UP में उद्यमियों को मिलेगा ग्लोबल मंच, दिखेगी विरासत और आधुनिकता की नई तस्वीर

उत्तर प्रदेश अब अपनी विरासत, हुनर और आधुनिक उद्यमिता को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. प्रदेश के उद्यमियों और स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार से जोड़ने की कोशिशों के बीच ऐसा मंच तैयार हो रहा है, जहां परंपरा और तकनीक, संस्कृति और कारोबार का नया संगम देखने को मिलेगा. यह पहल यूपी की समृद्ध विरासत को दुनिया के सामने रखने के साथ-साथ स्थानीय उद्यमियों के लिए नए अवसरों और संभावनाओं के द्वार खोल सकती है.

उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो का चौथा संस्करण 25 से 29 सितंबर तक ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में आयोजित होगा. इसमें काशी के 45 उद्यमी अपने पारंपरिक और आधुनिक उत्पादों का प्रदर्शन करेंगे. ट्रेड शो के जरिए स्थानीय हस्तशिल्पियों और उद्यमियों को वैश्विक बाजार से जुड़ने का अवसर मिलेगा. बनारसी सिल्क साड़ी, लकड़ी के खिलौने, गुलाबी मीनाकारी और सॉफ्ट स्टोन जाली वर्क जैसे काशी के प्रसिद्ध उत्पाद यहां आकर्षण का केंद्र रहेंगे.

बनारसी सिल्क से गुलाबी मीनाकारी तक दिखेगी काशी की पहचान

ट्रेड शो में हस्तनिर्मित बनारसी सिल्क के अलग-अलग उत्पादों के साथ लकड़ी के खिलौने और गुलाबी मीनाकारी भी प्रदर्शित की जाएगी. इसके अलावा सॉफ्ट स्टोन जाली वर्क से जुड़े उत्पाद भी देखने को मिलेंगे. आधुनिक बाजार की मांग को ध्यान में रखकर तैयार किए गए उत्पादों को भी स्टॉल पर जगह दी जाएगी. इससे काशी की पारंपरिक कला के साथ बदलते बाजार के अनुरूप तैयार किए जा रहे उत्पादों की झलक मिलेगी.

45 उद्यमियों ने कराया पंजीकरण

उद्योग विभाग के उपायुक्त अभिषेक प्रियदर्शी के अनुसार, वाराणसी से 45 उद्यमियों ने ट्रेड शो के लिए पंजीकरण कराया है. इनमें एक जनपद-एक उत्पाद (ODOP), सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) तथा भौगोलिक संकेतक (GI) उत्पादों से जुड़े उद्यमी शामिल हैं. मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान से जुड़ी महिला उद्यमी भी इस आयोजन में अपने उत्पादों का प्रदर्शन करेंगी.

लौंग लता से बनारसी पान तक होंगे खास आकर्षण

काशी की पहचान से जुड़े खानपान के उत्पाद भी ट्रेड शो में प्रदर्शित किए जाएंगे. इनमें लौंग लता, तिरंगा बर्फी और बनारसी पान शामिल हैं. इसके साथ प्राकृतिक वेलनेस उत्पाद और कंटेनर बैग भी प्रदर्शित किए जाएंगे. आयोजन में काशी के उत्पादों के जरिए उसकी प्राचीन विरासत के साथ आधुनिक बाजार की जरूरतों और बदलते कारोबारी परिवेश को भी सामने रखा जाएगा.

आखिरकार, उत्तर प्रदेश की पहचान अब सिर्फ उसकी ऐतिहासिक विरासत तक सीमित नहीं, बल्कि नए विचारों, आधुनिक उद्यमिता और बदलती कारोबारी सोच से भी जुड़ रही है। अगर स्थानीय हुनर को वैश्विक बाजार, तकनीक और मजबूत मंच का साथ मिलता है, तो यूपी की परंपरा और आधुनिकता मिलकर विकास की एक नई कहानी लिख सकती है। विरासत की जड़ों से जुड़कर वैश्विक पहचान की ओर बढ़ता उत्तर प्रदेश—यही बदलते यूपी की नई तस्वीर है।

Related Articles

Back to top button