विश्वनाथ धाम का उद्धार चुनावी स्टंट…?

श्याम कुमार

हमारे देश में फर्जी सेकुलरियों की एक देशव्यापी विशेष जमात है, जिसमें कट्टरपंथी मुसलिम, हिन्दू नामधारी हिंदूहंता तथा नेहरूवंशी कांग्रेस सहित अन्य विभिन्न हिंदूविरोधी राजनीतिक दल शामिल हैं। जिस प्रकार पप्पू का एकसूत्री कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गाली देते रहना है, उसी प्रकार इस फर्जी सेकुलरिया जमात का एकसूत्री कार्यक्रम भारतीय संस्कृति एवं हिंदू धर्म का खात्मा करना है।आजादी से पहले सैकड़ों साल तक भारतीय संस्कृति एवं हिन्दू धर्म के दमन का जो काम विदेशी मुसलिम हमलावरों व अंग्रेजों ने किया, वही काम आजादी के बाद सत्तर वर्षों में नेहरू वंश ने किया। चूंकि मोदी सत्ता में आने के बाद विगत सात वर्षों में भारतीय संस्कृति एवं हिंदुओं को दमन के नरक से निकालकर उनका उद्धार कर रहे हैं, इसलिए स्वाभाविक रूप से मोदी उस फर्जी सेकुलरिया जमात का निशाना बन गए हैं। यह जमात मोदी के हर काम का विरोध करती है, भले ही वह काम जनता के अतिकल्याण का क्यों न हो! वरिष्ठ पत्रकार राजेश राय ने बहुत सटीक टिप्पणी की है कि यदि मोदी कहेंगे कि हमारे पूर्वज ऋषि-मुनि थे तो ये विपक्षी कहेंगे कि ‘नहीं, हम तो राक्षस की संतान हैं।’

वाराणसी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सहयोग से असंभव को संभव कर देने का चमत्कार कर दिखाया है। काशी का जगत-प्रसिद्ध विश्वनाथ धाम अनेक अत्यंत संकरी एवं गंदी गलियों के बीच विद्यमान था, जिनसे होकर मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचना टेढ़ी खीर हुआ करता था। वाराणसी प्रधानमंत्री मोदी का संसदीय निर्वाचनक्षेत्र है। मोदी के आने से पहले सम्पूर्ण वाराणसी का क्षेत्र बड़ी दुर्दशापूर्ण स्थिति में था। प्रधानमंत्री मोदी ने पूरे वाराणसी क्षेत्र के उद्धार का बीड़ा उठाया तथा मात्र सात साल के उनके प्रधानमंत्रित्वकाल में वाराणसी का क्रमशः कायाकल्प होता जा रहा है। फ्लाईओवर आदि भी बन रहे हैं। उसी क्रम में मोदी ने बाबा विश्वनाथ धाम के उद्धार का संकल्प लिया, जिसे लेकर मोदी के विरोधी उस समय उनका उपहास उड़ाते थे और कहते थे कि ऐसा हो पाना बिलकुल असंभव है। लेकिन -‘मोदी है तो मुमकिन है’ मुहावरा साकार हुआ तथा मात्र तीन वर्ष की बहुत कम अवधि में विश्वनाथ धाम का कलेवर नए चमत्कारिक रूप में सामने आ गया।पहले विश्वनाथ मंदिर का परिसर तीन हजार वर्गफुट था, जो अब पांच लाख वर्गफुट हो गया है। पहले ज्ञानव्यापी कूप एवं विशाल नंदी वर्तमान मंदिर से अलग थे, क्योंकि वे उस प्राचीन मंदिर का हिस्सा थे, जिसे खूंखार औरंगजेब ने तोड़कर वहां मसजिद बना दी थी। किन्तु अब ज्ञानव्यापी कूप एवं विशाल नंदी वर्तमान मंदिर-परिसर का हिस्सा हो गए हैं।

इसके लिए वहां की घनी आबादी के मकानों का अधिग्रहण करना आवश्यक था, जोकि वास्तव में असंभव कार्य था। लेकिन मुख्यमंत्री योगी ने प्रधानमंत्री मोदी के संकल्प को पूरा करने के लिए वह असंभव कार्य संभव बनाया तथा वहां के निवासियों को संतोषजनक मुआवजा देकर पूरा क्षेत्र खाली कराया गया। खाली कराने पर वहां के घरों में चालिस बहुत प्राचीन मंदिर निकले, जिन्हें सुरक्षित रखते हुए वर्तमान धाम-परिसर में सम्मिलित कर लिया गया है। विश्वनाथ धाम के नवनिर्माण का पहला दौर पूरा हुआ है, जिसका लोकार्पण गत १३ जनवरी को शुभ मुहूर्त में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा किया गया।मोदी ने जिस पूरे विधिविधान से धाम के नए कलेवर का लोकार्पण किया, उसे देखकर पूरा विश्व चकित रह गया। मोदी ने कड़ाके की ठंड में आधा शरीर गंगा जी में डुबोकर पांच डुबकियां लगाईं तथा लगभग आधे घंटे तक उसी प्रकार जल में खड़े रहकर माला फेरी व मंत्रों का जाप किया। तत्पश्चात कलश में गंगाजल भरकर नवनिर्मित गलियारे से होकर गंगा तट से मंदिर-प्रांगण में आए और सारे विधिविधान का पालन करते हुए बाबा विश्वनाथ का अभिषेक किया। अभिषेक के समय मोदी ने धोती पहन रखी थी, जिससे उनका व्यक्तित्व और भी आभामय हो रहा था।

