राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अर्मादित भाषा ……

इन बेशर्मों (पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह) के बाप दादा भी आ जाए तो भी भारत कांग्रेस मुक्त नहीं हो सकता।कांग्रेस के शासन वाले राजस्थान में भाजपा के दफ्तर में पुलिस घुस जाए तो क्या बीतेगी?सत्याग्रह में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की ऐसी अर्मादित भाषा और धमकी कितनी उचित है।

एस0 पी0 मित्तल

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे राहुल गांधी से दिल्ली में प्रवर्तन निदेशालय की हो रही पूछताछ के विरोध में कांग्रेस का जो आंदोलन हो रहा है, उसकी कमान राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने संभाल रखी। राहुल से जब भी पूछताछ होती है तो गहलोत दिल्ली में ही रहते हैं। गहलोत की पहल पर ही दिल्ली के धरना प्रदर्शन को सत्याग्रह में बदला गया। 20 जून को दिल्ली के जंतर मंतर पर सत्याग्रह ही किया गया। कहने को यह सत्याग्रह था, लेकिन खुद सीएम गहलोत ने भाषा की सभी मर्यादा तोड़ दी। गहलोत ने कहा कि नरेंद्र मोदी (प्रधानमंत्री) अमित शाह (केंद्रीय गृह मंत्री) के कुनबे का लोकतंत्र से कोई संबंध नहीं है। वरना राहुल गांधी को ईडी में नहीं बुलाते। सोनिया गांधी को नोटिस देने की हिम्मत नहीं होती। ये इतने बेशर्म लोग राज कर रहे हैं इन्हें कोई मतलब नहीं कि लोग क्या कहेंगे? गहलोत ने कहा कि भाजपा वाले कांग्रेस मुक्त भारत की बात करते हैं, आप लोगों के बाप दादा भी आ जाए तो भी कांग्रेस मुक्त भारत नहीं बनने वाला। गहलोत ने अपने संबोधन में अर्मादित भाषा का इस्तेमाल नहीं किया बल्कि धमकी भी दी। दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय में पुलिस के प्रवेश के संबंध में गहलोत ने कहा कि राजस्थान में हमारी सरकार जयपुर के भाजपा दफ्तर में पुलिस घुस जाए, तब क्या बीतेगी…..?

गहलोत ने कहा कि कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी अस्पताल में भर्ती रहीं, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने उनके स्वास्थ्य की जानकारी नहीं ली। अशोक गहलोत राजस्थान जैसे विशाल प्रदेश के मुख्यमंत्री रहते हुए देश के प्रधानमंत्री के लिए किन शब्दों का इस्तेमाल करें, यह उनका व्यक्तिगत मामला है, लेकिन सत्याग्रह की मर्यादाओं का तो ख्याल ही रखना चाहिए। एक तरफ कांग्रेस महात्मा गांधी के सत्याग्रह की आड़ लेती है तो दूसरी तरफ गहलोत जैसे वरिष्ठ कांग्रेसी प्रधानमंत्री के लिए अर्मादित शब्दों का इस्तेमाल करते हैं। सीएम गहलोत भले ही सोनिया और राहुल से ईडी की पूछताछ व नोटिस पर गुस्सा जाएं, लेकिन उनका असली गुस्सा बड़े भाई अग्रसेन गहलोत पर सीबीआई की छापा मार कार्यवाही पर है। 17 जून को ही सीएम गहलोत के बड़े भाई और जोधपुर के खाद बीज कारोबारी अग्रसेन गहलोत के आवास और अनुपम कृषि प्रतिष्ठान पर सीबीआई से छापेमारी कर 2007 से 2009 के बीच हुए खाद घोटाले में पूछताछ की।

मुख्यमंत्री गहलोत को लगता है कि यह कार्यवाही पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के इशारे पर हुई है ताकि देश भर में अशोक गहलोत की छवि खराब की जा सके। यही वजह है कि राहुल गांधी से ईडी की पूछताछ के विरोध में किए गए सत्याग्रह में देश के प्रधानमंत्री तक को बेशर्म कहा जा रहा है। यहां तक उनके बाप दादा को भी राजनीति में घसीटा जा रहा है। ऐसी भाषा का इस्तेमाल पूर्व में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी कर चुकी है। ऐसा प्रतीत होता है कि अशोक गहलोत भी ममता के पद चिन्हों पर चल रहे हैं। राजनेताओं की व्यक्तिगत द्वेषता हो सकती है, लेकिन फिर भी भाषा की मर्यादा का ख्याल तो रखना ही चाहिए। अशोक गहलोत तो स्वयं को महात्मा गांधी का अनुयायी मानते हैं। क्या महात्मा गांधी का अनुयायी देश के प्रधानमंत्री को बेशर्म कहेगा? इस सवाल का जवाब खुद सीएम गहलोत को देना चाहिए। जहां तक बड़े भाई अग्रसेन गहलोत पर आरोप है तो सीएम को यह समझना चाहिए कि खाद घोटाला यूपीए सरकार के समय का है और कांग्रेस के डॉ. मनमोहन सिंह ही देश के प्रधानमंत्री थे। यूपीए सरकार की जांच एजेंसियों ने ही माना था कि खाद बीज व्यापारियों को जो खाद गरीब किसानों को रियायती दर पर वितरण करने के लिए दी गई, उसे विदेशी कंपनियों को ऊंची कीमतों में बेच दिया गया। ऐसे कारोबारी अकेले अग्रसेन गहलोत नहीं है, बल्कि देशभर में कई कारोबारी है। सीबीआई की ताजा एफआईआर में अग्रसेन गहलोत के साथ साथ 17 अन्य कारोबारी भी आरोपी है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button