उच्च शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक भूमिका निभा रहा महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय

मुख्यमंत्री ने जनपद गोरखपुर में महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के पंचम स्थापना दिवस तथा सप्त दिवसीय व्याख्यान माला के समापन समारोह को सम्बोधित किया।

विश्वविद्यालय में अच्छा कार्य करने वाले शिक्षकों, कर्मचारियों और व्याख्यान माला के विभिन्न कार्यक्रमों में विजयी प्रतिभागियों को पुरस्कार प्रदान किए।

विश्वविद्यालय की शिक्षिका द्वारा लिखित पुस्तकों का विमोचन किया ,महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय अपने संस्थापकों की दूरदृष्टि और संकल्पों को साकार करते हुए ज्ञान, चिकित्सा, कृषि, कौशल, शोध और नवाचार का एकीकृत केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा

विश्वविद्यालय की प्रयोगशालाओं और कक्षाओं में पैदा होने वाला ज्ञान समाज, किसान, मरीज, उद्योग और युवा उद्यमी तक पहुंचे, तभी शिक्षा की सार्थकता।

रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का पर्व नहीं, बल्कि भारतीय परम्परा में गुरु-शिष्य तथा पुरोहित-यजमान के बीच श्रद्धा, विश्वास और आत्मीय सम्बन्धों का भी प्रतीक।

आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत की आधारशिला ज्ञान, कौशल, विज्ञान, तकनीक और युवा शक्ति के समन्वय से ही मजबूत होगी।

ज्ञान, चिकित्सा, कृषि और कौशल जैसे क्षेत्रों को एक साथ जोड़कर विश्वविद्यालय ने अपनी भूमिका को व्यापक बनाया।

वर्ष 1932 में युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज ने गोरखपुर में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना कर शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐसे बीज का रोपण किया, जो विशाल वटवृक्ष का रूप ले चुका।

आज सड़क मार्ग पर अनेक पुलों और बेहतर सड़कों के माध्यम से गोरखपुर की कनेक्टिविटी मजबूत हुई, रेल कनेक्टिविटी भी बेहतर हुई।

महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज ने शिक्षा को समाज परिवर्तन का सबसे सशक्त माध्यम माना, गोरखपुर और पूर्वी उ0प्र0 में ऐसी संस्थाओं की स्थापना की, जिन्होंने आने वाली पीढ़ियों को शिक्षा और कौशल के अवसर उपलब्ध कराए।

महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद आज 50 से अधिक शिक्षण, प्रशिक्षण संस्थाओं और विभिन्न सेवा प्रकल्पों के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य और सेवा के क्षेत्र में कार्य कर रही।

ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज और राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवैद्यनाथ जी महाराज ने शिक्षा को समाज की आवश्यकताओं के साथ जोड़कर आगे बढ़ाने का कार्य किया।

साप्ताहिक व्याख्यान माला में समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े महानुभावों को आमंत्रित कर उनके अनुभव और विचार विद्यार्थियों तक पहुंचाना विश्वविद्यालय की सकारात्मक पहल परम्परागत ज्ञान को केवल पुस्तकों और परम्पराओं तक सीमित नहीं रखा जा सकता, उसे वैज्ञानिक शोध और प्रयोगशालाओं से जोड़कर नई पीढ़ी के साथ साझा करना होगा।

भारतीय चिकित्सा ज्ञान का वैज्ञानिक प्रमाणीकरण और गुणवत्ता मानकों के अनुरूप विकास कर इसे वैश्विक स्तर तक पहुंचाया जा सकता।

जब विभिन्न विधाएं एक साथ काम करेंगी तो बेहतर पेशेवरों के साथ नए शोध, नए नवाचार, नए स्टार्टअप और नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

प्रौद्योगिकी का वास्तविक उद्देश्य केवल मशीनों को आधुनिक बनाना नहीं, बल्कि मानव जीवन की समस्याओं का सरल और प्रभावी समाधान उपलब्ध कराना।

सटीक कृषि के माध्यम से सीमित संसाधनों का अधिकतम और वैज्ञानिक उपयोग करते हुए बेहतर उत्पादन और गुणवत्ता हासिल की जा सकती।

विद्यार्थी केवल परीक्षा पास करने के लिए अध्ययन न करें, वे वास्तविक जीवन की समस्याओं को समझें और उनके समाधान निकालने का प्रयास करें।