एक सज्जन पिछले किसी दिन विश्वनाथ धाम के दर्शन करने गए। उसके बाद उन्होंने वहां हुए कष्टों का फेसबुक में बड़ी कटुता से उल्लेख किया। देशद्रोही नेहरू वंश के लोगों के दिल में मोदी के प्रति जो जहर भरा हुआ है, उससे सभी अवगत हैं। पप्पू तो मोदी को सिर्फ गालियां देता रहता है एवं झूठे प्रलाप करता है। फेसबुक वाले महोदय के मन में भी मोदी के प्रति कलुषता भरी हुई है तथा वह पहले भी मोदी की कटु आलोचना करते रहे हैं। वह सज्जन वाराणसी की दुर्व्यवस्था का पहले जब उल्लेख करते थे, मैं उनका समर्थन करता था तथा उनके पक्ष में लिखता था। किन्तु इस बार उन्होंने हद कर दी और मोदी ने बाबा विश्वनाथ धाम का जो कायाकल्प किया है, उसे चुनावी स्टंट कह डाला। मैंने उनके इस कथन पर आपत्ति करते हुए उन्हें समझाया कि अभी बाबा विश्वनाथ धाम के कायाकल्प का प्रथम दौर पूरा हुआ है तथा आगे अन्य अनेक कार्य होने हैं।निश्चित है कि जब सभी कार्य पूरे हो जाएंगे, तब मंदिर जाने वाले दर्शनार्थियों को होने वाली असुविधाएं समाप्त हो जाएंगी। लेकिन फेसबुक पर वह सज्जन अपनी बात पर अड़े रहे तथा उन्होंने मंदिर के उस कायाकल्प को पुनः चुनावी स्टंट कहा। उत्तर में मैंने कहा कि उन्हें समझाना दीवार से अपना सिर फोड़ना है तथा भगवान भी उन्हें नहीं समझा सकते। एक बड़े कवि हैं, जो मेरे प्रिय रहे हैं तथा उन्हें मैं ‘रंगभारती’ के आयोजनों में बुलाता रहा हूं। उनके बारे में भी पता लगा है कि वह देशभर में जहां जाते हैं, मोदी के विरुद्ध विषवमन करते हैं।

देश में कट्टरपंथी मुसलिमों व अन्य फर्जी सेकुलरियों आदि का जो बड़ा वर्ग है, उसे सत्तर साल तक देश को लूट-लूटकर अपनी तिजोरियां भरने वालों के पाप एवं देशद्रोह नही दिखाई देते तथा वे पूर्णरूपेण ईमानदार, कठोर परिश्रमी और देशभक्त मोदी की आलोचना में हर समय लगे रहते हैं। उन्हें यह समझ में नहीं आता कि मोदी ने केवल सात साल के अपने कार्यकाल में देश को दलदल से निकालकर कितना विकसित कर दिया है तथा शताब्दियों बाद फिर भारत विश्व में शक्तिशाली एवं सिरमौर बन रहा है!विश्वनाथ धाम के दर्शन में इस समय जो कठिनाइयां हो रही हैं, उनका उल्लेख करते समय इतनी-सी सीधी बात ध्यान में रखनी चाहिए कि जब कोई व्यक्ति अपना नया घर बनवाता है तो उस घर में रहना शुरू कर देने केष बापद भी वहां काम होता रहता है, जिसकी कठिनाइयां उस नए घर में निवास करने वालों को काम बिलकुल पूरा होने तक झेलनी पड़ती हैं।मंदिर को भक्तों के लिए दर्शन हेतु अधिक समय तक रोका जाना नहीं उचित था, इसलिए पुनरुद्धार किए जा रहे मंदिर में दर्शनार्थियों को अब आगमन की छूट दी जानी आवश्यक थी। वैसे, मंदिर का प्रबंध देखने वालों को भी सही आलोचनाओं पर पूरी तरह ध्यान देकर दर्शनार्थियों को होने वाली कठिनाइयों एवं अव्यवस्थाओं को दूर कर देना चाहिए तथा इसमें जिन लोगों की भी शिथिलता पाई जाय, उन्हें कड़ा दंड दिया जाना चाहिए।

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