में लंबे समय से स्टाफ की कमी थी। बीते दिनों बांदा के में निरुद्ध बंदी अभिषेक की संदिग्ध हालात में मौत और जेल के भीतर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठे सवाल उठने लगे। इसके बाद विभागीय स्तर पर इस मामले की व्यापक समीक्षा की गई। इसके बाद स्थानांतरण सूची जारी करते हुए 15 जेलकर्मियों को अन्य जनपदों में भेजा गया। स्थानांतरण के तहत मंडल कारागार से सात हेड जेल वार्डरों को फतेहगढ़ केंद्रीय कारागार, उन्नाव, चित्रकूट, महोबा और फतेहपुर समेत विभिन्न जेलों में भेजा गया है।

श्रावस्ती जिला जेल में तैनात डिप्टी जेलर रेखा व महाराजगंज से रत्ना सिंह को बांदा मंडल कारागार में नई तैनाती मिली है। इसके साथ ही सीतापुर जेल से स्थानांतरित जेलर संतोष रावत ने भी सोमवार को बांदा जेल में अपना कार्यभार संभाल लिया। सूत्रों का कहना है घटना के बाद ही जेल प्रशासन जागता है। यह परिवर्तन इस सच को प्रमाणित भी करता है। इससे पूर्व कन्नौज जेल से दिन बंदियों की फ़रारीबकी घटना के बाद भी जेल में बंदियों के अनुपात में सुरक्षाकर्मियों की संख्या का होने का मामला प्रकाश में आया था। उधर शासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बांदा जेल में दो डिप्टी जेलर और सुरक्षाकर्मियों की संख्या में बढ़ोत्तरी किए जाने की पुष्टि की है।

बंदियों को अतिरिक्त सुविधा देने पर हटाए गए थे जेलर

प्रदेश की मंडलीय कारागार बांदा पिछले काफी दिनों से सुर्खियों में बनी हुई है। सूत्रों का कहना है कि विगत वर्ष बांदा जेल पर अस्थाई ड्यूटी पर लगाए गए जेलर वीरेंद्र कुमार वर्मा पर जेल में बंदियों को सुविधा शुल्क लेकर अतिरिक्त सुविधाएं उपलब्ध कराए जाने का आरोप लगा था। मामले की जांच परिक्षेत्र के डीआईजी को सौंपी गई। जांच में पुष्टि होने पर जेलर को निलंबित कर दिया गया था। लंबे समय तक निलंबित रहने वाले जेलर को बहाल करके एटा भेजा गया। जहां अधीक्षक से तकरार होने के बाद पहले उन्हें नारी बंदी निकेतन और उसके बाद उनकी अस्थाई ड्यूटी प्रतापगढ़ में लगा दी गई। स्थानांतरण सत्र में इन्हें मोटी रकम लेकर इसी जेल पर समायोजित भी कर दिया गया।

Related Articles

Back to top button