प्रदेश में डबल इंजन सरकार शिक्षा और कौशल से लेकर आधारभूत ढांचे, निवेश, स्टार्टअप, एम0एस0एम0ई0 और उद्योग तक एक व्यापक पारिस्थितिकी तंत्र तैयार कर रही।

शिक्षा की यात्रा केवल डिग्री तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, यह यात्रा ‘शिक्षा से कौशल, कौशल से क्षमता, क्षमता से अवसर, अवसर से नवाचार, नवाचार से उद्यमिता, उद्यमिता से रोजगार और रोजगार से आर्थिक विकास’ तक पहुंचनी चाहिए।

प्रदेश के विकास के लिए सरकार, विश्वविद्यालय, उद्योग और युवा की साझेदारी आवश्यक सरकार ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करेगी, जहां शिक्षा, निवेश, शोध, स्टार्ट-अप और रोजगार के अवसर पैदा हों।

विकसित भारत की संकल्पना केवल सरकार के प्रयासों से पूरी नहीं होगी, इसे विश्वविद्यालयों, शिक्षण संस्थाओं, शोध केंद्रों, उद्योगों और युवाओं के सामूहिक प्रयास से साकार किया जाएगा।


गोरखपुर/लखनऊ। आज जनपद गोरखपुर में महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के पंचम स्थापना दिवस तथा सप्त दिवसीय व्याख्यान माला के समापन अवसर पर आयोजित भव्य समारोह को मुख्यमंत्री सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने विश्वविद्यालय में अच्छा कार्य करने वाले शिक्षकों, कर्मचारियों और व्याख्यान माला के विभिन्न कार्यक्रमों में विजयी प्रतिभागियों को पुरस्कार प्रदान किए। उन्होंने विश्वविद्यालय की शिक्षिका प्रो0 अनुकीर्ति राज द्वारा लिखित पुस्तकों ‘नेशन एण्ड एक्सप्रेशन’ तथा ‘अमृतकाल और राष्ट्रवाद’ का विमोचन किया।  महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय अपने संस्थापकों की दूरदृष्टि और संकल्पों को साकार करते हुए ज्ञान, चिकित्सा, कृषि, कौशल, शोध और नवाचार का एकीकृत केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। विश्वविद्यालय को केवल डिग्री प्रदान करने वाली संस्था के रूप में नहीं, बल्कि समाज की वास्तविक आवश्यकताओं का समाधान देने वाले ज्ञान एवं नवाचार के केंद्र के रूप में स्वयं को स्थापित करना होगा। विश्वविद्यालय की प्रयोगशालाओं और कक्षाओं में पैदा होने वाला ज्ञान समाज, किसान, मरीज, उद्योग और युवा उद्यमी तक पहुंचे, तभी शिक्षा की सार्थकता सिद्ध होगी।

आज रक्षाबंधन का पावन पर्व भी है। रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का पर्व नहीं, बल्कि भारतीय परम्परा में गुरु-शिष्य तथा पुरोहित-यजमान के बीच श्रद्धा, विश्वास और आत्मीय सम्बन्धों का भी प्रतीक है। ऐसे पवित्र अवसर पर महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के पंचम स्थापना दिवस का समारोह आयोजित होना विशेष महत्व रखता है। उन्होंने इस अवसर पर प्रदेशवासियों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देते हुए महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय और महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद से संबद्ध सभी संस्थाओं को स्थापना दिवस की हार्दिक बधाई दी।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि यह अवसर श्रद्धा को विश्वास, विश्वास को आत्मनिर्भरता और आत्मनिर्भरता को विकास की श्रृंखला से जोड़ने के नए संकल्प का अवसर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पंच प्रण के संकल्प को साकार करने की दिशा में ऐसे विश्वविद्यालय महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत की आधारशिला ज्ञान, कौशल, विज्ञान, तकनीक और युवा शक्ति के समन्वय से ही मजबूत होगी।


महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय का शुभारम्भ आज से ठीक 05 वर्ष पूर्व तत्कालीन राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद के कर-कमलों से हुआ था। हालांकि विश्वविद्यालय की स्थापना की आधारभूत प्रक्रिया और इसके पीछे का संकल्प इससे काफी पहले शुरू हो चुका था। लगभग 12 वर्ष पहले इसकी नींव रखी गई थी और विभिन्न औपचारिकताओं को पूरा करते हुए पूर्वी उत्तर प्रदेश की उच्च शिक्षा की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए इस विश्वविद्यालय ने मूर्त रूप लिया। पांच वर्षों की अल्प अवधि में विश्वविद्यालय ने जिस प्रकार अपने शैक्षिक एवं संस्थागत विस्तार को आगे बढ़ाया है, वह सराहनीय है। विश्वविद्यालय ने प्रारम्भ में 03 विधाओं के साथ अपनी यात्रा शुरू की थी और आज लगभग 53 विषयों एवं पाठ्यक्रमों के माध्यम से शिक्षा प्रदान कर रहा है। ज्ञान, चिकित्सा, कृषि और कौशल जैसे क्षेत्रों को एक साथ जोड़कर विश्वविद्यालय ने अपनी भूमिका को व्यापक बनाया है।

उच्च शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक भूमिका निभा रहा महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय


विश्वविद्यालय की यह प्रगति इस बात का संकेत है कि संस्थापकों द्वारा देखा गया सपना सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। अब आवश्यकता है कि अगले चरण में विश्वविद्यालय शोध, नवाचार, स्टार्ट-अप, उद्योग सहभागिता और रोजगार सृजन को भी अपनी गतिविधियों का अभिन्न हिस्सा बनाए। महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय की वर्तमान उपलब्धियों को समझने के लिए इसके पीछे की उस ऐतिहासिक सोच को समझना आवश्यक है, जिसने पूर्वी उत्तर प्रदेश में शिक्षा की अलख जगाई। जब देश गुलामी की जंजीरों में जकड़ा हुआ था और भारत अपनी स्वतंत्रता की ओर बढ़ रहा था, उस समय देश में एक ओर क्रान्तिकारी आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने को तैयार थे, वहीं समाज के एक हिस्से में यह निराशा भी थी कि शायद गुलामी हमारी नियति बन चुकी है। इसी दौर में गोरक्षपीठ में एक नई चेतना और विश्वास का संचार हो रहा था।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि उस समय संस्थापकों के मन में विश्वास था कि भारत को स्वतंत्र होने से कोई रोक नहीं सकता, लेकिन इसके साथ एक बड़ा प्रश्न भी था कि स्वतंत्र भारत को कैसी पीढ़ी तथा युवा चाहिए। ऐसी पीढ़ी के निर्माण के लिए किस प्रकार की शिक्षण संस्थाओं की आवश्यकता होगी। इसी चिन्तन के साथ यह संकल्प लिया गया कि केवल सरकार पर निर्भर रहने अथवा दूसरों को दोष देने के बजाय शुरुआत स्वयं से की जानी चाहिए। इसी विचार के साथ वर्ष 1932 में युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज ने गोरखपुर में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना की और शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐसे बीज का रोपण किया, जो आज विशाल वटवृक्ष का रूप ले चुका है।


