मुख्यमंत्री ने ‘लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति यात्रा योजना’ का किया Lशुभारम्भ

  • मुख्यमंत्री ने ‘लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति यात्रा योजना’ का शुभारम्भ किया।
  • 60 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को आजीवन उ0प्र0 परिवहन निगम की बसों में निःशुल्क यात्रा की सुविधा।
  • मुख्यमंत्री ने 60 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति यात्रा योजना के सांकेतिक कार्ड प्रदान किए।
  • रक्षाबंधन पर 27, 28 और 29 अगस्त को महिलाओं को निःशुल्क बस यात्रा की सौगात।
  • ‘लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति यात्रा योजना’ प्रदेश की मातृशक्ति के लिए सुरक्षा, सम्मान, स्वावलम्बन और सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक पहल
  • लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर महिला स्वावलम्बन, सुशासन, न्याय व भारत की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की महान प्रतीक।
  • महिला स्वावलम्बन के आदर्श को सामने रखते हुए प्रदेश में कामकाजी महिलाओं के लिए बनाए जा रहे छात्रावासों का नाम भी लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर के नाम पर रखा गया।
  • बेटी के जन्म से शिक्षा, रोजगार, उद्यमिता और नेतृत्व तक प्रत्येक पड़ाव पर प्रदेश सरकार मातृशक्ति के साथ।
  • प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में डबल इंजन सरकार आधी आबादी को शासन की योजनाओं से जोड़ने के लिए व्यापक कार्ययोजना के साथ कार्य कर रही।
  • महिलाओं को निर्णय लेने वाली मेज पर पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
  • राज्य सरकार की प्रत्येक योजना के केन्द्र में बेटियां, आधी आबादी सरकार का संकल्प प्रदेश की बेटियों को भयमुक्त वातावरण देना व उन्हें आत्म विश्वास के साथ आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करना।
  • स्वच्छ भारत मिशन, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, जल जीवन मिशन और डी0बी0टी0 जैसी योजनाआें ने महिलाओं के जीवन में व्यापक परिवर्तन किया।
  • प्रदेश सरकार आगामी अक्टूबर-नवम्बर में प्रदेश की स्नातक स्तर पर अध्ययनरत 50,000 बेटियों को स्कूटी उपलब्ध कराने की दिशा में आगे बढ़ रही।
  • प्रदेश की लगभग 8,000 न्याय पंचायतों में डिजिटल इन्टरप्रेन्योर तैयार करने की योजना, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं डिजिटल उद्यमिता से जुड़ेंगी।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के मार्गदर्शन में डबल इंजन सरकार आधी आबादी को शासन की योजनाओं से जोड़ने के लिए व्यापक कार्ययोजना के साथ कार्य कर रही है। राज्य सरकार की प्रत्येक योजना के केन्द्र में बेटियां और आधी आबादी है। बेटी के जन्म से लेकर उसकी शिक्षा, रोजगार, उद्यमिता, सुरक्षा, सम्मान और स्वावलम्बन तक सरकार की प्रत्येक योजना और बजट मातृशक्ति के सशक्तिकरण को समर्पित है। सरकार का संकल्प प्रदेश की बेटियों को भयमुक्त वातावरण देना और उन्हें आत्म विश्वास के साथ आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करना है।


आज यहां ‘लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति यात्रा योजना’ का शुभारम्भ करने के पश्चात आयोजित कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री जी ने 60 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति यात्रा योजना के सांकेतिक कार्ड प्रदान किए। महिलाओं को साड़ी एवं मिष्ठान से युक्त बैग भेंट किये गये। मुख्यमंत्री जी ने कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं से संवाद किया, महिलाओं ने इस योजना के शुभारम्भ हेतु मुख्यमंत्री जी के प्रति आभार प्रकट किया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री जी ने विशेष बसों का फ्लैग ऑफ किया।


