पूर्व मंत्री अब्बास अली जैदी “रुश्दी मियां” का एक और बड़ा प्रयास लाया रंग गैसराम रावत का भी शव विदेश से मंगवाया। बच्चों के सिर से उठा पिता का साया रुश्दी मियां बने सहारा। पहले बीमारी फिर पिता की मौत के बाद परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़। पूर्व विधायक सैय्यद अब्बास अली जैदी “रुश्दी” ने परिवार की हर ज़रुरत का उठाया पूरा जिम्मा।
कुलदीप वर्मा
रुदौली/अयोध्या। सऊदी में काम कर रहे रुदौली विधानसभा के ग्राम सरांय अहमद निवासी गैसराम रावत की मौत के बाद से परिवार गहरे सदमे में है। परिजनों की बस एक ही तमन्ना थी पिता जी का पार्थिव शरीर किसी तरह वतन लौट आए, ताकि अंतिम दर्शन कर सकें। इस दुख की घड़ी में सहारा बनकर सामने आए पूर्व मंत्री अब्बास अली जैदी। उन्होंने परिवार को भरोसा दिलाया कि हर हाल में गैसराम रावत का शव भारत लाया जाएगा। पिछले करीब 30 दिनों के लगातार प्रयास, सऊदी में कागजी प्रक्रिया और सऊदी अधिकारियों से संपर्क के बाद आखिरकार शव भारत लाने की प्रक्रिया पूरी हो सकी।
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गैसराम रावत सऊदी अरब के अरार शहर में बकरी चराने का काम करते थे। लगभग एक महीने पहले बीमार हुए उन्हें इलाज के लिए उनके कफील ने भर्ती कराया गया। परन्तु वह कोमा में चले गए। फिर इनको अरार में भर्ती कराया गया। एक सप्ताह गुजर जाने पर जब परिवार को सूचना मिली तब परेशानी के हालात में परिजनों ने कई जगह गुहार लगायी मगर कोई मदद नही मिली। निराश होकर पूरा परिवार क्षेत्रीय रिश्तेदारों के साथ पूर्व विधायक अब्बास अली जैदी रुश्दी जी से मिले। परिवार की स्थिति एवं मामले की गंभीरता को देखते हुए रुश्दी मियां द्वारा सऊदी अरब में रह रहे अपने लोगों से संपर्क किया गया और तुरंत अरार शहर के लिए रवाना किया। अपने साथी शमसुद्दीन खां की देख रेख में मोहम्मद शारिक़ हुनहुना व मोहम्मद जावेद तेली व अन्य लोगों को अस्पताल में इलाज व देखभाल में हर प्रकार का सहयोग करने को कहा।
गैसराम रावत जिनकी स्थिति बेहद खराब थी उनके उपचार संबंधित जानकारी प्रत्येक दिन परिजनों को देते रहे। इस दौरान अब्बास अली रुश्दी जी अपने साथियों , विंध्याचल सिंह, सुरजीत चौहान ,साजिद राइन, इक़बाल उस्मानी ,अमरेश निषाद, हयात , सहित परिवार से उनके घर जाकर कई बार मिलकर ढांढस बंधाते रहे। दिनांक 26 मई गैसराम रावत की अस्पताल में मृत्यु हो गई। अब्बास अली रुश्दी जी द्वारा भरोसा दिलाया गया कि हर हाल में मृतक गैसराम रावत का पार्थिव शरीर अंतिम संस्कार हेतु सऊदी से गाँव लाया जाएगा। बहुत सारी कागजी औपचारिकताओं को पूर्ण करा के लगभग एक माह के परिवार के इंतिज़ार का समापन हुआ। जब अब्बास अली रुश्दी अपने निजी ख़र्च से पार्थिव को लखनऊ हवाई अड्डे लाने में सफल हुए, और स्वयं उनके पार्थिव को लेकर उनके गांव सरांय अहमद अंतिम संस्कार के लिए रवाना हुए। इस अवसर पर उनके साथ मृतक के बड़े पुत्र सुखनन्दन रावत, उनके अन्य परिजन व, श्री मायाराम रावत, ज्वाला रावत एडवोकेट, राजित राम रावत, फरीद अहमद बाबा, कमलेश यादव, अमरनाथ यादव, निर्मल यादव, सुरजीत चौहान, इक़बाल अहमद, साजिद राइन आदि मौजूद रहे।