आज गोरखपुर से लखनऊ की यात्रा लगभग 03 घंटे में पूरी हो जाती है। सड़क मार्ग पर अनेक पुलों और बेहतर सड़कों के माध्यम से गोरखपुर की कनेक्टिविटी मजबूत हुई है। रेल कनेक्टिविटी भी बेहतर हुई है। आज व्यक्ति सुबह लखनऊ जाकर अपना कार्य कर सकता है और रात तक वापस गोरखपुर लौट सकता है। जिस समय महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना हुई थी, उस समय परिस्थितियां पूरी तरह अलग थीं। गोरखपुर की लखनऊ से सीधी और सुविधाजनक कनेक्टिविटी नहीं थी। सिंगल लेन सड़क तक की सुविधा नहीं थी। राजघाट में दिखाई देने वाला पुल भी स्वतंत्रता के कई वर्षों बाद बन सका था। आज उसी स्थान पर डबल लेन के पुल हैं और नए पुलों का निर्माण भी प्रस्तावित है। यह बदलाव केवल आधारभूत ढांचे का बदलाव नहीं है, बल्कि यह बताता है कि मजबूत इच्छाशक्ति और निरन्तर प्रयास से किसी क्षेत्र की तस्वीर और तकदीर बदली जा सकती है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज ने शिक्षा को समाज परिवर्तन का सबसे सशक्त माध्यम माना। उन्होंने गोरखपुर और पूर्वी उत्तर प्रदेश में ऐसी संस्थाओं की स्थापना की, जिन्होंने आने वाली पीढ़ियों को शिक्षा और कौशल के अवसर उपलब्ध कराए। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की स्थापना की यात्रा भी महाराणा प्रताप कॉलेज और महाराणा प्रताप महिला कॉलेज से जुड़ी हुई है। महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज ने विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए इन दोनों संस्थाओं को उत्तर प्रदेश सरकार को दान स्वरूप प्रदान किया था। पूर्वी उत्तर प्रदेश के पहले महिला महाविद्यालय की स्थापना भी गोरखपुर में महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज द्वारा की गई थी। स्वतंत्रता के तत्काल बाद देश को तकनीकी मानव संसाधन की आवश्यकता को देखते हुए महाराणा प्रताप पॉलिटेक्निक की स्थापना की गई, जो आज महाराणा प्रताप इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के रूप में संचालित है। उस समय देश के लिए तकनीकी रूप से दक्ष मानव संसाधन तैयार करने की आवश्यकता को जिस दूरदृष्टि के साथ समझा गया था, आज उसी सोच का विस्तार आधुनिक शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, चिकित्सा और कौशल विकास के रूप में दिखाई देता है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद आज 50 से अधिक शिक्षण, प्रशिक्षण संस्थाओं और विभिन्न सेवा प्रकल्पों के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य और सेवा के क्षेत्र में कार्य कर रही है। यह केवल शिक्षण संस्थाओं का समूह नहीं, बल्कि समाज के प्रति उत्तरदायित्व निभाने वाली एक व्यापक परम्परा है। आने वाले वर्षों में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद अपने स्थापना के शताब्दी महोत्सव की ओर बढ़ेगी। यह अवसर अपने संस्थापकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के साथ-साथ उनके विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का भी होगा।जिस महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद ने स्वतंत्र भारत में गोरखपुर को एक विश्वविद्यालय देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, आज वही परिषद स्वयं महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय का संचालन कर रही है। यह संस्थापकों की दूरदृष्टि और शिक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रमाण है। ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज और राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवैद्यनाथ जी महाराज ने शिक्षा को समाज की आवश्यकताओं के साथ जोड़कर आगे बढ़ाने का कार्य किया। महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज के बाद लंबे समय तक गोरक्षपीठ की जिम्मेदारी का निर्वहन करने वाले महंत अवैद्यनाथ जी महाराज के संरक्षण में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद ने अपनी गतिविधियों का विस्तार किया।


मुख्यमंत्री ने कहा कि इन दोनों महापुरुषों की स्मृति में व्याख्यानमाला आयोजित कर विश्वविद्यालय नई पीढ़ी को उनके विचारों और समाज जीवन के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े अनुभवी व्यक्तित्वों के अनुभवों से जोड़ रहा है। पिछले एक सप्ताह में समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े महानुभावों को आमंत्रित कर उनके अनुभव और विचार विद्यार्थियों तक पहुंचाना विश्वविद्यालय की सकारात्मक पहल है। इस वर्ष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 56वीं पुण्यतिथि और राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवैद्यनाथ जी महाराज की 12वीं पुण्यतिथि के अवसर पर भी विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। यह परम्परा आने वाली पीढ़ियों को संस्थापकों के जीवन और उनके मूल्यों से जोड़ने का माध्यम बनेगी। भारत के पास हजारों वर्षों की ऋषि परम्परा से प्राप्त ज्ञान की समृद्ध विरासत है। इस ज्ञान को आधुनिक विज्ञान और प्रौद्योगिकी के साथ जोड़कर उत्तर प्रदेश को युवा शक्ति के रूप में नई दिशा दी जा सकती है। भारत ने स्वास्थ्य को केवल बीमारी के उपचार के रूप में नहीं देखा। योग, आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा, औषधीय पौधों और पारम्परिक कृषि ज्ञान के रूप में हमारे पास हजारों वर्षों का अनुभव और ज्ञान मौजूद है। आवश्यकता इस ज्ञान को आधुनिक शोध, प्रयोगशाला और प्रौद्योगिकी से जोड़ने की है। परम्परागत ज्ञान को केवल पुस्तकों और परम्पराओं तक सीमित नहीं रखा जा सकता। उसे वैज्ञानिक शोध और प्रयोगशालाओं से जोड़ना होगा और नई पीढ़ी के साथ साझा करना होगा।


