न गुजरात का गम, न हिमाचल की खुशी

न गुजरात का गम, न हिमाचल की खुशी। परिवार के सदस्यों ने उत्साह और उमंग के साथ मनाया सोनिया गांधी का जन्मदिन। तो क्या गांधी परिवार ने कांग्रेस को नेताओं के भरोसे छोड़ दिया है….?

8 दिसंबर को जब गुजरात और हिमाचल प्रदेश के चुनावों को लेकर देशभर में राजनीतिक माहौल गर्म था, तब गांधी परिवार के सदस्य राजस्थान के पर्यटन स्थल रणथम्भौर में उत्साह और उमंग के साथ सोनिया गांधी का 76वां जन्मदिन मना रहा था। इस अवसर पर सोनिया गांधी के साथ उनके पुत्र राहुल और प्रियंका गांधी भी मौजूद रहे। लंबे समय तक कांग्रेस का नेतृत्व करने वाली सोनिया गांधी ने गुजरात और हिमाचल के चुनाव परिणाम पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। सोनिया का जन्मदिन 9 दिसंबर का है, लेकिन पूरा गांधी परिवार 8 दिसंबर को ही रणथम्भौर पहुंच गया था। जन्मदिन के जश्न में शामिल होने के लिए राहुल गांधी ने भी अपनी भारत जोड़ों यात्रा को एक दिन से ज्यादा का ब्रेक दिया है। राहुल ने अपनी यात्रा को 8 दिसंबर को दोपहर को ही स्थगित कर दिया था। अब राहुल की यात्रा 10 दिसंबर को कोटा के निकट बूंदी से शुरू होगी। गांधी परिवार ने न तो गुजरात में ऐहतासिक हार पर कोई चिंता प्रकट की है और न ही हिमाचल की जीत पर खुशी दिखाई है।

गांधी परिवार खासकर राहुल गांधी ने जाजा रुख से प्रतीत होता है कि कांग्रेस को अब नेताओं के भरोसे छोड़ दिया गया है7 सब जानते हैं कि राहुल गांधी को ही फिर से कांग्रेस का अध्यक्ष बनाने के लिए नेताओं ने सभी तौर तरीके अपनाए। लेकिन आखिर तक राहुल गांधी अध्यक्ष नहीं बने। राहुल गांधी ने इसमें भी कोई रुच िनहीं दिखाई कि कौन अध्यक्ष बने। सोनिया गांधी चाहती थीं कि अशोक गहलोत अध्यक्ष बन जाए, लेकिन गहलोत ने राजस्थान के मुख्यमंत्री के पद के खातिर बगावत कर दी। बाद में मजबूरी में मल्किार्जुन खडग़े को अध्यक्ष बनाया, लेकिन खडग़े के पास राज्यसभा में प्रतिपक्ष के नेता के पद को बनाए रखा गया है। राहुल गांधी ने हिमाचल में प्रचार नहीं किया।

गुजरात में भी सिर्फ एक दिन में दो सभाएं की। यानी राहुल गांधी पार्टी के प्रचार से भी दूर रहे। गांधी परिवार और राहुल गांधी का यह रुख जाहिर करता है कि अब कांग्रेस को चलाने में उनकी कोई भूमिका नहीं है। हिमाचल में भी कौन मुख्यमंत्री बनेगा, इसमें भी गांधी परिवार दखल नहीं दे रहा है। मुख्यमंत्री के चयन की सारी जिम्मेदारी छत्तीसगढ़ के सीएम और हिमाचल के ऑबर्जवर भूपेश बघेल पर है। गांधी परिवार ने अपनी ओर से किसी नेता का नाम प्रस्तावित नहीं किया है। कहा जा सकता है कि मौजूदा समय में कांग्रेस को चलाने में गांधी परिवार की कोई भूमिका नहीं है। राहुल गांधी अपनी भारत जोड़ों यात्रा में व्यस्त हैं। देखना होगा कि गांधी परिवार के बगैर कांग्रेस की क्या स्थिति बनती है? सवाल यह भी है कि क्या खडग़े के नेतृत्व में कांग्रेस एकजुट रह पाएगी?

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