मुख्यमंत्री ने कहा कि रक्षाबन्धन पर्व पर प्रदेश की माताओं, बहनों व बेटियों को 27, 28 और 29 अगस्त को उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम तथा सिटी बस सेवा की बसों में एक सहयात्री के साथ निःशुल्क यात्रा की सुविधा मिलेगी। 29 अगस्त के पश्चात ‘लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति यात्रा योजना’ के अन्तर्गत 60 वर्ष से अधिक आयु की उत्तर प्रदेश की सभी महिलाओं को उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की बसों में आजीवन निःशुल्क यात्रा की सुविधा उपलब्ध होगी। अब माताओं-बहनों का किराया सरकार वहन करेगी। इस सुविधा के लिए महिलाओं को अपना वोटर आई0डी0 अथवा आधार कार्ड दिखाना होगा। यह सुविधा केवल यात्रा को आसान बनाने का माध्यम नहीं, बल्कि सुरक्षा से सम्मान, सम्मान से स्वावलम्बन और स्वावलम्बन से नेतृत्व तक की यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।


इस योजना का नामकरण लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर के नाम पर किया गया है। लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर महिला स्वावलम्बन, सुशासन, न्याय व भारत की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की महान प्रतीक थीं। उन्होंने काशी विश्वनाथ, सोमनाथ सहित देश के अनेक मन्दिरों के पुनरुद्धार में महत्वपूर्ण योगदान दिया। महिला स्वावलम्बन के आदर्श को सामने रखते हुए प्रदेश में कामकाजी महिलाओं के लिए बनाए जा रहे छात्रावासों का नाम भी लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर के नाम पर रखा गया है। लखनऊ, कानपुर, आगरा, गाजियाबाद, मुरादाबाद, बरेली, प्रयागराज, अयोध्या, गोरखपुर, काशी और झांसी सहित विभिन्न स्थानों पर इन छात्रावासों का निर्माण किया जा रहा है, जहां कामकाजी महिलाओं को रहने की सुविधा उपलब्ध होगी।


वर्ष 2017 से पूर्व प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के सामने गम्भीर चुनौतियां थीं। उस समय महिलाओं की सुरक्षा के लिए न तो एकीकृत हेल्पलाइन की प्रभावी व्यवस्था थी, न कमाण्ड सेण्टर, सी0सी0टी0वी0 नेटवर्क, महिला बीट सिस्टम एवं महिला हेल्प डेस्क की पर्याप्त व्यवस्था थी। पेन्शन और छात्रवृत्ति जैसी योजनाओं में बिचौलियों की भूमिका थी तथा पुष्टाहार जैसी व्यवस्थाओं पर माफियाओं का प्रभाव था। प्रदेश में लैण्ड, सैंड, वन, पशु और नकल माफिया के सिण्डिकेट सक्रिय थे।


मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले उत्सव से पहले उपद्रव और दंगे होते थे तथा कर्फ्यू लगने पर सबसे अधिक परेशानी माताओं-बहनों को होती थी। बुन्देलखण्ड में महिलाओं का जीवन पानी ढोने में बीत जाता था। गरीब परिवारों में शौचालय नहीं थे और महिलाओं को अन्धेरा होने का इंतजार करना पड़ता था। निराश्रित महिला पेन्शन, वृद्धावस्था पेन्शन और छात्रवृत्ति सहित विभिन्न योजनाओं में बिचौलियों का प्रभाव था। आज परिस्थितियां पूरी तरह बदल चुकी हैं। प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में डबल इंजन सरकार ने उपद्रव को उत्सव में बदला और प्रदेश को दंगा एवं कर्फ्यू से मुक्त वातावरण दिया।


आज प्रदेश में मिशन शक्ति केन्द्र, ए0आई0 आधारित सेफ सिटी नेटवर्क तथा ‘1090’ और ‘112’ का इण्टीग्रेटेड रिस्पांस सिस्टम उपलब्ध है। बेटी की सुरक्षा में कोई सेंध लगाने का प्रयास करेगा, तो उसके लिए जेल या जहन्नुम में से कोई एक स्थान तय होगा। उत्तर प्रदेश में पहली बार महिला बीट पुलिस अधिकारियों की तैनाती की गई है। वर्ष 2017 में प्रदेश में लगभग 10 हजार महिला पुलिसकर्मी थीं, जबकि अब यह संख्या लगभग 45 हजार तक पहुंच चुकी है। नई भर्ती के बाद यह संख्या और बढ़ेगी। प्रदेश में 03 महिला पी0ए0सी0 बटालियन का गठन वीरांगना ऊदादेवी पासी, वीरांगना अवन्तीबाई लोधी और वीरांगना झलकारीबाई कोरी के नाम पर किया गया है। पिंक बूथ, वन स्टॉप सेंटर, शिकायत की ट्रैकिंग, टाइमलाइन और जवाबदेही जैसी व्यवस्थाएं भी महिलाओं की सुरक्षा को मजबूत कर रही हैं।