आयुर्वेद को आधुनिक निदान, चिकित्सकीय शोध और नई चिकित्सा प्रौद्योगिकी से जोड़ा जा सकता है। औषधीय पौधों को आधुनिक कृषि, जैव प्रौद्योगिकी और औषधीय अनुसंधान से जोड़कर नई मूल्य श्रृंखला विकसित की जा सकती है। योग और स्वास्थ्यवर्धक जीवनशैली को निवारक स्वास्थ्य सेवाओं और आधुनिक जीवन की चुनौतियों के समाधान से जोड़ा जा सकता है। भारतीय चिकित्सा ज्ञान का वैज्ञानिक प्रमाणीकरण और गुणवत्ता मानकों के अनुरूप विकास कर इसे वैश्विक स्तर तक पहुंचाया जा सकता है। विश्वविद्यालय परिसर में आधुनिक चिकित्सा, पारम्परिक चिकित्सा, नर्सिंग, फार्मेसी, कृषि और अन्य विषयों के विद्यार्थी अध्ययन कर रहे हैं। सामान्य तौर पर इन्हें अलग-अलग विषयों के रूप में देखा जाता है, लेकिन वास्तव में इनके बीच गहरा अन्तर्सम्बन्ध है। भविष्य की बड़ी समस्याओं का समाधान किसी एक विषय की सीमा के भीतर नहीं निकलेगा। अलग-अलग ज्ञान-विधाओं के संगम से नए समाधान निकलेंगे। इसलिए विश्वविद्यालय को एकीकृत ज्ञान एवं नवाचार तंत्र के रूप में विकसित करना होगा।


भारतीय ज्ञान परम्परा के मंत्र ‘आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः’ का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की परम्परा सदैव सभी दिशाओं से श्रेष्ठ विचारों को स्वीकार करने की रही है। इसी व्यापक दृष्टिकोण के साथ आधुनिक शिक्षा और परम्परागत ज्ञान को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। जब विभिन्न विधाएं एक साथ काम करेंगी तो बेहतर पेशेवरों के साथ नए शोध, नए नवाचार, नए स्टार्टअप और नए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। प्रौद्योगिकी का वास्तविक उद्देश्य केवल मशीनों को आधुनिक बनाना नहीं है, बल्कि मानव जीवन की समस्याओं का सरल और प्रभावी समाधान उपलब्ध कराना है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निदान के माध्यम से रोगों की पहचान अधिक तेज और सटीक बनाई जा सकती है। दूरचिकित्सा के माध्यम से विशेषज्ञ चिकित्सकीय सेवाओं को दूरदराज के गांवों तक पहुंचाया जा सकता है। डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था मरीज की स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारी को व्यवस्थित और बेहतर तरीके से प्रबन्धित करने में सहायता कर सकती है।


आधुनिक चिकित्सा उपकरण बेहतर निदान और उपचार में सहायक हैं। जैव प्रौद्योगिकी और जीनोमिक्स भविष्य की चिकित्सा और शोध के नए रास्ते खोल सकते हैं। आंकड़ा आधारित स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से उपलब्ध आंकड़ों का वैज्ञानिक उपयोग कर अधिक प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएं विकसित की जा सकती हैं। कृषि क्षेत्र में भी आधुनिक प्रौद्योगिकी का उपयोग आवश्यक है। सटीक कृषि के माध्यम से सीमित संसाधनों का अधिकतम और वैज्ञानिक उपयोग करते हुए बेहतर उत्पादन और गुणवत्ता हासिल की जा सकती है। ड्रोन तकनीक के माध्यम से फसलों की निगरानी, सटीक छिड़काव और फसल आकलन को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। मृदा परीक्षण के माध्यम से मिट्टी की गुणवत्ता और पोषक तत्वों का वैज्ञानिक आकलन कर संतुलित खेती को बढ़ावा दिया जा सकता है।


