प्रभारी मंत्री जयवीर सिंह नहीं करा पाए कोई कार्रवाई!

जिले के प्रभारी मंत्री जयवीर सिंह भी नहीं करा पाए कोई कार्रवाई! मोटी रकम देकर कमाऊ जेल पहुंचे अधीक्षकों पर नहीं होती कार्यवाही। बुलंदशहर, आगरा और फिरोजाबाद जिला जेल में उत्पीड़न वसूली चरम पर। जेलों में घटनाएं और शिकायतें होने के बाद भी नहीं हुई कोई कार्यवाही।

राकेश यादव

लखनऊ। लाखों और करोड़ रुपए देकर कमाऊ जेलों पर तैनात हुए जेल अधीक्षकों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं होती है। बुलंदशहर, आगरा और फिरोजाबाद जिला जेल इसका जीता जागता उदाहरण है। इन जेलों में बंदियों की मौत, उत्पीड़न और वसूली की तमाम शिकायतों और घटनाओं के बाद प्रमुख सचिव कारागार का संरक्षण प्राप्त होने की वजह से किसी भी जेल अधीक्षक के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की जाती है। कार्यवाही नहीं होने से जेल अधिकारी बेलगाम हो गए है।

सूत्रों के मुताबिक मोटी रकम देकर मैनपुरी से बुलंदशहर जेल पहुंची महिला जेल अधीक्षक ने आतंक मचा रखा है। अधीक्षक ने मशक्कत, बैठकी, मनचाही बैरेक में जाने के लिए मोटी रकम वसूल कर रही हैं। यही नहीं बंदी कल्याण कोष के लिए संचालित कैंटीन में दो गुने दामों पर खाद्य वस्तुएं बिकवाकर वसूली को बढ़ा दी है। बीते सप्ताह जेल में एक विचाराधीन बंदी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मौत पर बंदियों ने जमकर हंगामा काटा और आरोप लगाया कि बीमार होने पर बंदी को समय पर उपचार नहीं दिया गया। जिससे बंदी की मौत हो गई। इससे पूर्व इस जेल में नशे में धुत एक सुरक्षाकर्मी को ड्यूटी में जाने से रोकने पर जेलगेट पर बुजुर्ग सुरक्षाकर्मी की जमकर पिटाई कर दी। शिकायत के बाद भी दोषी के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की गई। जेल में अवैध वसूली, सुरक्षाकर्मियों में मारपीट और बंदी की मौत सरीखी जैसी गंभीर घटनाएं होने के बाद भी जेल अधीक्षक के खिलाफ आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।

इसी प्रकार हाल ही में आगरा जिला जेल में अवैध वसूली को लेकर जिले के प्रभारी मंत्री जयवीर सिंह से समीक्षा बैठक में शिकायत की गई। शिकायत पर प्रभारी मंत्री ने आगरा जेल अधीक्षक को तलब कर पूछताछ भी की। मामला सुर्खियों में आने के बाद भी प्रभारी मंत्री अधीक्षक के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करा पाए। इससे पूर्व जेल का एक वीडियो वायरल हुआ। इस वायरल वीडियो में जेल प्रशासन के बंदियों के उत्पीड़न और अवैध वसूली की खुलेआम शिकायत की गई। इसके अलावा क्रिप्टो करेंसी के मामले में बंद एक बंदी से दो करोड़ रुपए की मांग की गई। सुर्खियों में आने के बाद भी यह मामला कुछ दिनों बाद ही फाइलों में कैद होकर रह गया। इन मामलों में भी किसी दोषी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।

इसी प्रकार मोटी रकम देकर एटा से फिरोजाबाद जेल पहुंचे अधीक्षक ने हाता, मशक्कत, कैंटीन के दामों में बेतहाशा वृद्धि कर दी है। बीते दिनों वसूली को लेकर जेल प्रशासन के अधिकारियों ने एक बंदी की जमकर पिटाई कर दी। पिटाई का शिकार हुए बंदी ने जब इसकी शिकायत न्यायालय में की तो न्यायालय ने पिटाई करने के आरोपी जेलर, डिप्टी जेलर और एक वार्डर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराए जाने का आदेश दिया। न्यायालय के आदेश से जेल अधिकारियों में खलबली मची हुई है। उधर शासन और मुख्यालय के अधिकारियों ने किसी भी दोषी अधिकारी और सुरक्षाकर्मी के खिलाफ अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की है।

जिम्मेदार अधिकारी नहीं उठाते फोन

मोटी रकम देकर कमाऊ जेलों पर पहुंचे अधिकारियों और कर्मियों की वसूली और तानाशाही के संबंध में जब प्रमुख सचिव कारागार अनिल गर्ग से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो कई प्रयासों के बाद भी इनसे बात नहीं हो पाई। उधर कारागार मुख्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आगरा जिला जेल में अवैध वसूली की शिकायत आने, बुलंदशहर जेल में अधीक्षक की शिकायत होने और फिरोजाबाद जेल में बंदी की पिटाई करने वाले अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराए जाने का आदेश दिए जाने की तो पुष्टि की लेकिन इन मामलों में और कुछ भी बोलने से साफ इनकार कर दिया।

नोट: आगरा, बुलंदशहर जेल

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