आम जन ने भरी हुंकार,जाने वाली है वोट चोर सरकार:अनिल यादव

लोकतंत्र की मजबूती के लिए निष्पक्ष चुनाव और मताधिकार की पारदर्शिता जरूरी, जनता के विश्वास को बनाए रखना हर संवैधानिक संस्था की जिम्मेदारी।

लखनऊ। पूर्व सदस्य, राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग, उत्तर प्रदेश सरकार अनिल यादव ने कहा कि लोकतंत्र की असली ताकत जनता के मताधिकार में निहित है। देश का प्रत्येक नागरिक अपने एक वोट के माध्यम से लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करता है। इसलिए मतदाता सूची से लेकर मतदान और मतगणना तक चुनाव की प्रत्येक प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और जवाबदेह होनी चाहिए।

अनिल यादव ने कहा कि आज देश में मताधिकार की सुरक्षा, चुनावी पारदर्शिता और लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को लेकर जनता के बीच गंभीर चर्चा हो रही है। जब भी मतदाता सूची में गड़बड़ी, वोट काटे जाने, फर्जी मतदान अथवा चुनावी प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोप सामने आते हैं, तो उनका निष्पक्ष और समयबद्ध समाधान होना चाहिए। लोकतंत्र में जनता का विश्वास सबसे महत्वपूर्ण है और इस विश्वास को बनाए रखना चुनाव आयोग सहित सभी संबंधित संस्थाओं की संवैधानिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि ‘आम जन ने भरी हुंकार, जाने वाली है वोट चोर सरकार’ केवल एक राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि मताधिकार की सुरक्षा और चुनावी जवाबदेही को लेकर उठ रही आवाज का प्रतीक है। जनता चाहती है कि उसके वोट का सम्मान हो, उसकी आवाज सुनी जाए और लोकतांत्रिक व्यवस्था में उसकी भागीदारी पूरी तरह सुरक्षित रहे।

अनिल यादव ने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता का वास्तविक आधार जनता का विश्वास होता है। किसी भी सरकार और राजनीतिक व्यवस्था का मूल्यांकन जनता के सवालों, जनहित के कार्यों और संवैधानिक मूल्यों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता के आधार पर होना चाहिए। जनता को सवाल पूछने, अपनी असहमति व्यक्त करने और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराने का पूरा लोकतांत्रिक अधिकार है।

उन्होंने कहा कि बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने संविधान के माध्यम से प्रत्येक नागरिक को समानता, स्वतंत्रता और राजनीतिक अधिकारों की मजबूत आधारशिला प्रदान की। संविधान ने गरीब, किसान, मजदूर, पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक और वंचित समाज के प्रत्येक व्यक्ति को समान नागरिक अधिकार दिए हैं। वोट का अधिकार सामाजिक और राजनीतिक भागीदारी का महत्वपूर्ण माध्यम है। इसकी रक्षा करना हम सभी का सामूहिक दायित्व है।

उन्होंने आगे कहा कि आज जरूरत है कि युवा वर्ग, महिलाएं, किसान, मजदूर और समाज के सभी जागरूक नागरिक चुनावी प्रक्रिया के प्रति सजग रहें। मतदाता सूची में अपना नाम जांचें, किसी भी प्रकार की अनियमितता दिखाई देने पर निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया के तहत शिकायत दर्ज कराएं और लोकतंत्र की मजबूती के लिए अपनी जिम्मेदारी निभाएं।

अनिल यादव ने कहा कि लोकतंत्र किसी एक व्यक्ति, दल या सरकार की संपत्ति नहीं है। लोकतंत्र देश के करोड़ों नागरिकों की सामूहिक शक्ति और संविधान की आत्मा है। इसलिए चुनावी प्रक्रिया पर उठने वाले प्रत्येक सवाल का जवाब तथ्यों, पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच के माध्यम से दिया जाना चाहिए।

अंत में उन्होंने कहा कि देश का लोकतंत्र तभी मजबूत होगा, जब प्रत्येक नागरिक के वोट की कीमत समान होगी और किसी भी मतदाता को अपने अधिकारों से वंचित नहीं होना पड़ेगा। जनता की आवाज का सम्मान, संविधान की सर्वोच्चता और निष्पक्ष चुनाव ही एक मजबूत लोकतांत्रिक भारत की पहचान हैं। अनिल यादव ने दोहराया कि लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि है और जनता के मताधिकार की रक्षा से कोई समझौता नहीं होना चाहिए।

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