स्मार्ट सिंचाई के माध्यम से फसल की आवश्यकता के अनुरूप पानी का उपयोग कर जल की बचत और उत्पादकता दोनों बढ़ाई जा सकती हैं। कृषि प्रसंस्करण के माध्यम से किसान की उपज में मूल्य संवर्धन कर उसकी बाजार कीमत और आय बढ़ाई जा सकती है। जलवायु परिवर्तन के दौर में जलवायु अनुकूल कृषि तकनीकों को अपनाना आवश्यक है। इसके माध्यम से बदलती परिस्थितियों के अनुरूप उत्पादन को बनाए रखते हुए किसानों की आय में भी वृद्धि की जा सकती है। पारम्परिक चिकित्सा ज्ञान का डिजिटल दस्तावेजीकरण आवश्यक है। इस ज्ञान को व्यवस्थित रूप से संरक्षित करने के लिए शोध डेटाबेस तैयार किए जाने चाहिए। औषधियों की गुणवत्ता, प्रभावशीलता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए गुणवत्ता परीक्षण आवश्यक है। आधुनिक विनिर्माण प्रणालियों से पारम्परिक ज्ञान को जोड़कर गुणवत्तापूर्ण उत्पादों का बड़े पैमाने पर निर्माण किया जा सकता है। साक्ष्य आधारित प्रमाणीकरण के माध्यम से पारम्परिक उपचार पद्धतियों की वैज्ञानिक जांच और उनकी प्रभावशीलता का परीक्षण किया जाना चाहिए। इससे भारतीय पारम्परिक चिकित्सा ज्ञान को विश्वसनीय वैज्ञानिक आधार मिलेगा और उसे वैश्विक मंच पर नई पहचान मिल सकती है।


शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं हो सकती। शिक्षा का उद्देश्य ऐसे सक्षम युवाओं का निर्माण करना है, जो अपने ज्ञान और कौशल से अवसर पैदा कर सकें। विद्यार्थी केवल परीक्षा पास करने के लिए अध्ययन न करें। वे वास्तविक जीवन की समस्याओं को समझें और उनके समाधान निकालने का प्रयास करें। शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो कक्षा के ज्ञान को समाज की जरूरतों और उद्योग की आवश्यकताओं से जोड़ सके। आज के विद्यार्थी केवल नौकरी पाने की मानसिकता तक सीमित न रहें। उनमें नवाचार, उद्यमिता और समस्या समाधान की क्षमता विकसित होनी चाहिए। उन्हें जॉब सीकर के साथ-साथ जॉब क्रिएटर बनने का आत्मविश्वास पैदा करना होगा।

प्रदेश में डबल इंजन सरकार शिक्षा और कौशल से लेकर आधारभूत ढांचे, निवेश, स्टार्टअप, एम0एस0एम0ई0 और उद्योग तक एक व्यापक पारिस्थितिकी तंत्र तैयार कर रही है। पिछले 09 वर्षों में बेहतर आधारभूत ढांचे से कनेक्टिविटी बढ़ी है। बेहतर कनेक्टिविटी से निवेश के अवसर आए हैं। निवेश से उद्योग और रोजगार के अवसर बढ़े हैं। डिजिटल आधारभूत ढांचे ने इन अवसरों को अधिक से अधिक युवाओं तक पहुंचाने की क्षमता प्रदान की है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम और एक जनपद-एक उत्पाद के माध्यम से स्थानीय उत्पादों, कारीगरों और हस्तशिल्पियों को बेहतर मंच मिला है। स्टार्ट-अप पारिस्थितिकी तंत्र ने युवाओं को नौकरी खोजने के बजाय नए समाधान और नए उद्यम स्थापित करने के अवसर प्रदान किए हैं। शिक्षा, कौशल और स्वास्थ्य क्षेत्र में बढ़ता आधारभूत ढांचा प्रदेश में मजबूत मानव पूंजी के निर्माण में सहायक बन रहा है।


