ललितपुर जेल अधीक्षक जाते-जाते लगा गए चुना!

ललितपुर जेल अधीक्षक जाते-जाते लगा गए 10 लाख का चुना! बगैर किसी निविदा के जेल में रखा बेंच डाला लाखों का कबाड़। जेल के सुरक्षाकर्मी की जिला प्रशासन से की गई शिकायत से हुआ खुलासा।

राकेश यादव

लखनऊ। ललितपुर जेल अधीक्षक स्थानांतरित जनपद की जेल पर जाने से पहले सरकार को 10 लाख रुपए के सरकारी राजस्व का चुना लगा गए। अधीक्षक ने जेल में पड़े कबाड़ को बगैर किसी निविदा के ही बेंच डाला। जेल के एक सुरक्षाकर्मी की जिला प्रशासन से की गई शिकायत से इस गबन का खुलासा हुआ। इसी विभाग के अधिकारियों में खलबली मची हुई है। इसको लेकर तमाम तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।

मिली जानकारी के मुताबिक ललितपुर जेल में लाखों रुपए के सरकारी सामान को अवैध रूप से बेच दिया गया। यह काम जेल के किसी मातहत अधिकारी या सिपाही ने नहीं जेल अधीक्षक ने किया है। सूत्रों का कहना है कि ललितपुर जेल में तैनात जेल अधीक्षक विजय राय का तबादला बलरामपुर जेल पर कर दिया गया था। सूत्रों का कहना है कि स्थानांतरित जेल अधीक्षक ने स्थानांतरण पर जाने से पूर्व बीती 15 और 16 जून को जेल में पड़े सरकारी सामान (कबाड़) को बगैर किसी टेंडर निकाले बेंच दिया। इस गोलमाल का खुलासा जेल में तैनात सुरक्षाकर्मी सुरेश कुमार मिश्रा की डीएम से की गई शिकायत से हुआ। शिकायतकर्ता सिपाही ने इस मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की है।

शिकायत में सिपाही ने लिखा है कि घटना के समय वह ड्यूटी पर तैनात था। उसके सामने ही जेल के बंदियों से यह सामान गाड़ियों में लाद कर भेजा गया। इस मौके पर कैंटीन प्रभारी आनंद तिवारी, हेड वार्डर अशोक ने सामान की नापतौल कराई और हेड वार्डर राजेंद्र सामान लेकर गाड़ियों के साथ गया। शिकायतकर्ता ने पत्र में कहा कि एक जिम्मेदार कर्मी होने के नाते सच को सामने लाने का कर्तव्य निभाते हुए भ्रष्टाचार का खुलासा किया है। शिकायतकर्ता ने डीम से मांग की है कि इस सच की पुष्टि जेल गेट पर लगे सीसीटीवी फुटेज से की जा सकती है।

गेटबुक पर बगैर इंट्री कराए जेल के बाहर भेज दिया सामान

डीएम को भेजे गए पत्र में शिकायतकर्ता ने कहा है कि जेल के गोदाम संख्या 60 में पिछले लंबे समय से रखे जेल के अड़गड़े, पुराने ट्रांसफार्मर, तार, बैटरी और अन्य कीमती सामान को बगैर किसी टेंडर के अवैध रूप से ठिकाने लगा दिया गया। इस पूरे सामान की अनुमानित लागत करीब 10 लाख रुपए बताई जा रही है। इस अवैध सामान को गाड़ियों के माध्यम से जेल के बाहर भेज दिया गया। दिलचस्प बात तो यह रही कि बाहर भेजे गए सामान की जेल गेटबुक पर कोई इंट्री तक नहीं की गई। उधर इस संबंध में जब कानपुर जेल परिक्षेत्र के डीआईजी प्रदीप गुप्ता से बात करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने फोन ही नहीं उठाया।

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