यूपी की जेलों पर उठे सवाल: बांदा के बाद मिर्जापुर में बंदी की मौत

बांदा के बाद मिर्जापुर में एक बंदी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत। परिजनों ने जेल प्रशासन पर इलाज में लापरवाही और पिटाई का लगाए गंभीर आरोप।

राकेश यादव
राकेश यादव

लखनऊ। बांदा के दिन बाद ही मिर्जापुर जिला कारागार में बंद एक विचाराधीन बंदी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। कैदी की मौत की खबर फैलते ही प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया। बंदी के आक्रोशित परिजनों ने पुलिस पर फर्जी मामले में जेल भेजने, जेल प्रशासन पर इलाज में भारी लापरवाही बरतने और जेल के भीतर बेरहमी से पिटाई करने के चलते मौत होने का आरोप लगाया है।

जेल प्रशासन के मुताबिक बीते मंगलवार को अचानक तबीयत खराब होने पर ननकू सिंह को जिला कारागार से मंडलीय अस्पताल ले जाया गया। वहां प्राथमिक इलाज के बाद उसे वापस बैरक में भेज दिया गया। इसके बाद बुधवार की सुबह दोबारा बंदी की हालत बेहद नाजुक होने पर उसे फिर से मंडलीय अस्पताल लाया गया। जहां डॉक्टरों ने परीक्षण के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। मौत की सूचना पाकर अस्पताल पहुंचे परिजनों ने आरोप लगाया कि जेल में तबीयत खराब होने पर भी ननकू का सही और समय पर इलाज नहीं कराया गया। परिजनों ने दावा किया कि जिला कारागार के भीतर उनकी लाठियों से बेरहमी से पिटाई की गई थी, जिसके गहरे चोट के निशान उनके पूरे शरीर पर साफ दिखाई दे रहे हैं और इसी क्रूरता के चलते उनकी जान चली गई है।

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जेल में पिटाई से मौत की बात सामने आने पर नाराज परिजनों ने अस्पताल परिसर में ही जिला प्रशासन और पुलिस के खिलाफ जोरदार हंगामा शुरू कर दिया। पीड़ित परिवार मौके पर ही दोषी डॉक्टरों और जेल प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ तत्काल मुकदमा दर्ज कर सख्त कार्रवाई की मांग पर अड़ा रहा. इसके बाद मौके पर पहुंचे वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने निष्पक्ष जांच का ठोस आश्वासन देकर परिजनों के गुस्से को शांत कराया और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के असली कारणों का पता चल पायेगा। उल्लेखनीय है कि दी दिन पहले बांदा जेल में भी एक बंदी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी।

मादक पदार्थ के फर्जी केस में भेजा था जेल

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, मिर्जापुर के चील्ह थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले चील्ह गांव का रहने वाला ननकू सिंह जिला कारागार में निरुद्ध था। उसे बीती 12 जून को एसओजी और स्थानीय पुलिस ने मादक पदार्थ (हेरोइन) बेचने के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेजा था। ननकू सिंह के बेटे हिमांशु सिंह ने आरोप लगाया कि उसके पिता घर से अनाज का सैंपल लेकर बाजार में बेचने के लिए गए थे, जहां से एसओजी पुलिस ने उन्हें अवैध रूप से उठाकर फर्जी मामले में फंसा दिया। गिरफ्तारी के वक्त पुलिस ने परिजनों को किसी भी तरह की कोई सूचना तक नहीं दी थी। जिससे परिवार परेशान भटकता रहा था।

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