
आगरा के बाद मेरठ जेल परिक्षेत्र की जेलों में मचेगी लूट! आईपीएस की जगह होगी विभागीय डीआईजी की तैनाती।शासन में सेटिंग गेटिंग से आगरा से मेरठ जेल परिक्षेत्र पहुंचेंगे डीआईजी।कमाई का कोई मौका छोड़ना नहीं चाह रहे आगरा जेल परिक्षेत्र के डीआईजी।
राकेश यादव
लखनऊ। न बाप बड़ा न भईया सबसे बड़ा रुपैया…यह कहावत शासन में बैठे कारागार विभाग के आला अफसरों पर एकदम फिट बैठती है। इस विभाग में पैसे के आगे कोई नियम और कानून मायने नहीं रखता है। यही वजह है आईपीएस के जेल परिक्षेत्र पर विभागीय डीआईजी को तैनात किए जाने की तैयारी अंतिम चरण में है। नियमों को ताक पर रखकर हो रही यह तैनाती विभागीय अधिकारियों और कर्मियों में चर्चा का विषय बनी हुई है। चर्चा है कि शासन में डीआईजी की आगरा से मेरठ जेल परिक्षेत्र में तैनाती के लिए पूरी सेटिंग गेटिंग हो गई है। शासन से इस तैनाती का आदेश अभी भी जारी किया जा सकता है। उधर विभाग के उच्चाधिकारी इस मसले पर कुछ भी बोलने से बचते नजर आ रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक डीआईजी कारागार मुख्यालय के साथ आगरा जेल परिक्षेत्र की जिम्मेदारी संभाल रहे डीआईजी प्रेमनाथ पांडेय इन दिनों परिक्षेत्र बदलवाने की जुगत में लगे। आगरा परिक्षेत्र की करीब आधा दर्जन अधिक जेलों से दो से तीन गुना लिफाफे लेने के बाद अब वह मुख्यालय के साथ प्रदेश की सर्वाधिक कमाऊ कही जाने वाली मेरठ जेल परिक्षेत्र की कमान पाने की सेटिंग गेटिंग में लगे हुए है। सूत्रों की माने तो पूर्व में डीआईजी पीएन पांडेय के पास आगरा परिक्षेत्र के साथ कानपुर जेल परिक्षेत्र का अतिरिक्त प्रभार था।
कानपुर परिक्षेत्र का प्रभार छोड़कर उन्होंने कारागार मुख्यालय का प्रभार हासिल किया था। अब वह आगरा परिक्षेत्र का प्रभार छोड़कर मेरठ जेल परिक्षेत्र की जिम्मेदारी पाने की जुगत में लगे हुए है। इसकी पूरी सेटिंग गेटिंग हो गई है। डीआईजी के परिक्षेत्र बदलने का आदेश शासन की ओर से किसी भी समय जारी किया जा सकता है। उधर इस संबंध में जब प्रमुख सचिव कारागार अनिल गर्ग से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो उन्होंने फोन नहीं उठाया। प्रमुख सचिव के निजी सचिव अमित गुप्ता ने बताया कि उन्हें फिलहाल ऐसी कोई जानकारी नहीं है।
एक एक डीआईजी के पास दो दो परिक्षेत्रों का प्रभार
वर्तमान समय में प्रदेश में नौ कारागार परिक्षेत्र है। विभाग में चार आईपीएस और तीन विभागीय डीआईजी हैं। एक डीआईजी के पास दो परिक्षेत्रों का प्रभार है। विभागीय डीआईजी शैलेन्द्र मैत्रेय के पास अयोध्या और गोरखपुर, प्रेमनाथ पांडे के पास मुख्यालय के साथ आगरा परिक्षेत्र, रामधनी के पास मुख्यालय के साथ लखनऊ परिक्षेत्र का प्रभार है। सूत्रों का कहना है कि 2007 में बसपा सरकार के दौड़ना विभाग का मुखिया आईपीएस को बनाने के साथ लखनऊ, मेरठ और प्रयागराज परिक्षेत्र की जिम्मेदारी आईपीएस का सौंपे जाने का निर्णय हुआ था। मेरठ परिक्षेत्र आईपीएस की तैनाती होने के बाद भी विभागीय डीआईजी शासन के निर्णय को दरकिनार कर मेरठ जेल परिक्षेत्र जाने की फ़िराक़ में जुटे हुए है। इसको लेकर विभाग में तमाम तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।






