प्रदेश के पास विशाल युवा शक्ति, कृषि शक्ति, उद्यमिता, प्राकृतिक संसाधन और समृद्ध ज्ञान परम्परा है। आवश्यकता इन सभी क्षमताओं को एक दिशा और एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र से जोड़ने की है। शिक्षा की यात्रा केवल डिग्री तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। यह यात्रा ‘शिक्षा से कौशल, कौशल से क्षमता, क्षमता से अवसर, अवसर से नवाचार, नवाचार से उद्यमिता, उद्यमिता से रोजगार और रोजगार से आर्थिक विकास’ तक पहुंचनी चाहिए। प्रदेश का लक्ष्य ऐसा वातावरण तैयार करना है, जहां बड़े निवेश आएं और प्रदेश का प्रत्येक युवा उन निवेशों, उद्योगों और अवसरों का सहभागी बने।


गोरखपुर केवल एक शहर नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की सम्भावनाओं का द्वार है। इसकी पहचान केवल धार्मिक और ऐतिहासिक नगरी के रूप में नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और नवाचार के बड़े क्षेत्रीय ज्ञान एवं आर्थिक केन्द्र के रूप में भी विकसित की जा सकती है। महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय इस परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। विश्वविद्यालय में शिक्षा के साथ शोध एवं विकास, नवाचार, उद्योग और रोजगार के बीच मजबूत सम्बन्ध विकसित होना चाहिए। विश्वविद्यालय की प्रयोगशालाओं में पैदा होने वाला ज्ञान परिसर की चारदीवारी में सीमित नहीं रहना चाहिए। उसे पूर्वी उत्तर प्रदेश के गांवों, किसानों, अस्पतालों, उद्योगों और स्टार्ट-अप तक पहुंचना चाहिए। कृषि विद्यार्थियों का शोध किसानों की आय और उत्पादकता बढ़ाने में सहायक बने। मेडिकल एवं स्वास्थ्य शोध गांवों की स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाए। फार्मेसी शोध नई दवाओं और स्वास्थ्य संबंधी नवाचारों को जन्म दे तथा प्रौद्योगिकी इन सभी को बड़े बाजार और नई अर्थव्यवस्था से जोड़े।


मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से कहा कि उन्हें केवल जब रेडी नहीं, बल्कि फ्यूचर रेडी होना होगा। दुनिया तेजी से बदल रही है। इसलिए किसी एक नौकरी के लिए तैयार होना पर्याप्त नहीं है। युवाओं को ऐसी क्षमता, दृष्टि और इच्छाशक्ति विकसित करनी होगी, जो बदलती दुनिया के साथ उन्हें आगे बढ़ने में सक्षम बनाए। विद्यार्थियों को केवल कर्मचारी बनने की तैयारी नहीं करनी है, बल्कि इनोवेटर, एण्टरप्रेन्योर और समस्या समाधानकर्ता बनने की क्षमता विकसित करनी है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे स्वयं से केवल यह प्रश्न न पूछें कि ‘मैं अपने लिए क्या कर सकता हूं’, बल्कि इससे आगे बढ़कर यह पूछें कि ‘मैं अपने ज्ञान, अपनी प्रतिभा और अपनी क्षमता से समाज और देश के लिए क्या कर सकता हूं।’


सफलता तब सार्थक होगी जब किसी युवा के ज्ञान से किसी का जीवन बेहतर हो, उसके नवाचार से किसी समस्या का समाधान निकले, उसके उद्यम से किसी को रोजगार मिले और उसकी आर्थिक गतिविधि से देश की अर्थव्यवस्था को गति प्राप्त हो। युवाओं को केवल अपने भविष्य का निर्माता नहीं, बल्कि देश के भविष्य का निर्माता बनना होगा। प्रदेश के विकास के लिए सरकार, विश्वविद्यालय, उद्योग और युवा की साझेदारी आवश्यक है। सरकार ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करेगी, जहां शिक्षा, निवेश, शोध, स्टार्ट-अप और रोजगार के अवसर पैदा हों। विश्वविद्यालय ज्ञान और शोध का सृजन करें। ऐसी शिक्षा और शोध को बढ़ावा दें, जो समाज और उद्योग की वास्तविक आवश्यकताओं से जुड़ा हो। उद्योग विद्यार्थियों को प्रशिक्षण, प्रशिक्षुता, रोजगार, शोध और उद्यम के अवसर उपलब्ध कराएं। युवा नवाचार और उद्यम की शक्ति बनें तथा अपने ज्ञान को नए विचारों, नए समाधानों और नए उद्यमों में परिवर्तित करें। जब सरकार, विश्वविद्यालय, उद्योग और युवा एक साथ काम करेंगे तो ज्ञान से नवाचार, नवाचार से उद्यम, उद्यम से रोजगार और रोजगार से आर्थिक विकास का चक्र मजबूत होगा। यही चक्र युवा प्रतिभा को देश की आर्थिक प्रगति में बदल सकता है।


