नज़ारत और जेलों से चल रहा एआईजी जेल के घर का खर्च!

नज़ारत और जेलों से चल रहा एआईजी जेल के घर का खर्च! प्रदेश की जेलों से पर्ची भेजकर मंगाया जाता राशन, सब्जी, दूध। नज़ारत से मंगाए जा रहे लैपटॉप और घरों की गाड़ियों में पेट्रोल और डीजल।

राकेश यादव

लखनऊ। कारागार मुख्यालय में तैनात अपर महानिरीक्षक जेल प्रशासन को प्रशासनिक व्यवस्था की जानकारी भले ही शून्य हो किंतु वसूली के संसाधन जुटाने में इन्हें महारत हासिल कर रखी है। हकीकत यह है कि एआईजी जेल प्रशासन के घर का खर्च विभाग के नज़ारत अनुभाग और प्रदेश की जेलों से चल रहा है। पर्ची भेजकर जेलों से राशन, सब्जी और दूध मंगवाने की जांच मुख्यालय स्तर पर पेंडिंग पड़ी हुई है। वहीं दूसरी ओर नज़ारत से आधुनिक उपकरण मसलन लैपटॉप, कंप्यूटर, एलईडी स्क्रीन समेत तमाम घरेलू उपकरण मंगाए जाते है। इसके साथ ही घर की गाड़ियों में पेट्रोल और डीजल भी नज़ारत के मद से भरवाया जा रहा है। इन तमाम अनियमिताओं के बाद भी शासन के आला अफसर इस मसले पर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।

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कारागार मुख्यालय में तैनात अपर महानिरीक्षक कारागार (एआईजी) प्रशासन ने प्रदेश की जेलों की ही नहीं कारागार मुख्यालय की व्यवस्थाओं को भी ध्वस्त कर दिया है। वसूली के चक्कर में एआईजी जेल प्रशासन ने मुख्यालय के समस्त कमाऊ पटल पर अपने चहेते बाबुओं को तैनात कर रखा है। वसूली कर देने वाले इस बाबुओं का पटल परिवर्तन नहीं किया जाता है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक जेलर डिप्टी जेलर संवर्ग का लंबे समय से प्रभार संभाल रहे बाबू अनिल वर्मा का पटल परिवर्तन किया ही नहीं जाता है। यह बाबू जेलर और डिप्टी जेलर के तबादलों में जमकर वसूली को लेकर हमेशा चर्चा में रहे हैं। इसी प्रकार पूर्व एआईजी कारागार प्रशासन के समय से एआईजी के निजी सचिव का प्रभार संभाल रहे बाबू का भी लंबे समय से पटल परिवर्तन नहीं किया गया है। इसी प्रकार पिछले करीब दो दशक से कानपुर परिक्षेत्र का प्रभार संभाल रहे विमल यादव को डीआईजी कारागार मुख्यालय का भी प्रभार दे दिया गया है।

सूत्रों का कहना है कि बीते दिनों मुख्यालय को एआईजी प्रशासन के जेलों से पर्चियां भेजकर दाल, चावल, दूध, सब्जी समेत अन्य घरेलू सामान के साथ अत्याधुनिक घरेलू उपकरण मसलन मोबाइल फोन, टीवी, एलईडी स्क्रीन, सीसीटीवी और खानपान की वस्तुएं मंगवाए जाने की शिकायत की गई। मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्कालीन महानिदेशक कारागार पीवी रामाशास्त्री ने शिकायत की जांच कराकर दोषी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। यह शिकायत मुख्यालय की फाइलों में कैद होकर रह गई। इस मामले को हुए करीब दो साल से अधिक का समय बीतने के बाद भी अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। सूत्रों की माने तो नजारत और जेलों से घर खर्च चलाने वाले एआईजी ने ले देकर शिकायत का दबवा दिया है। उधर इस संबंध में जब प्रमुख सचिव कारागार अनिल गर्ग और एआईजी प्रशासन धर्मेंद्र सिंह से बात करने का प्रयास किया गया तो दोनों ही अधिकारियों का फोन नहीं उठा।

दो सवालों में एक सवाल का भी जवाब नहीं दे पाए एआईजी जेल

शासन ने जून 2024 में प्रोन्नत आईएएस धर्मेंद्र सिंह को कारागार मुख्यालय में अपर महानिरीक्षक कारागार (प्रशासन) के पद पर तैनात किया। सूत्रों का कहना है शासन में सेटिंग गेटिंग करके नियम विरुद्ध तरीके से जुगाड़ के बल पर इनकी तैनाती कराई गई। नियमानुसार एआईजी कारागार प्रशासन के पद पर सीनियर पीसीएस की तैनाती होती रही है। सूत्रों की माने तो प्रोन्नत आईएएस ने मुख्यालय में एआईजी कारागार प्रशासन का प्रभार संभालने के कुछ समय बाद ही प्रदेश की जेलों के साथ मुख्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था को ध्वस्त कर दी। एआईजी प्रशासन धर्मेंद्र सिंह से एक मुलाकात के दौरान सवाल किया गया कि प्रदेश में कितनी जेल हैं जहां जाली वाले मुलाकातघर बने है और कितनी जेल ऐसी है जहां बंदियों के परिजनों की मुलाकात जेल के अंदर कराई जा रही है। इसके अलावा प्रदेश में कितने सजायाफ्ता और कितने विचाराधीन बंदी है तो वह दोनों ही सवालों का कोई जवाब नहीं दे पाए। यह बात प्रमाणित करती है कि एआईजी जेल का जेल की प्रशासनिक व्यवस्था की कोई जानकारी ही नहीं है।

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