सरकार का लक्ष्य केवल यह नहीं है कि बेटी घर पहुंचने के बाद सुरक्षित रहे, बल्कि वह घर से निकले, कार्य करे, कारोबार करे और रात में भी अपने अधिकार के साथ सुरक्षित घर लौटे। इसी उद्देश्य से महिलाओं को आवश्यक सुरक्षा प्रावधानों के साथ नाइट शिफ्ट में काम करने का अवसर देने के लिए नीतिगत बदलाव किए गए हैं। वर्ष 2017 से पूर्व जहां लगभग 12 प्रतिशत महिलाएं ही आर्थिक रूप से स्वावलम्बी थीं, वहीं आज यह आंकड़ा 36 प्रतिशत से अधिक हो गया है। हमारा लक्ष्य इसे कम से कम 50 प्रतिशत तक पहुंचाना है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं का सम्मान तब सुनिश्चित होता है, जब उनके घर में शौचालय, धुआंमुक्त रसोई, घर में बिजली, नल में जल, खाते में सीधे पैसा पहुंचे और विपत्ति के समय सरकार उनके साथ खड़ी हो। स्वच्छ भारत मिशन, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, जल जीवन मिशन और डी0बी0टी0 जैसी व्यवस्थाओं ने महिलाओं के जीवन में व्यापक परिवर्तन किया है। मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के माध्यम से बेटी के जन्म से लेकर स्नातक स्तर तक उसकी शिक्षा के विभिन्न पड़ावों पर आर्थिक सहायता दी जा रही है। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के अन्तर्गत बेटी के विवाह के लिए एक लाख रुपये की सहायता राशि दी जा रही है। निराश्रित महिला पेन्शन, वृद्धावस्था पेन्शन और दिव्यांगजन पेन्शन के माध्यम से लगभग 1.10 करोड़ परिवारों को सालाना 12 हजार रुपये की सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।


मुख्यमंत्री जी ने कहा कि सरकार ने महिलाओं को केवल सुविधा नहीं दी, बल्कि उन्हें स्वामित्व और अधिकार भी दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों में एक करोड़ से अधिक महिलाओं को उनके आवास का मालिकाना अधिकार स्वामित्व/घरौनी के माध्यम से मिला है। लगभग 65 लाख परिवारों को आवास दिए गए हैं और इन आवासों की मालकिन महिलाओं को बनाया गया है। प्रधानमंत्री मातृ वन्दना योजना और मुख्यमंत्री सुपोषण योजना के माध्यम से मां और बच्चे के पोषण पर विशेष ध्यान दिया गया है। संस्थागत प्रसव में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को न्यूनतम स्तर तक लाने में सफलता मिली है। प्रदेश सरकार आगामी अक्टूबर-नवम्बर में प्रदेश की स्नातक स्तर पर अध्ययनरत 50,000 बेटियों को स्कूटी उपलब्ध कराने की दिशा में आगे बढ़ रही है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए स्वयं सहायता समूहों को खेती, पशुपालन, फूड प्रोसेसिंग, हैण्डीक्राफ्ट, रिटेल और अन्य स्थानीय गतिविधियों से जोड़ा गया है। प्रदेश की लगभग 8,000 न्याय पंचायतों में डिजिटल इन्टरप्रेन्योर तैयार करने की योजना है, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं डिजिटल उद्यमिता से जुड़ेंगी। लखपति दीदी, बी0सी0 सखी, बैंकिंग कॉरेस्पोन्डेण्ट सखी और नमो ड्रोन दीदी जैसी योजनाओं के माध्यम से महिलाएं टेक्नोलॉजी और वित्तीय सेवाओं से जुड़ रही हैं। स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं ड्रोन तकनीक के माध्यम से कृषि क्षेत्र में नई क्रान्ति का हिस्सा बन रही हैं।


