महात्मा ज्योतिबा फुले को 132 वीं पुण्यतिथि पर किया गया याद

लखनऊ। महान समाज सुधारक क्रांतिसूर्य महात्मा ज्योतिबा फुले की 132 वीं पुण्यतिथि पर याद किया गया। इस अवसर पर उनके द्वारा समाज सुधार और शिक्षा के क्षेत्र में किए कार्य पर भारतीय ओबीसी महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौ.लौटनराम निषाद ने कहा भारतीय हिन्दू समाज मे व्याप्त कुरीतियों व रूढ़ियों के उन्मूलन के लिए क्रांतिकारी कार्य किये।”स्त्री शूद्रों न धीयतां” के मनुविधान के विरुद्ध उन्होंने शूद्रों व लड़कियों की शिक्षा की शुरूआत की।


निषाद ने ज्योतिबा फूले जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महात्मा ज्योतिबा के पिता गोविद राव एक किसान थे और पुणे में फूल बेचते थे। ज्योतिबा फुले समाजसेवी, लेखक, दार्शनिक,समाज सुधारक और क्रांतिकारी के रूप में जाने जाते हैं। महात्मा ज्योतिबा फुले ने न्याय व समानता के मूल्यों पर आधारित समाज की परिकल्पना प्रस्तुत की। वे महिला शिक्षा की खूब वकालत करते थे। यही वजह है कि 1840 में जब इनका विवाह सावित्रीबाई फुले से हुआ तो उन्होंने अपनी पत्नी सावित्रीबाई फुले को पढ़ने के लिए प्रेरित किया। 1852 में उन्होंने तीन स्कूलों की स्थापना की और सावित्रीबाई फुले आगे चलकर देश की पहली प्रशिक्षित महिला अध्यापिका बनीं।भारत में जातपात और सामाजिक असमानता के खिलाफ जिन लोगों ने संघर्ष किया है उनमें महात्मा ज्योतिबा फूले का नाम सबसे आगे हैं।

एक सामाजिक कार्यकर्ता, विचारक, समाज सेवक और लेखक के रूप में मशहूर ज्योतिबा फूले देश में, विशेषकर महाराष्ट्र में छुआछूत जैसी सामाजिक कुरीतियों को मिटाने और वंचित तबके को मजबूती प्रदान करने का काम किया था। अपने इस काम के लिए ज्योतिबा ने समाज के सभी तबकों को अपने साथ लेने में भी सफलता पाई और व्यापक तौर पर एक बदलाव लाने में सफल रहे।आपने विधवा व बाल विवाह के खिलाफ आंदोलन शुरू किए।पेशवाओं ने काफी विरोध किया।लेकिन आपने मुम्बई उच्च न्यायालय से विधवा विवाह को कानूनी मान्यता व बाल विवाह को गैर कानूनी घोषित कराने में न्यायिक जीत हासिल किए।

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