विश्वविद्यालय अपने आप में अलग-थलग द्वीप न बनें। विश्वविद्यालयों को समाज की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए अपनी पूरी क्षमता का उपयोग करना होगा। ऐसा वातावरण तैयार करना होगा, जहां हमारी परम्पराएं हमारी जड़ों में हों और प्रौद्योगिकी हमारे भविष्य को गति दे। शिक्षा और रोजगार के बीच की दूरी लगातार कम हो। विश्वविद्यालयों की शोध प्रयोगशालाएं और उद्योग की आवश्यकताएं एक-दूसरे से जुड़ी हों। गांव का युवा और किसान भी तकनीक, नवाचार और उद्यमिता के माध्यम से नई मूल्यवृद्धि और नई आय पैदा कर सके। विश्वविद्यालय केवल डिग्री देने वाली संस्थाएं न रहें, बल्कि ज्ञान, नवाचार, उद्यमिता और आर्थिक परिवर्तन के इंजन बनें।


महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के पंचम स्थापना दिवस के अवसर पर उन विद्यार्थियों, शिक्षकों, कर्मचारियों और टीम के सदस्यों को सम्मानित किया जाना सराहनीय है, जिन्होंने लीक से हटकर कुछ नया करने का प्रयास किया है। आधुनिक चिकित्सा से जुड़े एम0बी0बी0एस0 विद्यार्थियों और पारम्परिक चिकित्सा से जुड़े बी0ए0एम0एस0 विद्यार्थियों ने भी बेहतर प्रदर्शन किया है। अन्य विधाओं के विद्यार्थी भी नवाचार और कुछ नया करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग का निरीक्षण होना है। यह केवल प्राचार्य की जिम्मेदारी नहीं है। पूरी फैकल्टी और पूरी टीम को मिलकर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना होगा। टीमवर्क ही सफलता का सबसे बड़ा मंत्र है। विश्वविद्यालय में अनुशासन और टीम भावना दिखाई दे रही है। पंचम स्थापना दिवस इसी यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव है, जो विश्वविद्यालय परिवार को आने वाले समय में और बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित करेगा।


विकसित भारत की संकल्पना केवल सरकार के प्रयासों से पूरी नहीं होगी। इसे विश्वविद्यालयों, शिक्षण संस्थाओं, शोध केंद्रों, उद्योगों और युवाओं के सामूहिक प्रयास से साकार किया जाएगा। जब उत्तर प्रदेश की परम्परा को विज्ञान की शक्ति मिलेगी, विज्ञान को प्रौद्योगिकी की गति मिलेगी, प्रौद्योगिकी को युवा ऊर्जा मिलेगी और युवाओं को अवसर प्राप्त होंगे, तब न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरा पूर्वी क्षेत्र अपनी सम्भावनाओं को देश की नई विकास गाथा में परिवर्तित करने का नेतृत्व कर सकेगा। महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय ने इस यात्रा को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय के पंचम स्थापना दिवस को एक महत्वपूर्ण पड़ाव बताते हुए विश्वविद्यालय परिवार की उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने मंच पर सम्मानित किए गए सभी फैकल्टी सदस्यों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों को बधाई दी तथा विश्वविद्यालय परिवार की टीम भावना का अभिनन्दन किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय आने वाले समय में स्वयं को एक सशक्त एकीकृत ज्ञान, शोध एवं नवाचार केन्द्र के रूप में स्थापित करने में सफल होगा।


मुख्यमंत्री ने कहा कि महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय शिक्षा, चिकित्सा, कृषि, कौशल, शोध, नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल करते हुए पूर्वी उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा को नई गति प्रदान करे तथा विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में अपना प्रभावी योगदान दे। इस अवसर पर गोरखपुर के सांसद रविकिशन शुक्ला, विधानसभा सदस्य महेंद्र पाल सिंह, मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश कुमार अवस्थी तथा महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के कुलपति लेफ्टिनेंट जनरल डॉ0 भूपेश कुमार गोयल सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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