देश में एक बार फिर एक नाम सुर्खियों में है—सोनम वांगचुक। वही सोनम वांगचुक, जिन्हें लोग शिक्षा सुधारक, पर्यावरणविद और इनोवेटर के रूप में जानते हैं। लेकिन इस समय चर्चा उनकी किसी नई खोज की नहीं, बल्कि उनके अनिश्चितकालीन अनशन और उससे जुड़े विवाद की हो रही है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे इस आंदोलन ने अब न्यायपालिका, राजनीति और लाखों छात्रों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।आखिर कौन हैं सोनम वांगचुक? उनका आंदोलन किस बारे में है? उनकी मांगें क्या हैं? सरकार का पक्ष क्या है? और आखिर यह पूरा मामला देश की राजनीति और शिक्षा व्यवस्था से कैसे जुड़ गया?
कौन हैं सोनम वांगचुक?
सोनम वांगचुक लद्दाख के रहने वाले इंजीनियर, शिक्षा सुधारक और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता हैं। उन्होंने लद्दाख में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सेकमोल (SECMOL) की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका मानना रहा कि बच्चों को केवल किताबों से नहीं बल्कि प्रयोग और व्यवहारिक अनुभव से सीखना चाहिए। उनकी इसी सोच ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय पहचREAD also
आइस स्तूपा से दुनिया में पहचान
सोनम वांगचुक की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है आइस स्तूपा प्रोजेक्ट रहा । जो लद्दाख में पानी की कमी को दूर करने के लिए उन्होंने ऐसा मॉडल तैयार किया जिसमें सर्दियों का पानी बर्फ के विशाल स्तूप के रूप में जमा किया जाता है और गर्मियों में धीरे-धीरे पिघलकर किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराता है।
इस नवाचार की पूरी दुनिया में सराहना हुई।
3 Idiots से क्या है रिश्ता?
जब आमिर खान की फिल्म 3 Idiots आई तो लोगों ने फिल्म के किरदार फुंसुख वांगड़ू को सोनम वांगचुक से जोड़ना शुरू कर दिया। हालांकि बाद में स्वयं सोनम वांगचुक ने कहा कि फिल्म पूरी तरह उनके जीवन पर आधारित नहीं थी और उन्होंने खुद को उस किरदार से अलग बताया।
अब क्यों चर्चा में हैं?
हाल के दिनों में सोनम वांगचुक दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे हैं। यह आंदोलन युवाओं और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर चल रहे अभियान का हिस्सा बताया जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार आंदोलन में परीक्षा प्रणाली से जुड़े कथित घोटालों और जवाबदेही की मांग प्रमुख मुद्दे हैं।
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स्वास्थ्य को लेकर बढ़ी चिंता
अनशन लंबा खिंचने के बाद उनकी तबीयत को लेकर चिंता बढ़ी। रिपोर्टों के मुताबिक उनका वजन काफी कम हुआ है और डॉक्टर लगातार निगरानी कर रहे हैं। इसी बीच दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल हुई।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि किसी भी नागरिक का जीवन महत्वपूर्ण है। अदालत ने प्रशासन को निर्देश दिया कि सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी की जाए और यदि मेडिकल टीम को आवश्यकता लगे तो तुरंत उपचार उपलब्ध कराया जाए।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ
सोनम वांगचुक के आंदोलन पर विभिन्न राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएँ भी सामने आई हैं। कुछ विपक्षी नेताओं ने उनसे मुलाकात कर समर्थन व्यक्त किया है।वहीं सरकार समर्थक पक्ष का कहना है कि किसी भी मुद्दे का समाधान संवैधानिक और संस्थागत प्रक्रिया से होना चाहिए। इसी बीच कई सार्वजनिक हस्तियों ने भी उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई है।
समर्थकों का क्या कहना है?
समर्थकों का कहना है कि यह केवल एक व्यक्ति का आंदोलन नहीं बल्कि युवाओं, शिक्षा व्यवस्था और जवाबदेही की मांग का प्रतीक बन चुका है। उनका मानना है कि शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध किसी भी लोकतंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
आलोचकों की राय
दूसरी ओर आलोचकों का कहना है कि इतने बड़े राष्ट्रीय मुद्दों का समाधान केवल आंदोलन से नहीं बल्कि संवाद और संस्थागत सुधारों के माध्यम से होना चाहिए। कुछ लोगों का यह भी मानना है कि इस तरह के आंदोलनों का राजनीतिक असर भी पड़ता है।
आगे क्या?
अब सभी की नजर दो बातों पर है— पहला, सोनम वांगचुक का स्वास्थ्य। दूसरा, उनकी मांगों पर सरकार और संबंधित संस्थानों की आगे की प्रतिक्रिया। यदि बातचीत आगे बढ़ती है तो आंदोलन की दिशा बदल सकती है, जबकि लंबे समय तक गतिरोध रहने पर यह मामला और बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।
सोनम वांगचुक आज केवल एक वैज्ञानिक या शिक्षा सुधारक का नाम नहीं हैं। वे एक ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने शिक्षा, पर्यावरण और सामाजिक मुद्दों पर लगातार अपनी आवाज़ उठाई है। वर्तमान आंदोलन को लेकर अलग-अलग राय हो सकती है, लेकिन इतना स्पष्ट है कि इसने देशभर में बहस को तेज़ कर दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बातचीत, न्यायिक प्रक्रिया और सरकारी कदम इस पूरे घटनाक्रम को किस दिशा में ले जाते हैं।
आपकी क्या राय है?