बलिनी मिल्क प्रोड्यूसर, समर्थ मिल्क प्रोड्यूसर, काशी मिल्क प्रोड्यूसर, बाबा गोरखनाथ मिल्क प्रोड्यूसर और सृजनी मिल्क प्रोड्यूसर कम्पनियां प्रदेश के 31 जनपदों में कार्य कर रहे हैं। इनके माध्यम से 04 लाख से अधिक बहनें आर्थिक स्वावलम्बन की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। एफ0पी0ओ0 में महिला किसानों की भागीदारी बढ़ी है। एक जनपद एक उत्पाद योजना और एम0एस0एम0ई0 के माध्यम से हजारों महिला उद्यमी आत्मनिर्भर बनी हैं। स्टार्टअप ईकोसिस्टम में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। महिला समूहों के उत्पादों की ब्राणि्ंडग, पैकेजिंग, मार्केटिंग, प्रदर्शनियों में भागीदारी और डिजिटल कॉमर्स से जोड़ने की व्यवस्था की गई है। सी0-मार्ट जैसे प्लेटफॉर्म महिला स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने का कार्य कर रहे हैं।


मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा लक्ष्य स्पष्ट है कि महिलाओं का उत्पाद गांव में बने, उसकी ब्राणि्ंडग प्रदेश में हो और वह देश-दुनिया के बाजार तक पहुंचे। यही स्थानीय महिला उद्यम को वैश्विक बाजार से जोड़ने का मॉडल है। महिलाओं को निर्णय लेने वाली मेज पर पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। पुलिस भर्ती में महिलाओं के लिए 20 प्रतिशत पद अनिवार्य किए गए हैं। पंचायतों और स्थानीय निकायों में भी महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ा है।


आज बेटियां ओलम्पिक, एशियन गेम्स, कॉमनवेल्थ गेम्स, वर्ल्ड चैम्पियनशिप और नेशनल चैम्पियनशिप में देश और प्रदेश का गौरव बढ़ा रही हैं। हाल ही में कॉमनवेल्थ गेम्स में उत्तर प्रदेश की सब इंस्पेक्टर सुश्री अस्मिता डे ने देश के लिए गोल्ड मेडल जीता। अस्मिता डे का जन्म त्रिपुरा में हुआ, लेकिन उन्हें सही वातावरण और प्लेटफॉर्म उत्तर प्रदेश में मिला। प्रधानमंत्री जी ने संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को एक-तिहाई प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के उद्देश्य से नारी शक्ति वन्दन अधिनियम पारित कराया है। महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी किसी चैरिटी का विषय नहीं, बल्कि आर्थिक एवं सामाजिक एकीकरण का विषय है। माताएं-बहनें अपने भाइयों को रक्षा सूत्र बांधने के साथ-साथ देश की सुरक्षा में लगे सैनिकों, पूर्व सैनिकों और पुलिस के जवानों के प्रति भी सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करें तथा आवश्यकता पड़ने पर उन्हें रक्षा सूत्र बांधकर सुरक्षा के इस तंत्र को और मजबूत बनाने में अपना योगदान दें।


परिवहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने कहा कि प्रदेश की माताओं-बहनों को अपने भाइयों को राखी बांधने में कोई परेशानी न हो, इस उद्देश्य से मुख्यमंत्री जी ने वर्ष 2017 से ही रक्षाबन्धन के अवसर पर परिवहन निगम की बसों में निःशुल्क यात्रा की व्यवस्था प्रारम्भ की थी। इस वर्ष मुख्यमंत्री जी ने ऐसा ऐतिहासिक उपहार दिया है, जिससे 60 वर्ष से अधिक आयु की माताएं-बहनें जीवनभर प्रदेश में कहीं भी निःशुल्क यात्रा कर सकेंगी। लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर ने महिला सम्मान, सुशासन और देश की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का उदाहरण प्रस्तुत किया था। श्री काशी विश्वनाथ, सोमनाथ, बद्रीनाथ सहित अनेक धार्मिक स्थलों तथा धर्मशालाओं के निर्माण एवं पुनरुद्धार में उनका योगदान रहा। ऐसे महान व्यक्तित्व के नाम पर योजना प्रारम्भ करना मातृशक्ति के प्रति मुख्यमंत्री जी की संवेदनशील सोच का प्रमाण है।
कार्यक्रम के दौरान योजना पर आधारित लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया, जिसमें मातृशक्ति की गरिमा, सुरक्षा, सम्मान, स्वावलम्बन एवं सशक्तिकरण के लिए डबल इंजन सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों को प्रदर्शित किया गया।

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