2009 में कांग्रेस की जीत में किसानों व निषादों की रही अहम भूमिका-लौटनराम निषाद

2009 में कांग्रेस की जीत में किसानों व निषादों की रही अहम भूमिका। 34 फीसद अतिपिछड़ों की उपेक्षा कर कोई दल नहीं हो सकता मजबूत।

राष्ट्रीय निषाद संघ(एन ए एफ) के राष्ट्रीय सचिव चौ.लौटनराम निषाद ने कहा कि उत्तर प्रदेश के जातिगत समीकरण में अतिपिछड़ी जातियों की संख्या 34 फीसद से अधिक है।जिसमें निषाद, बिन्द, कश्यप,लोधी/किसान,मौर्य/शाक्य/सैनी/काछी/कुशवाहा,प्रजापति,पाल/बघेल,राजभर,चौहान,विश्वकर्मा,साहू मुख्य हैं।इन जातियों को दरकिनार कर कोई दल आगे नहीं बढ़ सकता।उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव-2009 में उत्तर प्रदेश से कांग्रेस ने 21 सीटें जीता था,उसमें निषादों जातियों व किसानों की अहम भूमिका था।किसान कर्जमांफी के वादे पर किसान व आरक्षण के मुद्दे पर निषाद समुदाय की जातियाँ बहुमत में कांग्रेस के साथ गयीं थीं। उन्होंने बताया कि 27 जनवरी 2009 को कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्षा सोनिया गांधी जी ने एनटीपीसी गेस्ट हाउस ऊँचाहार, रायबरेली में राष्ट्रीय निषाद संघ के प्रतिनिधियों से कहीं थी कि इस बार कांग्रेस की सरकार बनाने में मदद करिए,सरकार बनने पर निषाद मछुआरों के आरक्षण की समस्या का समाधान कर दिया जाएगा,निषादों की समस्या के बारे में हमें दिग्विजय सिंह जी ने बताया है।निषाद ने कहा कि निषाद जातियों ने 2009 में कांग्रेस का साथ दिया,पर कांग्रेस ने आरक्षण की समस्या को नजरअंदाज कर दिया जिससे ये जातियाँ कांग्रेस से नाराज होकर 2012 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के साथ चली गईं।सपा सरकार में भी निषाद समुदाय सहित अतिपिछड़ी जातियों के साथ सामाजिक व राजनीतिक उपेक्षा की गई।सपा से खुन्नस खाईं ये जातियाँ थोक में भाजपा की वोटबैंक बन गईं।उन्होंने कहा कि भाजपा की मजबूती में अतिपिछड़ी जातियों की ही अहम भूमिका है।जिस दिन अतिपिछड़ी जातियाँ भाजपा का दामन छोड़ देंगी भाजपा 12-15 प्रतिशत वोटबैंक पर आ जायेगी।भाजपा भी सिर्फ अतिपिछड़ी जातियों को महज वोटबैंक समझ कर सामाजिक न्याय को चोट पहुंचा रही है।भाजपा सरकार में ओबीसी आरक्षण पर प्रशानिक व न्यायिक तलवार चलाकर हकमारी हो रही है।


निषाद ने कहा कि प्रियंका गांधी जी की सक्रियता से कांग्रेस में बदलाव की स्थिति दिखाई दे रही थी।लेकिन कांग्रेस भी अतिपिछड़ों को जोड़ने,सम्मान देने से पीछे हट रही है।उन्होंने कहा कि दलित को उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी का प्रदेश अध्यक्ष बनाना सामाजिक न्याय के क्षेत्र में अच्छी पहल रही,लेकिन दूसरी तरफ अतिपिछड़ों को नजरअंदाज करके चलना कांग्रेस के लिए ठीक नहीं है।कांग्रेस ने 1-1 मुस्लिम, यादव,कुर्मी,भूमिहार ब्राह्मण व 2 ब्राह्मण को प्रांताध्यक्ष या क्षेत्रीय अध्यक्ष बनाया,लेकिन अतिपिछड़ों को सिरे से खारिज कर दिया।अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी में भी सिर्फ एक अतिपिछड़ा को राष्ट्रीय सचिव बनाया गया है।अतिपिछड़ी जातियाँ कांग्रेस के साथ जुड़ सकती हैं,लेकिन कांग्रेस इन्हें सिरे से खारिज करके चल रही है।


निषाद ने बताया कि गोरखपुर, ग़ाज़ीपुर, सुल्तानपुर, जौनपुर,मिर्जापुर,हमीरपुर, फतेहपुर,फतेहपुर सीकरी,मुजफ्फरनगर, अम्बेडकर नगर,संतकबीरनगर, कुशीनगर,संतरविदासनगर, सिद्धार्थनगर, मछलीशहर, चन्दौली, वाराणसी, महराजगंज, लालगंज, बांसगांव, देवरिया, जालौन, अयोध्या, फर्रुखाबाद, बहराइच, बस्ती, आँवला, शामली, फिरोजाबाद, श्रावस्ती, बाराबंकी, अयोध्या,प्रयागराज,कानपुर देहात,शाहजहांपुर, रामपुर,पीलीभीत, धौरहरा,उन्नाव में 1.5 लाख से 4 लाख तक निषाद/कश्यप/बिन्द मतदाता हैं।कांग्रेस को अपनी ज़मीन मजबूत करना है तो ईमानदारी से अतिपिछड़ों को जोड़ने व सम्मान देने के लिए अपना हाथ बढ़ाना होगा।अतिपिछड़ों के साथ दोयमदर्जे का बर्ताव कर कांग्रेस कत्तई मजबूत नहीं हो सकती।पूर्वांचल की 10-11 सीटों पर राजभर,चौहान,कुशवाहा/मौर्य,पश्चिम के एक दर्जन से अधिक लोकसभा सीटों पर कुशवाहा/शाक्य/सैनी व 6-7 सीटों पर पाल/बघेल निर्णायक हैं।लोधी/किसान 23 लोकसभा क्षेत्रों में काफी मजबूत जनाधार में हैं।

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