क्या लोकतांत्रिक व्यवस्था में ऐसे आंदोलनों से सकारात्मक बदलाव आते हैं?
या फिर समाधान केवल संवाद और संस्थागत सुधारों से निकल सकता है?
सोनम वांगचुक से मिलने और समर्थन देने वाले प्रमुख लोगों में शामिल हैं:-
अरविंद केजरीवाल:— आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री ने जंतर-मंतर पर उनसे मुलाकात की।
कपिल सिब्बल:——वरिष्ठ वकील और राजनेता ने दिल्ली में उनसे मुलाकात की थी।
डिंपल यादव: —–समाजवादी पार्टी की सांसद अन्य वरिष्ठ सपा नेताओं के साथ उनसे मिलने पहुंची थीं। उन्होंने कहा मैं खुद एक मां हूं, समझती हूं बच्चों का दर्द,अखिलेश जी पिता हैं। हम बच्चों का दर्द बखूबी समझते हैं। मैं आप छात्रों का दर्द समझ सकती हूं। हम समझते हैं कि बच्चों की क्या उम्मीदें हैं। उनके क्या ख्वाब हैं। वे कहां आगे बढ़ना चाहते हैं।
समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने वांगचुक से अनशन तोड़ने की अपील की है। इसके अलावा, सांसद डिंपल यादव, धर्मेंद्र यादव और विधायक रागिनी सोनकर सहित कई सपा नेताओं ने जंतर-मंतर पहुंचकर उन्हें अपना सीधा समर्थन दिया और सरकार पर संवेदनहीन होने का आरोप लगाया। अन्य विपक्षी नेता: कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और नेशनल कॉन्फ्रेंस सहित कई अन्य विपक्षी दलों के नेताओं ने उनके आंदोलन का समर्थन किया है।
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़े सोनम वांगचुक के अनशन के 19वें दिन विपक्ष लामबंद हो गया है। अरविंद केजरीवाल ने जंतर-मंतर पर मुलाकात की, वहीं सोनाक्षी सिन्हा ने भी समर्थन दिया है।
वांगचुक ने कहा, “जनमत को जागरूक करना और सत्ता में बैठे लोगों को समझाना, एक ही सिक्के के दो पहलू हैं. जब आप जनता को जागरूक करते हैं, तो सरकारों में बदलाव आता है. उन्हें जनमत की परवाह होती है. हो सकता है कि उन्हें मेरी सेहत की परवाह न हो.
केजरीवाल ने की मुलाकात, वांगचुक को बताया ‘महान शिक्षाविद’
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने गुरुवा को दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचकर सोनम वांगचुक से मुलाकात की। केजरीवाल ने वांगचुक की तारीफ करते हुए उन्हें एक “महान शिक्षाविद” बताया। उन्होंने कहा कि वांगचुक ने देश और लद्दाख के लिए कई बार बिना थके काम किया है। केजरीवाल ने देश के लिए वांगचुक के ‘अपनी जान जोखिम में डालने’ वाले साहसी कदम की भी जमकर सराहना की।
अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा ने भी उठाई आवाज
सियासी गलियारों से इतर, कला और सिनेमा जगत से भी वांगचुक को समर्थन मिलने लगा है। पश्चिम बंगाल से सांसद शत्रुघ्न सिन्हा की बेटी और बॉलीवुड अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो जारी कर अपना समर्थन जताया है।
उन्होंने कहा, “मैंने इससे पहले कभी इस तरह का कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है, लेकिन अब में और ज्यादा चुप नहीं रह सकती।” सोनाक्षी ने लोगों को याद दिलाया कि देश के बच्चों के खातिर वांगचुक पिछले 18 दिनों से बिना कुछ खाए भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं।
सोनम वांगचुक की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का आज 20वां दिन है और अब उनका स्वास्थ्य बहुत गिर गया है। शिक्षा सुधार के लिए काम करने वाले वांगचुक ने अपना विरोध जारी रखने और 20 जुलाई को संसद तक होने वाले प्रस्तावित मार्च में शामिल होने का अपना संकल्प दोहराया। सीजेपी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया जिसमें उन्होंने आंदोलन में मौजूद लोगों को संबोधित किया।
सोनम ने कहा, “मैं किसी भी तरह 20 जुलाई तक जिंदा रहूंगा ताकि आप सभी के साथ संसद तक मार्च कर सकूं। और अगर 20 जुलाई को हमारा मार्च सफल नहीं हुआ, तो मैं भूत बनकर वापस आऊंगा! चलो संसद तक मार्च करें!”
कांग्रेस ने तोड़ी चुप्पी, केंद्र की ‘जवाबदेही’ पर उठाए सवाल
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की तरफ से आयोजित इस विरोध प्रदर्शन पर अब तक सधी हुई खामोशी बनाए रखने वाली कांग्रेस ने भी अपना रुख साफ कर दिया है। कांग्रेस ने वांगचुक की बिगड़ती सेहत पर चिंता जताते हुए उनसे अपनी भूख हड़ताल खत्म करने की अपील की है।
पार्टी ने स्पष्ट किया कि वह परीक्षा प्रणाली के पतन और बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में जवाबदेही की भारी कमी को लेकर वांगचुक के “दर्द और आक्रोश” के साथ मजबूती से खड़ी है। कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि पार्टी वांगचुक की चिंताओं और गुस्से से सहमत है। गुजरात से कांग्रेस नेता जिग्नेश मेवाणी ने भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस युवाओं और वांगचुक की मांगों के साथ मजबूती से खड़ी है।



